BSEB 12th Result 2026: बिहार बोर्ड टॉपर्स पर होगी धनवर्षा; 2 लाख नकद, फ्री लैपटॉप और स्कॉलरशिप, जानें डिटेल
BSEB Class 12 toppers cash prize 2026: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति आज दोपहर 1:30 बजे इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी करने के साथ ही प्रदेश के होनहारों को पुरस्कृत करने की तैयारी में है। बोर्ड की वार्षिक प्रोत्साहन योजना के तहत टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को 'मेधा दिवस' के अवसर पर भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों में शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना है।
रैंक के अनुसार मिलेगी नकद राशि
बिहार बोर्ड ने तीनों संकायों (विज्ञान, कला और वाणिज्य) के टॉपर्स के लिए अलग-अलग नकद पुरस्कारों का निर्धारण किया है। बोर्ड द्वारा दी जाने वाली राशि इस प्रकार है:
- प्रथम स्थान (1st Rank): 2,00,000 रुपये नकद इनाम।
- द्वितीय स्थान (2nd Rank): 1,50,000 रुपये नकद इनाम।
- तृतीय स्थान (3rd Rank): 1,00,000 रुपये नकद इनाम।
- चतुर्थ और पंचम स्थान (4th & 5th Rank): प्रत्येक छात्र को 30,000 रुपये।
नकद इनाम के साथ मिलेंगे ये शानदार तोहफे
केवल नकद राशि ही नहीं, बल्कि टॉपर्स को डिजिटल दुनिया से जोड़ने और उनकी पढ़ाई को आसान बनाने के लिए अन्य लाभ भी दिए जाएंगे। सभी स्ट्रीम के टॉपर्स को एक-एक मुफ्त लैपटॉप प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें मेडल और प्रशस्ति पत्र (Certificate of Merit) देकर सम्मानित किया जाएगा, जो उनके भविष्य के करियर में मील का पत्थर साबित होगा।
ग्रेजुएशन तक मिलेगी मासिक छात्रवृत्ति
छात्रों की आगे की पढ़ाई में आर्थिक तंगी बाधा न बने, इसके लिए बिहार बोर्ड एक विशेष छात्रवृत्ति योजना भी चलाता है। 12वीं के टॉपर्स को उनकी स्नातक (Graduation) की पूरी अवधि के दौरान 2,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी। पिछले वर्ष इस योजना से कुल 151 छात्र लाभान्वित हुए थे, जिनमें 28 इंटर के टॉपर्स शामिल थे। बोर्ड का यह कदम मेधावी छात्रों के भविष्य को सुरक्षित और उज्जवल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
Rupee VS Dollar: रिकॉर्ड लो पर पहुंचा भारतीय रुपया, पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 का स्तर पार किया; आगे क्या होगा?
Rupee VS Dollar: मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा। 19 मार्च को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 0.65 फीसदी गिरकर 93.24 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो इससे पहले का 92.63 का रिकॉर्ड भी तोड़ गया। यूएस-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रुपया करीब 2 फीसदी तक कमजोर हो चुका।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमलों के बाद गुरुवार को तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि शुक्रवार को इसमें थोड़ी नरमी आई, लेकिन बाजार की चिंता अभी भी बरकरार है।
क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से रुपया गिरा
भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे देश की आर्थिक विकास दर और महंगाई दोनों पर दबाव पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर भी हालात आसान नहीं हैं। यूरोप के कई देश और जापान अब होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल हो रहे हैं। वहीं अमेरिका ने भी तेल सप्लाई बढ़ाने के संकेत दिए हैं, ताकि बाजार में स्थिरता लाई जा सके।
एफआईआई ने 8 अरब डॉलर निकाले
इस बीच विदेशी निवेशकों का भरोसा भी डगमगाता नजर आ रहा है। मार्च में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी कर ली है। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो माना जा रहा है। निवेशकों की यह बिकवाली रुपये पर और दबाव डाल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो महंगाई बढ़ सकती है। एक अनुमान के मुताबिक, हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से महंगाई दर में करीब 0.5 फीसदी का इजाफा हो सकता है। इससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति भी उभरते बाजारों के लिए चिंता बढ़ा रही है। ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के संकेत से डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की घरेलू आर्थिक मजबूती इस झटके को कुछ हद तक संभाल सकती है। फिर भी, आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
(प्रियंका कुमारी)
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