केंद्र सरकार के आदेश के अनुरूप जारी किए गए नए निर्देशों के बाद, बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में सुबह की सभाओं में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को शामिल किया जाएगा। कैबिनेट सचिवालय विभाग ने अतिरिक्त मुख्य सचिवों, संभागीय आयुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों सहित वरिष्ठ अधिकारियों को सभी संस्थानों में इस निर्देश का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विद्यालयों में सुबह की प्रार्थना सभाओं के दौरान सप्ताह में कम से कम एक बार 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य है।
राष्ट्रीय त्योहारों, सरकारी कार्यक्रमों और अन्य आधिकारिक अवसरों पर भी यह गीत गाना अनिवार्य होगा। अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य शैक्षणिक और सार्वजनिक संस्थानों में राष्ट्रगान के पालन को मानकीकृत करना है। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि राष्ट्रगान बजते समय सभी व्यक्तियों को सम्मानपूर्वक खड़ा होना चाहिए और चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनादर को गंभीरता से लिया जाएगा।
अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संस्थानों के प्रमुखों पर डाली गई है, जिन्हें निर्देश के पालन की निगरानी करने के लिए कहा गया है। हालांकि, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि फिल्म या समाचार प्रसारण के दौरान राष्ट्रगान बजते समय खड़े होने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह निर्देश सार्वजनिक संस्थानों में राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ी औपचारिक प्रथाओं को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
Continue reading on the app
हिंदू धर्म में नवरात्रि का त्योहार बहुत ही खास माना जाता है। चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना के लिए विशेष पर्व माना जाता है। हर घर में नौ दिनों तर मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की विधिवत रुप से पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। अक्सर होता है कि साधक व्रत रखते समय व पूजा के दौरान कई बार अनजाने में छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं, जिससे आपके पूजा का फल कम हो सकता है। मां दुर्गा को अर्पित करने वाली वस्तुओं को लेकर सावधानी बरतनी बेहद जरुरी है। आइए आपको बताते हैं नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की पूजा करते समय कौन-सी गलती न करें।
खंडित चावल न चढ़ाएं
पूजा में भूलकर भी खंडित यानी टूटा हुआ अक्षत (चावल) को बिल्कुल भी न चढ़ाएं। मां दुर्गा को कभी भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए। खंडित अक्षत चढ़ाना पूजा में दोष माना जाता है और इसे अधूरा समर्पण माना जाता है। चावल को साफ करके और साबुत अवस्था में ही हल्दी या कुमकुम लगाकर अर्पित करें। ऐसा करने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आपके जीवन में सकारात्मकता बनीं रहेगी।
माता को न चढ़ाएं दूर्वा
फूलों के बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी मानी जाती है, लेकिन हर फूल हर देवी-देवता को प्रिय नहीं होता है। जैसा कि मां दुर्गा को दूर्वा घास बिल्कुल भी पसंद नहीं होती है। दूर्वा को मुख्य रुप से भगवान गणेश को प्रिय है। माता को हमेशा लाल रंग के फूल प्रिय जैसे कि गुड़हल और गुलाब अर्पित करना शुभ होता है।
बासी जल और अपवित्र पात्र
नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा में जल की शुद्धता सबसे जरुरी है। इसलिए कभी भी पूजा में बासी जल या कलश का पानी इस्तेमाल न करें। इसके साथ ही, मां दुर्गा को कभी भी लोहे या प्लास्टिक के पात्रों में जल या भोग न करें। तांबे, पीतल, चांदी या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें। शुद्ध जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मकता बनीं रहेगी।
Continue reading on the app