Credit Score: क्या होता है क्रेडिट स्कोर, क्यों भारत में बेहद जरूरी है ये तीन अंकों वाली आपकी पहचान?
Credit Score Explained: अगर आप लोन लेने की सोच रहे हैं या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो एक चीज सबसे ज्यादा मायने रखती है, वो है आपका क्रेडिट स्कोर। 300 से 900 के बीच आने वाला यह तीन अंकों का नंबर छोटा जरूर लगता है, लेकिन बैंकों के लिए यही आपकी वित्तीय साख का सबसे बड़ा पैमाना होता है। स्कोर जितना अच्छा, उतनी आसानी से लोन, कम ब्याज दर और बेहतर ऑफर मिलते हैं। वहीं, कम स्कोर होने पर लोन मिलना मुश्किल हो सकता है या ब्याज ज्यादा देना पड़ सकता है।
भारत में सिबिल, एक्सपीरिन और इक्विफेक्स जैसे क्रेडिट ब्यूरो आपके पूरे क्रेडिट व्यवहार पर नजर रखते। इसमें यह देखा जाता है कि आप समय पर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल चुकाते हैं या नहीं, आपने कितना क्रेडिट इस्तेमाल किया, और आपका क्रेडिट मिक्स कैसा है और आप बार-बार लोन या कार्ड के लिए अप्लाई तो नहीं कर रहे। बार-बार आवेदन करना बैंकों को यह संकेत देता कि आप आर्थिक दबाव में हो सकते हैं।
क्या होता है क्रेडिट स्कोर?
अक्सर लोग सोचते हैं कि क्रेडिट स्कोर सिर्फ लोन लेने के समय काम आता है, लेकिन इसका असर रोजमर्रा की फाइनेंशियल लाइफ पर भी पड़ता है। अच्छा स्कोर हो तो होम लोन आसानी से मंजूर हो सकता है और ब्याज दर भी कम मिलती है। वहीं, क्रेडिट कार्ड की लिमिट और अप्रूवल भी काफी हद तक इसी पर निर्भर करता है। कई मामलों में कम स्कोर होने पर बैंक सीधे आवेदन खारिज भी कर सकते हैं, चाहे आपकी आय अच्छी ही क्यों न हो।
क्यों खराब होता है क्रेडिट स्कोर?
क्रेडिट स्कोर खराब होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है भुगतान में देरी। एक भी ईएमआई या क्रेडिट कार्ड बिल लेट होने पर स्कोर पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, केवल मिनिमम ड्यू भरना भी अच्छा संकेत नहीं माना जाता। इससे यह लगता है कि आप पूरी रकम चुकाने में सक्षम नहीं। बार-बार पूरा क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल करना, कम समय में कई लोन या कार्ड के लिए अप्लाई करना, या पुराने क्रेडिट अकाउंट अचानक बंद कर देना भी स्कोर को नुकसान पहुंचाता है। कई बार क्रेडिट रिपोर्ट में गलती भी हो सकती है, इसलिए समय-समय पर इसे चेक करना जरूरी।
कैसे क्रेडिट स्कोर सुधार सकते?
अच्छी बात यह है कि क्रेडिट स्कोर सुधारना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ी अनुशासन की जरूरत होती है। सबसे पहले हर भुगतान समय पर करें। कोशिश करें कि अपनी क्रेडिट लिमिट का पूरा इस्तेमाल न करें और उसे संतुलित रखें। अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो छोटा लोन लेकर समय पर चुकाना या सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, बिना जरूरत के बार-बार लोन या कार्ड के लिए अप्लाई करने से बचें और रिपोर्ट में कोई गलती दिखे तो उसे तुरंत ठीक कराएं।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि क्रेडिट स्कोर रातों-रात नहीं सुधरता। लेकिन अगर आप लगातार कुछ महीनों तक सही आदतें अपनाते हैं, तो इसमें सुधार दिखने लगता है। कुल मिलाकर, क्रेडिट स्कोर एक ऐसा फैक्टर है जो चुपचाप आपके फाइनेंशियल फैसलों को प्रभावित करता है। सही आदतों के साथ इसे बेहतर बनाकर आप भविष्य में लोन लेना और भी आसान बना सकते हैं।
(प्रियंका कुमारी)
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