कौन हैं कारगिल हीरो दीपचंद? जिन्हें देखकर प्रेमानंद महाराज ने किया सैल्यूट, युद्ध में गवाएं एक हाथ और दोनों पैर
Premanand Maharaj: वृंदावन में संतों की वाणी सुनने के लिए देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं. इन्हीं में हाल ही में कारगिल युद्ध के वीर योद्धा नायक दीपचंद भी प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे. यह मुलाकात बेहद खास और भावुक रही. दीपचंद को देखते ही प्रेमानंद महाराज का चेहरा खुशी से खिल उठा. उन्होंने तुरंत खड़े होकर उन्हें सैल्यूट किया और बार-बार नमस्कार किया. महाराज ने कहा कि उन्हें दोपचंद से मिलकर भीतर से गहरा आनंद मिल रहा है.
"आप एक संत हैं"- प्रेमानंद महाराज
मुलाकात के दौरान प्रेमानंद महाराज ने दीपचंद से कहा कि "आपको देखकर मुझे बहुत सुख मिल रहा है. आप वास्तव में एक संत हैं." उन्होंने सैनिकों के त्याग को याद करते हुए कहा कि जब आम लोग घरों में आराम से सोते हैं, तब सैनिक बर्फीली पहाड़ियों पर अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं.
दीपचंद ने बताई कारगिल युद्ध की सच्चाई
दीपचंद ने भी युद्ध के अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान हालात बेहद कठिन थे. उन्होंने कहा, "हमने दो महीने तक एक ही ड्रेस में काम किया. जूते तक फट गए थे. तापमान माइनस में था. लेकिन हमारे हौसले कभी नहीं टूटे." दीपचंद ने बताया कि उस समय सैनिकों के लिए सबसे जरूरी चीज गोला-बारूद था. उन्होंने साफ कहा था कि राशन कम मिले तो भी चलेगा, लेकिन हथियार और गोलियां पूरी मिलनी चाहिए.
10 हजार राउंड फायर का रिकॉर्ड
दीपचंद ने बताया कि उनकी बटालियन ने युद्ध के दौरान करीब 10 हजार राउंड फायर किए थे. यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम ने दुश्मनों के कई बंकर तबाह किए और कठिन मोर्चों पर कब्जा किया.
ब्लास्ट में गंवाए एक हाथ और दोनों पैर
युद्ध के बाद ऑपरेशन पराक्रम के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ. सामान समेटते समय ब्लास्ट हो गया. इस हादसे में दीपचंद गंभीर रूप से घायल हो गए. डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए दोनों पैर और एक हाथ काटना पड़ा. उनका बहुत खून बह गया था. उन्हें बचाने के लिए 17 बोतल खून चढ़ाया गया. आज भी वे कृत्रिम पैरों के सहारे खड़े होते हैं. लेकिन उनका हौसला पहले जैसा ही मजबूत है. वे आज भी एक सैनिक की तरह सैल्यूट करते हैं.
हर शहीद परिवार तक पहुंचते हैं दीपचंद
दीपचंद ने बताया कि वह आज भी हर शहीद सैनिक के परिवार के पास जाते हैं. वह अपने साथ एक दीपक लेकर जाते हैं और परिवार को भेंट करते हैं. यह उनके सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है. उन्होंने अपनी गाड़ी को इस तरह से मॉडिफाई किया है कि वह खुद उसे चला सकें. उनकी यह बात सुनकर प्रेमानंद महाराज भी हैरान रह गए.
कौन हैं दीपचंद?
दीपचंद वर्ष 1989 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे. उन्होंने कई अहम ऑपरेशन में हिस्सा लिया. कारगिल युद्ध में उन्होंने तोलोलिंग जैसे कठिन क्षेत्र में मोर्चा संभाला. उनकी बहादुरी की सराहना पूर्व सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने भी की थी.
12 गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित
दीपचंद की बटालियन को 12 गैलेंट्री अवॉर्ड मिले थे. यह उनके साहस और समर्पण का प्रमाण है. दीपचंद ने बताया कि युद्ध के दौरान उनकी यूनिट ने कई बार गन पोजिशन बदली और कंधों पर भारी हथियार उठाकर आगे बढ़ते रहे. प्रेमानंद महाराज और नायक दीपचंद की यह मुलाकात सिर्फ एक भेंट नहीं थी. यह त्याग, साहस और सम्मान की मिसाल थी. यह कहानी बताती है कि देश के सैनिक सिर्फ योद्धा नहीं होते, बल्कि सच्चे अर्थों में संत समान होते हैं.
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, एक्साइज में कमी से होगी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई : केंद्र
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र ने शुक्रवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा और एक्साइज ड्यूटी में कमी को ग्राहकों को पास नहीं किया जाएगा। बल्कि, इससे तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई की जाएगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा,इससे सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की अंडर रिकवरी को प्रत्यक्ष तौर पर कम करने में मदद मिलेगी, क्योंकि यह कंपनियां लागत से बेहद कम दाम पर खुदरा बाजारों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री कर रही हैं।
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा प्रतिदिन वहन किया जा रहा कुल नुकसान लगभग 2,400 करोड़ रुपए है।
मंत्रालय ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती से इन नुकसानों में से 10 रुपए प्रति लीटर की भरपाई हो जाती है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियां खुदरा कीमतों को अपरिवर्तित रखते हुए बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति जारी रख सकती हैं।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में तत्काल प्रभाव से 10 रुपए प्रति लीटर की कमी कर दी है।
मंत्रालय ने कहा, यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हुई तीव्र वृद्धि के जवाब में लिया गया है, जो पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण चार सप्ताह से भी कम समय में लगभग 75 प्रतिशत बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जो कि पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी।
वैश्विक ईंधन बाजारों के साथ इसकी तुलना करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान संकट की शुरुआत के बाद से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत, उत्तरी अमेरिका में 30 प्रतिशत और यूरोप में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत ने स्थिर रुख बनाए रखा है। इस स्थिरता की एक वित्तीय लागत है, और सरकार ने इसे वहन करने का विकल्प चुना है।
इससे पहले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है। इससे उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी।
इससे पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो कि पहले 13 रुपए प्रति लीटर थी। डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम होकर शून्य हो गई है, जो कि पहले 10 रुपए प्रति लीटर थी।
वित्त मंत्री ने पोस्ट में आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लागत में उतार-चढ़ाव से बचाया जाए।
इसके अलावा, डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है। इससे घरेलू खपत के लिए इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
--आईएएनएस
एबीएस/
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