बार-बार गैस बनना सिर्फ पाचन ही नहीं लिवर की परेशानी का हो सकता है कारण, न करें नजरअंदाज
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। आज के समय में पेट से जुड़ी परेशानी को आम माना जाता है, लेकिन बार-बार पेट से जुड़ी परेशानियां साधारण समस्या हों, यह जरूरी नहीं।
अगर खाना खाने के बाद बार-बार गैस, पेट फूलना या भारीपन महसूस होता है तो इसे नजरअंदाज करना पूरी सेहत पर भारी पड़ सकता है। आमतौर पर इन समस्याओं को पेट की समस्या से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह पेट और लिवर दोनों से जुड़ी हो सकती है और ऐसे में सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।
अगर लिवर सही तरह से काम न करे तो भोजन ठीक से पच नहीं पाता और गैस, अपच और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं बार-बार होने लगती हैं। इसलिए सिर्फ गैस की दवा लेने के बजाय लिवर और पाचन दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। पहले जानते हैं कि पाचन और लिवर कैसे एक-दूसरे से जुड़े हैं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि लिवर की सहायता से ही पाचन क्रिया सही तरीके से हो पाती है। लिवर खाना पचाने के लिए रोजाना एक तय मात्रा में पित्त बनाता है, जो वसा को तोड़ने और खाने को पचाने में मदद करता है। ऐसे में अगर लिवर कम या अत्याधिक पित्त बनाता है तो इसका सीधा असर पाचन पर पड़ता है। अगर लिवर की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है तो पेट से जुड़े रोग परेशान करने लगते हैं, जैसे बार-बार गैस बनना, ब्लोटिंग होना, हल्का पेट दर्द होना, खाना कम पचना, और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं। पेट के साथ-साथ लिवर को भी स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है।
देर रात खाना, जंक फूड का सेवन, और अत्यधिक तला-भुना खाना जैसी आदतें लिवर को कमजोर करती हैं और पाचन भी प्रभावित होता है। ऐसे में लिवर का ध्यान रखना जरूरी है और लिवर को डिटॉक्स जरूर करें। आयुर्वेद में लिवर को डिटॉक्स करने के कई तरीके बताए गए हैं। इसके लिए सुबह खाली पेट गिलोय का रस पिएं। यह रस रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है और लिवर की कार्यप्रणाली को भी दुरुस्त करता है।
इसके साथ ही आहार में ढेर सारा फाइबर लें। लिवर के लिए फाइबर बहुत फायदेमंद होता है। लिवर को स्वस्थ रखने के लिए चीनी का इस्तेमाल कम करें। रिफाइंड चीनी लिवर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
--आईएएनएस
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UNCOVERED With Manoj Gairola: कैसे ईरान के सामने उखड़ रहे हैं अमेरिका के पैर? वर्क फ्रॉम होम की तरह युद्ध लड़ रहे सैनिक
UNCOVERED With Manoj Gairola: ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच युद्ध जारी है. आज युद्ध का 28वां दिन है. ईरान भी इस्राइल और अमेरिका के ठिकानों को निशाना बना रहा है. युद्ध की आग अब खाड़ी के अधिकांश देशों तक भी पहुंच गई है. इसी युद्ध पर न्यूज नेशन आपके लिए लाया है खास शो- UNCOVERED With Manoj Gairola.
UNCOVERED With Manoj Gairola के नए एपिसोड में न्यूज नेशन के एडिटर-इन-चीफ, मनोज गैरोला ने बताया कि मध्य पूर्व की इस जंग में ईरान ने वो कर दिखाया, जो आज से पहले कभी नहीं हुआ था. तेल और गैस से भरपूर इस इलाके को कंट्रोल करने के लिए या फिर Power Projection के लिए अमेरिका ने जो फौजी अड्डे बनाए थे उन्हें ईरान ने बर्बाद कर दिया है.
ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर इतनी भीषण बमबारी की कि अमेरिकी सेना को वहां से भागना पड़ गया. उन्हें होटल्स और कमर्शियल ऑफिसेज में शिफ्ट कर दिया गया. अमेरिकी सेना अब वहां से रिमोट वर्किंग कर रही है. रिमोट वर्क कुछ वैसा ही जैसा हम में से कुछ लोग वर्क फ्रॉम होम करते हैं.
13 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरान का हमला
एडिटर-इन-चीफ ने आगे बताया कि अमेरिका के सबसे बड़े अखबार New York Times ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला किया तो ईरान ने पलटवार करते हुए क्षेत्र के सभी 13 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन्स और मिसाइल्स की बौछार कर दी थी, जिससे अमेरिका के अधिकांश अड्डे नष्ट हो गए और वहां मौजूद सेना को शिफ्ट करना पड़ गया. सैनिकों की संख्या हजारों में है. अमेरिका की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसे अपने काफी सैनिकों और मिलिट्री साजो-सामान को यूरोप के देशों में भेजना पड़ गया.
फ्रंटलाइन पर कम ही बचे अमेरिकी सैनिक
इस रिपोर्ट से पता चलता है कि युद्ध शुरू होने से पहले मध्य पूर्व में जहां अमेरिका के जो 40 हजार फौजी तैनात थे, अब बहुत कम ही फ्रंटलाइन पर मौजूद है. होटल्स और ऑफिस से काम कर रहे हैं वो भी Safe नहीं है. ईरान की सेना ने इन इलाकों में आम लोगों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया कि ये उनकी Islamic Duty है कि अमेरिकी सैनिकों के छिपने की सारी जानकारी टेलीग्राम ऐप के जरिए उन्हें भेजी जाए. ईरानी सेना ने साफ कहा है कि सैनिकों को रिहायशी इलाकों में ना छिपाया जाए और वे इनसे दूर रहें.
ईरानी सेना ने लगाए ये आरोप
एडिटर-इन-चीफ गैरोला ने बताया कि अमेरिका की सेना पर ईरान ने आरोप लगाया कि वह नागरिकों को ह्यूमन शील्ड की तरह इस्तेमाल कर रही है. ऐसा आरोप अमेरिकी फौज वियतनाम और अफगानिस्तान युद्ध में अपने विरोधियों पर लगाती आई है. लेकिन पहली बार अमेरिकी सेना पर ऐसे आरोप लगे हैं.
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ईरान की ताकत का सही से आंकलन नहीं कर पाई अमेरिकी सेना
युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरानी प्रॉक्सी मिलिशिया ग्रुप ने इराक के इरबिल शहर में एक फाइव स्टार होटल पर ड्रोन से हमला कर दिया था. क्योंकि वहां अमेरिकी फौजियों के छिपे होने का शक था. जाहिर सी बात है कि अमेरिकी सेना इस बार ईरान की ताकत का ढंग से आकलन नहीं कर पाई.
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