ईरान-इजरायल जंग के बीच 'ड्रैगन' ने बदला अपना 'मुखौटा'..., अमेरिका का फायदा या होगा नुकसान?
Iran Israel War Latest Update: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं. अमेरिकी सूत्रों के अनुसार ईरान को लेकर चीन के रुख में कुछ बदलाव के संकेत मिले हैं. बीजिंग तनाव कम करने के लिए समर्थन का संकेत दे रहा है ताकि अमेरिका के साथ हाईलेवल बातचीत का रास्ता साफ हो सके.
बता दें ये खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अगले कुछ महीनों में चीन दौरे की योजना बना रहे हैं. बताया जा रहा है कि पहले यह दौरा अप्रैल में होने की संभावना थी लेकिन हालिया क्षेत्रीय तनाव के चलते अब इसके मई में होने की चर्चा है.
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संभावित दौरे पर भारत समेत एशिया के कई देशों की नजर
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच ट्रंप का चीन जाने की तैयारी करना असामान्य जरूर लगता है लेकिन इससे यह भी संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश अब भी जारी है. इस संभावित दौरे को एशिया के कई देश भी करीब से देख रहे हैं क्योंकि इससे क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक माहौल पर असर पड़ सकता है.
डेट और एजेंडा फाइनल, जल्द होगी आधिकारिक घोषणा
सूत्रों के मुताबिक चीन ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति की मेजबानी के लिए तैयार होने का संकेत दिया है. हालांकि दोनों में से किसी देश ने भी इस दौरे की डेट और एजेंडा को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
अमेरिका और चीन की बातचीत से क्या जंग होगी बंद?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान-इजरायल जंग के वर्तमान हालात देखकर चीन के रुख में हल्का बदलाव दिख रहा है. अब चीन का अमेरिका से बातचीत कर तनाव कम करने पर जोर है.
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चीन द्वारा ईरानी तेल की खरीद पर होगी बात
अनुमान जताया जा रहा है कि अमेरिका और चीन की इस हाई लेवल मीटिंग में ईरान से जुड़े मुद्दे पर चर्चा होगी और जंग खत्म करने को लेकर कोई कूटनीतिक कदम जरूर उठाया जाएगा. इस बैठक में चीन द्वारा ईरानी तेल की खरीद, चीन और ईरान के बीच संभावित सैन्य सहयोग को लेकर भी बातचीत हो सकती है.
FAQ
Q1. चीन के रुख में बदलाव की बात क्यों हो रही है?
उत्तर- कुछ अमेरिकी पूर्व अधिकारियों का कहना है कि चीन अब ईरान विवाद को लेकर तनाव कम करने और बातचीत को बढ़ावा देने की दिशा में संकेत दे रहा है.
Q2. क्या ट्रंप का चीन दौरा तय हो गया है?
उत्तर- अभी आधिकारिक तौर पर तारीख तय नहीं हुई है. पहले यह दौरा अप्रैल में होने की चर्चा थी, लेकिन अब मई में होने की संभावना बताई जा रही है.
Q3. होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर- Strait of Hormuz से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस निर्यात होता है. इसलिए यहां किसी भी तनाव का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है.
Q4. अमेरिका और चीन की बातचीत में ईरान का मुद्दा क्यों अहम है?
उत्तर- चीन ईरान का बड़ा ऊर्जा साझेदार है और उसकी तेल खरीद को लेकर अमेरिका लंबे समय से चिंता जताता रहा है.
नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बने जेन-जी लीडर बालेन शाह, राष्ट्रपति कार्यालय में ली शपथ
काठमांडू, 27 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह को नेपाल का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। वे नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बने हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें इस पद पर नियुक्त किया।
राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में कहा कि नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने शुक्रवार को काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के पूर्व मेयर शाह बालेन शाह को संविधान के आर्टिकल 76(1) के तहत इस पद पर नियुक्त किया।
गुरुवार को आरएसपी ने शाह को अपनी पार्लियामेंट्री पार्टी का लीडर चुना, जिससे उनके देश के 47वें प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। बता दें, आरएसपी ने हाल के पार्लियामेंट्री चुनावों में लगभग दो-तिहाई बहुमत से बड़ी जीत हासिल की थी।
बालेन शाह ने शुक्रवार दोपहर 12:34 बजे राष्ट्रपति कार्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पद और गोपनीयता की यह शपथ हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर सात शंखनादकों ने शंख ध्वनि के साथ मांगलिक शुरुआत की। परंपरा के अनुसार, शुभ कार्यों के आरंभ में शंखनाद को सफलता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
शाह ने पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया, उन्हें 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को 18,734 वोट मिले। यह 1991 के बाद से नेपाल के संसदीय चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को मिले सबसे ज्यादा वोट हैं।
शाह ने 2022 में राजनीति में कदम रखा, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव लड़ा और एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते।
27 अप्रैल, 1990 को काठमांडू में एक मधेसी परिवार में जन्मे शाह ने भारत में विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री करने से पहले काठमांडू में अपनी बैचलर डिग्री पूरी की।
इंजीनियरिंग में उनके एकेडमिक बैकग्राउंड ने उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और पब्लिक वर्क्स की प्रैक्टिकल समझ दी। इसी तकनीकी विशेषज्ञता ने काठमांडू महानगरपालिका के महापौर (मेयर) के रूप में उनकी कार्यशैली और गवर्नेंस को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
--आईएएनएस
केके/एएस
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