शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर के दर्शन के दौरान एक पांच वर्षीय बच्ची ने उन्हें खिलौना बुलडोजर भेंट किया। इस भावपूर्ण घटना ने सोशल मीडिया पर तुरंत सुर्खियां बटोरीं। अपने परिवार के साथ आई कानपुर की यशस्विनी ने मंदिर परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच मुख्यमंत्री से संपर्क किया और उन्हें छोटा बुलडोजर सौंप दिया। मुख्यमंत्री ने बच्ची को बुलडोजर लौटाते हुए उसे अच्छे से पढ़ाई करने और बुलडोजर से खेलने के लिए कहा।
बुलडोजर आदित्यनाथ की शासन शैली का प्रतीक बन गया है, जिसके तहत अपराधों के आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों को ध्वस्त किया गया है। विपक्ष इस प्रथा की अक्सर बुलडोजर राज कहकर आलोचना करता रहा है। दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ ने कमजोर तबके पर दबंगई दिखाने वालों को चेताया कि राज्य में गुंडागर्दी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पुलिस को ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। कमजोर तबके के लोगों को कुछ दबंगों द्वारा डराने-धमकाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ऐसे तत्वों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि कोई अभियुक्त जमानत पर छूटने के बाद वादी को धमका रहा हो, तो उसकी जमानत निरस्त कराने की कार्रवाई की जाए।
महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने सभी प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए त्वरित और संतोषजनक निस्तारण के निर्देश दिए और कहा कि हर व्यक्ति की समस्या का समाधान सरकार का संकल्प है। योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिना भेदभाव सभी को न्याय मिले, हर पात्र व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित हो और जमीन कब्जाने वाले भू-माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
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महाराष्ट्र पुलिस ने विधानसभा सत्र के दौरान फर्जी प्रवेश पास बनाने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब एक शिकायत में अनधिकृत पासों के वितरण का जिक्र किया गया। सत्र के दौरान राज्य मंत्री उदय सामंत ने भी इस मुद्दे को उठाया था। शिकायत के आधार पर, मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ने जांच की और इस रैकेट से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ मंत्रालय से जुड़े कर्मचारी हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान केशव गुंजल (53), गणपत भाऊ जावले (50), नागेश शिवाजी पाटिल (42), मनोज आनंद मोरबाले (40) और स्वप्निल रमेश तायडे (40) के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, माना जा रहा है कि और भी संदिग्ध इसमें शामिल हैं और उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
सुरक्षा में हुई चूक की जांच के दायरे में आने से जांच का दायरा बढ़ा
इस मामले ने एक महत्वपूर्ण विधायी सत्र के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि फर्जी पास कैसे बनाए गए, इस प्रक्रिया को किसने अधिकृत किया और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति के समर्थन से यह जालसाजी संभव हुई।
एमएलसी के खिलाफ फर्जी खबर फैलाने वाले युवक को पांच दिन की जेल की सजा दी जाए
बुधवार (25 मार्च) को महाराष्ट्र विधान परिषद ने एक प्रस्ताव को लागू करने का आदेश दिया, जिसमें एनसीपी विधायक अमोल मितकारी के खिलाफ यूट्यूब चैनल पर फर्जी खबर प्रकाशित करने के आरोप में अकोला के एक युवक को पांच दिन की जेल की सजा देने की सिफारिश की गई थी। युवक अंकुश गावंडे को फर्जी खबर के संबंध में माफी मांगने के लिए बुधवार को सदन में उपस्थित रहने को कहा गया था। गावंडे के साथ पत्रकार गणेश सोनावाने, हर्षदा सोनावाने और अमोल नंदुरकर ने भी 'सत्या लाधा' यूट्यूब चैनल पर मितकारी के खिलाफ फर्जी खबर प्रकाशित की थी। तीनों पत्रकारों ने सदन में माफी मांगी और उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। "हालांकि, सदन के आदेश के बावजूद गावंडे उपस्थित नहीं हुए। इसलिए उनके खिलाफ सजा लागू की जानी चाहिए।
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