अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने पर दिया जोर, रिश्ते को 'जटिल' बताया
वॉशिंगटन, 27 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के वरिष्ठ विधायकों और अधिकारियों ने पाकिस्तान के साथ अधिक गहरे और परिणाम-उन्मुख संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है और इस रिश्ते को “जटिल” बताया है।
कैपिटल हिल पर बुधवार को टाम सुओजी और जैक बर्गमैन द्वारा आयोजित एक द्विदलीय संगोष्ठी में 200 से अधिक नीति-निर्माताओं, राजनयिकों और विशेषज्ञों ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की दिशा का आकलन किया।
सुओज़ी ने कहा, “ऐसे समय में जब हमारा देश और दुनिया बढ़ती विभाजन की भावना महसूस कर रहे हैं, पाकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना पहले से कहीं अधिक जरूरी है।” संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध जटिल रहे हैं।
बर्गमैन ने विभाजनों के पार संवाद और सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसी एकता संयोग से नहीं होती। यह बातचीत से शुरू होती है। यह इस साझा विश्वास से शुरू होती है कि जब लोग साथ आते हैं, खुले तौर पर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं और सम्मानपूर्वक जुड़ते हैं, तो प्रगति संभव है।” उन्होंने जोड़ा कि स्थायी प्रगति के लिए असहमतियों को “सम्मान के साथ” संभालना आवश्यक है।
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिजवान सईद शेख ने इस रिश्ते को दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का यह संबंध निश्चित रूप से सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली संबंधों में से एक है, जो लगभग आठ दशकों में कई सफल साझेदारियों के रूप में सामने आया है। हर बार जब हम साथ आए हैं, इसका प्रभाव द्विपक्षीय दायरे से परे रहा है और पूरी दुनिया को लाभ हुआ है।”
अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव एस पॉल कपूर ने कहा कि वाशिंगटन ठोस परिणाम चाहता है। “हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अमेरिका-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों में सद्भावना और उच्च-स्तरीय ध्यान अमेरिकी और पाकिस्तानी लोगों के लिए ठोस लाभ में बदलें।”
इस संगोष्ठी में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर पैनल चर्चाएं हुईं। विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय स्थिरता, जिसमें भारत व चीन के साथ पाकिस्तान के संबंध भी शामिल हैं और व्यापार व निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।
माइकल कगलमैन (अटलांटिक काउंसिल) ने कहा कि यह साझेदारी “अच्छी स्थिति में है,” लेकिन इसे समय के साथ अधिक टिकाऊ बनाने की जरूरत है। पूर्व राजदूत तौकीर हुसैन ने चेतावनी दी कि अमेरिकी नीति केवल दिखावे से आगे बढ़नी चाहिए। “अगर अमेरिका अच्छे साझेदार चाहता है, तो उसे अच्छी नीतियां बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अच्छी नीति का मापदंड केवल यह नहीं होना चाहिए कि वह वाशिंगटन में अच्छी दिखती है।
सुरक्षा चिंताएं भी प्रमुख मुद्दा रहीं। लीसा कर्टिस ने चेतावनी दी कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अब भी “एक खतरनाक और घातक संगठन” है और पाकिस्तान की स्थिरता सुनिश्चित करने में अमेरिका की रुचि पर जोर दिया। हसन अब्बास ने आतंकवाद, संगठित अपराध और सीमा-पार खतरों से निपटने के लिए नागरिक कानून-प्रवर्तन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
आर्थिक मोर्चे पर सोफयां युसूफी ने पाकिस्तान में डिजिटलीकरण और व्यापक आर्थिक सुधारों की ओर बढ़ते प्रयासों का उल्लेख किया लेकिन निर्यात और विदेशी मुद्रा बढ़ाने के लिए स्पष्ट औद्योगिक नीति की जरूरत बताई। एसपेरेंजा (यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स) ने कहा कि नए सिरे से जुड़ाव ने निजी क्षेत्र के निवेश के अवसर खोले हैं और द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों को सुलझाने का आह्वान किया।
अंत में सुओज़ी ने कहा, “यह सम्मेलन अतीत से सीखने, वर्तमान को समझने और हमारे दोनों देशों के बीच अधिक समझदारी व सहयोगपूर्ण भविष्य का मार्ग तैयार करने के बारे में है।”
--आईएएनएस
पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
संघर्ष के बीच ईरान का अल्टीमेटम, खाड़ी देशों के होटलों को अमेरिकी सैनिकों को ठहराने पर दी चेतावनी
तेहरान, 27 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों को एक अल्टीमेटम जारी किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर वे अमेरिकी सैन्य कर्मियों को ठहराते हैं, तो उनकी संपत्तियां वैध सैन्य लक्ष्य बन सकती हैं।
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों और सहयोगी उग्रवादी समूहों के साथ संयुक्त अभियानों के बाद अमेरिकी सेना ने क्षेत्रीय होटलों में शरण ली है। इन हमलों में पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था।
वहीं, समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यह चेतावनी उन सभी ठिकानों पर लागू होती है जो विदेशी सैन्य कर्मियों को पनाह देते हैं, और अगर ऐसी गतिविधियां जारी रहती हैं तो यह चेतावनी तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों ने पूरे क्षेत्र में नागरिक स्थलों पर अपनी मौजूदगी बना ली है। इनमें बेरूत के पुराने एयरपोर्ट के पास एक लॉजिस्टिक्स बेस, और दमिश्क के रिपब्लिक पैलेस, फोर सीजन्स और शेरेटन होटलों में चलाई जा रहीं सलाहकार गतिविधियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते अमेरिकी मरीन सैनिकों को इस्तांबुल और सोफिया के रास्ते जिबूती अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भेजा गया है।
इससे पहले, गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने खाड़ी अरब देशों के होटलों को अमेरिकी सैन्य कर्मियों को स्वीकार न करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने इन सैनिकों पर अपने ठिकानों से भागने और नागरिक स्थलों को अपनी ढाल (कवर) के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, इस युद्ध की शुरुआत से ही, अमेरिकी सैनिक जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) के सैन्य ठिकानों से भागकर होटलों और दफ्तरों में छिप गए हैं। वे जीसीसी के नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने इस स्थिति की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका के होटलों से की, जहां उनके दावे के अनुसार, ऐसे अधिकारियों को बुकिंग देने से मना कर दिया जाता है जिनसे ग्राहकों को खतरा हो सकता है। और उन्होंने खाड़ी के होटलों से भी इसी तरह की नीति अपनाने का आग्रह किया।
गौरतलब है कि ईरान और इजरायल व अमेरिका के बीच 28 फरवरी से संघर्ष जारी है। इजरायल और अमेरिका एक साथ ईरान पर धावा बोल रहे हैं। इन हमलों में अब तक ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और हजारों आम नागरिक मारे गए हैं। हालांकि, ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की जा रही है।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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