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HDFC Bank के पूर्व चेयरमैन के एक पत्र से हिला बाजार, Investors की चिंता के बीच SEBI Probe शुरू

देश के प्रमुख प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफा पत्र ने नियामक संस्थाओं का ध्यान खींचा।

गौरतलब है कि सेबी ने इस पत्र की प्रारंभिक समीक्षा शुरू कर दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, सेबी यह जांच कर रहा है कि क्या सूचीबद्ध कंपनियों के निदेशकों से जुड़े नियमों का पालन सही तरीके से हुआ या नहीं।

बता दें कि अपने इस्तीफा पत्र में चक्रवर्ती ने बैंक के अंदर कुछ ऐसी कार्यप्रणालियों और घटनाओं का जिक्र किया था, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। हालांकि उन्होंने इन बातों को विस्तार से नहीं बताया, लेकिन उनके इस बयान का बाजार पर सीधा असर पड़ा।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार, इस खबर के बाद बैंक के शेयर में गिरावट आई और कुछ ही दिनों में कंपनी के बाजार मूल्य में भारी कमी दर्ज की गई। इससे निवेशकों में भी चिंता का माहौल बना हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, सेबी का एक विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या बोर्ड के अन्य निदेशकों को किसी महत्वपूर्ण जानकारी की जानकारी थी और क्या उसे सही तरीके से दर्ज किया गया था या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी घटना की गलत रिपोर्टिंग तो नहीं हुई, जिससे छोटे निवेशकों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में बैंक के मुख्य नियामक रिजर्व बैंक ने पहले ही कहा है कि उसे रिकॉर्ड में कोई गंभीर गवर्नेंस से जुड़ी चिंता नहीं मिली है।

वहीं, सेबी के प्रमुख तुहिन कांता पांडे ने बिना किसी विशेष मामले का जिक्र किए कहा कि स्वतंत्र निदेशकों को अपने बयान और टिप्पणियों के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए और बिना ठोस सबूत के कोई संकेत नहीं देना चाहिए।

बता दें कि एचडीएफसी बैंक ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बाहरी विधि एक्सपर्ट को नियुक्त किया है, जो इस्तीफा पत्र में उठाए गए मुद्दों की स्वतंत्र जांच करेंगे। हालांकि, चक्रवर्ती का कहना है कि अभी तक उनसे इस संबंध में किसी ने संपर्क नहीं किया है।

कुल मिलाकर, यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता से जुड़ा एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है, जहां नियामक संस्थाएं और कंपनी दोनों ही अपनी-अपनी स्तर पर जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही हैं।

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रेलवे संपत्ति से जुड़े अपराधों के मामले में 5 वर्षों में 52,000 से अधिक लोग गिरफ्तार

नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। पिछले पांच वर्षों (2021–2025) के दौरान, भारतीय रेलवे की संपत्ति पर अवैध कब्जे से संबंधित रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत कुल 52,494 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

संसद में पेश की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इनमें से 50,432 अपराधियों के खिलाफ संबंधित अदालतों में शिकायतें दर्ज की गईं।

रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा का दायित्व रेलवे सुरक्षा बल को सौंपा गया है। रेलवे सुरक्षा बल को रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत रेलवे की संपत्ति के विरुद्ध चोरी, बेईमानी से गबन, मिलीभगत और षड्यंत्र के मामले दर्ज करने का अधिकार प्राप्त है।

अपराधी के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद जांच की जाती है। इसके बाद स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज की जाती है। कुछ राज्यों में, जहां स्पेशल रेलवे अदालतें नहीं हैं, वहां जिला अदालतों में शिकायत दर्ज की जाती है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों (2021-25) के दौरान पत्थरबाजी की कुल 12,157 घटनाएं भी दर्ज की गईं, जिनमें रेलवे सुरक्षा बल और सरकारी रेलवे पुलिस ने 8,441 लोगों को गिरफ्तार किया।

इस अवधि के दौरान भारतीय रेलवे पर शरारती तत्वों की गतिविधियों के कारण पटरी से उतरने की केवल तीन घटनाएं हुईं, एक-एक घटना ईस्ट कोस्ट रेलवे के वाल्टेयर डिवीजन में, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के झांसी डिवीजन में और सदर्न रेलवे के चेन्नई डिवीजन में दर्ज की गई।

रेलवे पटरियों के साथ आपराधिक छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए, नियमित रूप से राज्य-स्तरीय सुरक्षा समिति की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन समितियों का गठन प्रत्येक राज्य और जम्मू-कश्मीर में संबंधित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की अध्यक्षता में किया गया है, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल, सरकारी रेलवे पुलिस और खुफिया इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

अपराध को नियंत्रित करने, मामले दर्ज करने, जांच करने और ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल सभी स्तरों पर राज्य पुलिस अधिकारियों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए हुए है। इसमें तोड़फोड़ की घटनाओं और खुफिया जानकारी साझा करने पर विशेष ध्यान है।

वहीं, चिह्नित ब्लैक स्पॉट (संवेदनशील स्थानों) और जोखिम वाले खंडों में रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल, सरकारी रेलवे पुलिस और सिविल पुलिस द्वारा लगातार गश्त की जा रही है। रेलवे पटरियों के पास पड़े ढीले और बिखरे हुए सामान को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाए जाते हैं, जिनका उपयोग शरारती तत्व परिचालन बाधित करने के लिए कर सकते हैं।

--आईएएनएस

एबीएम/डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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