E20 पेट्रोल पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, कार की टंकी खोलकर बोले – ‘दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली’
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। करीब 53 सेकेंड के वीडियो में राहुल गांधी कार की पेट्रोल टंकी खोलकर E20 लिखे ढक्कन को दिखाते हैं और दावा करते हैं कि इस ईंधन से लोगों की कार और स्कूटर खराब हो रहे हैं।
दरअसल राहुल गांधी ने वीडियो में कहा कि आमतौर पर लोग कहते हैं कि ‘दाल में काला है’, लेकिन इस मामले में ‘पूरी दाल ही काली है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि देश में भ्रष्टाचार की कई लाइनें लगी हुई हैं और E20 ईंधन भी उनमें से एक है। राहुल गांधी का कहना है कि इससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ रहा है क्योंकि वाहन खराब होने और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
E20 – दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है। pic.twitter.com/Unw7UfNt9k
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 7, 2026
क्या है पूरा मामला?
हालांकि राहुल गांधी के इस बयान के पहले केंद्र सरकार की ओर से भी इस मामले पर जानकारी दी गई थी। दरअसल केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का बायोफ्यूल ब्लेंडिंग कार्यक्रम सफल रहा है और E20 को लेकर कुछ लोग बेवजह विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में मिलाया जा रहा एथेनॉल पूरी तरह घरेलू स्रोतों से प्राप्त किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का भी खंडन किया था, जिनमें अमेरिका से बड़े पैमाने पर एथेनॉल आयात किए जाने का दावा किया गया था। दूसरी ओर, E20 को लेकर कुछ वाहन मालिकों की चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। खासकर 2023 से पहले बनी कई पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों का कहना है कि इस मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज कम होने, इंजन के कुछ पार्ट्स जल्दी घिसने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी दिक्कतें महसूस हो रही हैं।
E20 ईंधन क्यों ला रही सरकार?
दरअसल सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण कम करने जैसे लक्ष्य पूरे करने की कोशिश की जा रही है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने भी E20 ईंधन के विरोध में देशभर में टाउन हॉल अभियान चलाने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि वह अलग-अलग राज्यों में वाहन मालिकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और अनुभवों को सामने लाएगी। दुनिया में ब्राजील एथेनॉल के इस्तेमाल का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, जहां कई वर्षों में चरणबद्ध तरीके से वाहन और ईंधन व्यवस्था विकसित की गई।
“यहां सब ठीक है, चलो भागो”.. उमरिया में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान में छात्रों को शिकायत रखने से रोका, पंचायत सचिव पर लगे आरोप
मध्यप्रदेश में शुक्रवार, 07 अगस्त 2026 से ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ का शुरुआत हुई है। इस अभियान के तहत उमरिया जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरही स्थित पीएम जनमन मल्टीपरपज भवन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के कलेक्टर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, क्षेत्रीय विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने जनता से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना। लेकिन इस कार्यक्रम में बीच छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा।
बता दें कि मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में संदीपनी स्कूल के कुछ छात्र-छात्राएं अपने गांव की बदहाल सड़क और यात्री प्रतीक्षालय की समस्या को लेकर अधिकारियों सामने पहुंचे थे। छात्रों का केवल एक ही उद्देश्य था कि अपनी समस्याओं से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई हो सके। लेकिन इन छात्र-छात्राओं को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। आरोप है कि इन छात्र-छात्राओं को अपनी बात रखने से सचिव ने रोका।
छात्रों को अपनी शिकायत से रोका, सचिव पर आरोप
बता दें कि ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद बरही ग्राम पंचायत की सचिव ने छात्रों को अपनी शिकायत रखने से पहले ही रोक दिया। जानकारी के मुताबिक, सचिव ने कथित तौर पर छात्रों से कहा कि “यहां सब कुछ ठीक है, चलो भागो।” इसके बाद छात्रों को कथित रूप से धमकाते हुए कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया गया।
एक छात्रा ने वीडियो में बताया कि हम सब स्कूल के बच्चे अपनी गांव की खराब सड़क और प्रतिक्षालय की शिकायत लेकर कार्यक्रम में जा रहे थे। लेकिन सचिव मैम ने बोल दिया कि सब कुछ ठीक है, चलो जाओ यहां से.. यहां तुम लोग क्या करने आए हो? छात्रा ने बताया कि यहां जितनी भी सरकारी संस्थाएं हैं सभी जगह कमियां नजर आएंगी।
घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी
इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जब शासन स्वयं जनता की समस्याएं सुनने के लिए जन विश्वास अभियान चला रहा है, तब शिकायत लेकर पहुंचे छात्रों को इस तरह रोकना और उन्हें अपमानित करना अभियान की भावना के विपरीत है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत की सचिव अथवा जिला प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या है ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’?
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 7 अगस्त 2026 को ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ की शुरुआत की गई है। यह अभियान 7 अगस्त 2026 से 8 जनवरी 2027 तक चलेगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर आम लोगों की लंबे समय से लंबित शिकायतों व समस्याओं का त्वरित और जमीनी स्तर पर समाधान करना है।
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