ओडिशा सरकार ने पीएनजी विस्तार को बढ़ावा देने के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान की
भुवनेश्वर, 25 मार्च (आईएएनएस)। शहरी ओडिशा में स्वच्छ ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को तेज करने के उद्देश्य से, राज्य के आवास और शहरी विकास विभाग ने सिटी गैस वितरण परियोजनाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रियाओं को आसान और तेज बनाने के लिए एक विस्तृत आदेश जारी किया है।
बुधवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस बयान के अनुसार, यह आदेश आवास और शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव और आईडीसीओ की अध्यक्ष उषा पाधी ने जारी किया। यह आदेश राज्य सरकार की गैस-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ, कुशल ईंधन तक पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
आदेश के अनुसार, शहरी स्थानीय निकायों को भूमिगत पाइपलाइन बिछाने और संबंधित सिटी गैस वितरण (सीजीडी) बुनियादी ढांचे के लिए अनुमति शुल्क माफ करने का निर्देश दिया गया है।
चल रहे या पहले से स्वीकृत कार्यों के लिए किसी नई अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रक्रियात्मक देरी दूर होगी और परियोजना के निष्पादन में निरंतरता सुनिश्चित होगी।
प्रगति को और तेज़ करने के लिए, राज्य सरकार ने समय-सीमा के भीतर अनुमोदन पर जोर दिया है, और सभी संबंधित अधिकारियों को आवेदनों का तुरंत निपटारा करने का निर्देश दिया है।
सीजीडी परियोजनाओं के लिए कुछ अवधियों के दौरान सड़क-कटाई पर लगे प्रतिबंधों में भी ढील दी गई है, ताकि कोई बाधा न आए और काम सुचारू रूप से चलता रहे।
काम को आसान बनाने के साथ-साथ, यह आदेश जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। सीजीडी संस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुसार, अपने स्वयं के खर्च पर सड़कों और बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए जिम्मेदार होंगी।
नगरपालिका प्रशासन के निदेशक को पूरे राज्य में सीजीडी-संबंधित कार्यों के समन्वय और निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
सभी विभागों, जिनमें कार्य, जल संसाधन, ऊर्जा, और पंचायती राज और पेयजल विभाग शामिल हैं, को जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण सहयोग देने की सलाह दी गई है।
ये उपाय 30 जून, 2026 तक, या अगले आदेश तक लागू रहेंगे।
इस पहल से पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार में काफी तेजी आने, स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलने और शहरी बुनियादी ढांचे के मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे ओडिशा को एक टिकाऊ, ऊर्जा-कुशल भविष्य की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बलूच महिलाओं की जबरन गुमशुदगी पर मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता, पाकिस्तान से जवाबदेही की मांग
क्वेटा, 25 मार्च (आईएएनएस)। बलूच महिलाओं के लगातार जबरन गायब किए जाने पर एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी सेना की हरकतों पर गहरी चिंंता व्यक्त की।
बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ बढ़ती ज्यादतियों के बीच, बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बताया कि 23 वर्षीय छात्रा महजबीन बलूच का पिछले साल 29 मई को पाकिस्तानी बलों ने अपहरण कर लिया था।
संगठन ने कहा कि उनके भाई यूनुस बलूच के लापता होने के तुरंत बाद महजबीन का गायब होना इस बात की ओर इशारा करता है कि परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया जा रहा है और पूरे क्षेत्र में सामूहिक सजा जैसी प्रथाएं अपनाई जा रही हैं।
मानवाधिकार संगठन के अनुसार, यूनुस को गंभीर यातनाओं के बाद रिहा कर दिया गया, लेकिन महजबीन का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
पांक ने कहा, “जबरन गायब करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है, जो व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण से वंचित करता है और उनके परिवारों को लगातार पीड़ा में रखता है।”
संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से महजबीन को तुरंत और बिना शर्त रिहा करने तथा उनकी स्थिति और ठिकाने की जानकारी बिना किसी देरी के सार्वजनिक करने की मांग की।
प्रांत में बढ़ती हिंसा के बीच, पांक ने मस्तुंग जिले के निवासी मुहम्मद आमिर की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या की कड़ी निंदा की।
संगठन ने इस घटना को बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की गई हिंसा का एक और चिंताजनक उदाहरण बताया।
पीड़ित के परिवार के हवाले से पांक ने कहा कि पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के कर्मियों ने ईद की पूर्व संध्या पर मस्तुंग के किल्ली कारेज सोर इलाके में उनके घर पर छापा मारा, मुहम्मद को जबरन घर से बाहर ले गए और गोली मारकर हत्या कर दी।
परिवार का यह भी कहना है कि “न तो कोई गिरफ्तारी वारंट दिखाया गया, न ही कोई पुलिस रिपोर्ट दर्ज की गई और न ही कार्रवाई को सही ठहराने के लिए कोई सबूत पेश किया गया।”
पांक ने इस घटना को क्षेत्र में जबरन गायब किए जाने और फर्जी हत्याओं के व्यापक पैटर्न का हिस्सा बताते हुए कहा कि “ऐसी कार्रवाइयां जीवन के अधिकार, विधिक प्रक्रिया और मनमानी हिरासत से सुरक्षा जैसे मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं।”
संगठन ने कहा, यह हत्या गंभीर कानूनी और नैतिक सवाल खड़े करती है। संगठन ने इस पर तत्काल पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग की।
पांक ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाने की अपील की।
संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से भी बलूचिस्तान की स्थिति पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि इससे हिंसा और नागरिकों की पीड़ा और बढ़ सकती है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















