ट्रंप के शांति प्रस्ताव को ईरान ने कर दिया खारिज, रख दी ये 5 शर्तें
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका की युद्धविराम पहल को पूरी तरह खारिज कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भेजी गई 15 सूत्री शांति योजना को तेहरान ने 'अत्यधिक' और असंतुलित बताते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया. ईरान की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में यह स्पष्ट संकेत मिला है कि वह किसी भी समझौते के लिए अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा. ईरान ने सिर्फ ट्रंप की 15 शर्तों को मानने से इनकार किया है बल्कि अपनी 5 शर्तें भी सामने रख दी हैं.
'युद्ध हमने नहीं, आपने शुरू किया'- ईरान
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इजरायल पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि संघर्ष की शुरुआत उनकी ओर से हुई थी. तेहरान का कहना है, 'युद्ध आपने शुरू किया है, लेकिन इसे खत्म कब और कैसे करना है, यह हम तय करेंगे.' इस बयान से साफ है कि ईरान किसी बाहरी दबाव में आने के बजाय अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखना चाहता है.
तेहरान ने रखी ये 5 प्रमुख शर्तें
सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने संघर्ष समाप्त करने के लिए पांच नई शर्तें रखी हैं, जो उसकी रणनीतिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं:
1. आक्रामकता पर पूर्ण विराम: ईरान ने सभी प्रकार के हमलों और “हत्या अभियान” को तुरंत रोकने की मांग की है.
2. भविष्य में युद्ध रोकने की गारंटी: ऐसा ठोस तंत्र तैयार किया जाए जिससे भविष्य में इस तरह का संघर्ष दोबारा न हो.
3. युद्ध क्षति का मुआवज़ा: ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए.
4. प्रॉक्सी मोर्चों पर भी शांति: क्षेत्र में सक्रिय सभी सहयोगी और प्रतिरोध समूहों के लिए भी युद्ध समाप्त किया जाए.
5. होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता: Strait of Hormuz पर ईरान ने अपने अधिकार को “प्राकृतिक और कानूनी” बताते हुए इसकी अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग की है.
होर्मुज का मुद्दा क्यों अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. यहां से गुजरने वाला तेल वैश्विक आपूर्ति का बड़ा हिस्सा है. ईरान का इस क्षेत्र पर नियंत्रण का दावा न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है. यही कारण है कि इस मुद्दे पर अमेरिका और उसके सहयोगी देश विशेष रूप से सतर्क हैं.
बहरहाल अमेरिका जहां इस संघर्ष को बातचीत के जरिए समाप्त करना चाहता है, वहीं ईरान का रुख अधिक सख्त और शर्तों पर आधारित दिखाई दे रहा है. दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बयानबाजी और शर्तों की जटिलता यह संकेत देती है कि तत्काल समाधान आसान नहीं है. जमीनी स्तर पर भी तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं.
अनिश्चित भविष्य
ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकराने से यह स्पष्ट हो गया है कि पश्चिम एशिया में शांति की राह अभी लंबी और जटिल है. जब तक दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों में लचीलापन नहीं दिखाते, तब तक यह संघर्ष और गहराने की आशंका बनी रहेगी. आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की दिशा ही तय करेगी कि क्षेत्र युद्ध से बाहर निकल पाएगा या नहीं.
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