LPG Gas Crisis: गैस की कालाबाजारी पर CM Yogi सख्त, लोगों से की अफवाब पर ध्यान ना देने की अपील
LPG Gas Crisis: कुशीनगर में रसोई गैस की किल्लत के बीच अब कालाबाजारी और अनियमितताओं के मामले सामने आने लगे हैं. एक तरफ जहां आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ गैस एजेंसी संचालकों पर आपदा में मुनाफाखोरी के आरोप लग रहे हैं.
जांच में 63 सिलेंडर कम पाए गए
खड्डा थाना क्षेत्र में एक गैस एजेंसी की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ. प्रशासनिक टीम ने जब स्टॉक का मिलान किया तो रिकॉर्ड में दर्ज संख्या के मुकाबले 63 भरे हुए सिलेंडर कम पाए गए. यह जांच जिलापूर्ति अधिकारी की मौजूदगी में कराई गई, जिसमें स्पष्ट रूप से अनियमितता सामने आई. अधिकारियों के अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडरों की इस तरह कमी पाया जाना कालाबाजारी की ओर इशारा करता है.
प्रशासन का सख्त एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की. जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित गैस एजेंसी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है. अधिकारियों का कहना है कि कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी.
UNCOVERED With Manoj Gairola: क्या इजरायल को मझधार में छोड़ देंगे ट्रंप? ईरान युद्ध के दलदल में फंसा अमेरिका खोज रहा रास्ता
ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहां से अमेरिका के पैर उखड़ते नजर आ रहे हैं. सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक एक ऐसी घोषणा कर दी, जिसने न केवल दुनिया को हैरान किया, बल्कि उनके सबसे करीबी साथी इजरायल के पैरों तले भी जमीन खिसका दी. ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान इस युद्ध को रोकने के लिए बातचीत कर रहे हैं और जल्द ही समझौता हो जाएगा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगले पांच दिनों तक अमेरिका, ईरान के किसी भी पावर प्लांट पर हमला नहीं करेगा.
इजरायल के साथ विश्वासघात या 'इकतरफा' फैसला?
हैरानी की बात यह है कि जिस वक्त ट्रंप शांति और समझौते की बात कर रहे थे, ठीक उसी समय इजरायली फाइटर जेट्स ईरान पर भारी बमबारी कर रहे थे. इजरायल ने तेहरान के कई पावर स्टेशन्स को मलबे में तब्दील कर दिया, जिससे शहर के बड़े हिस्से में अंधेरा छा गया. ट्रंप के इस फैसले ने इजरायल को सकते में डाल दिया है, क्योंकि यह घोषणा करने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भरोसे में लेना भी जरूरी नहीं समझा. इजरायल सरकार ने अपनी मीडिया को साफ कहा है कि यह अमेरिका का 'इकतरफा' फैसला है और उन्हें इसके बारे में कोई पहले से जानकारी नहीं दी गई थी.
क्या वे 'सेफ एग्जिट' ढूंढ रहे हैं?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप, इजरायल को बीच मझधार में छोड़कर भागने का रास्ता खोज रहे हैं? दरअसल, युद्ध की शुरुआत में ट्रंप का अंदाजा था कि यह वेनेजुएला जैसा कोई छोटा ऑपरेशन होगा जो कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा. पहले दिन ईरान के सुप्रीम लीडर समेत 40 बड़े नेताओं को खत्म करने के बाद अमेरिका का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था. लेकिन इसके बाद ईरान ने अपने 'सस्ते और घातक' ड्रोन और मिसाइलों से जो पलटवार किया, उसने पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को तार-तार कर दिया.
F-35 से लेकर युद्धपोत तक निशाने पर
बीते 25 दिनों की जंग में अमेरिका को वो जख्म मिले हैं, जिनकी उसने कल्पना भी नहीं की थी. ईरान ने अब तक अमेरिका के 16 विमान गिरा दिए हैं, जिनमें दुनिया का सबसे आधुनिक और 'अजेय' माना जाने वाला फाइटर जेट F-35 भी शामिल है. इतना ही नहीं, अमेरिका का मशहूर एयर डिफेंस सिस्टम 'THAAD' नष्ट हो तबाह हो गया है और इजरायल का 'आयरन डोम' भी अब ईरान की मिसाइलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है. सबसे बड़ी चोट अमेरिका की शान कहे जाने वाले जंगी जहाज 'USS जेराल्ड आर फोर्ड' को लगी है, जिसे ईरानी मिसाइलों ने इतना नुकसान पहुंचाया कि उसे युद्ध क्षेत्र से भागना पड़ा. अब यह जहाज दो साल तक मरम्मत के लिए बाहर हो गया है. इस जंग में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हैं.
ईरान का 'ब्रह्मास्त्र' और तेल का संकट
अमेरिका की सबसे बड़ी सिरदर्दी 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Hormuz Strait) की नाकेबंदी है. यह 55 किलोमीटर चौड़ा रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है. अब यहां ईरान का पूरा कब्जा है. इसके कारण कच्चे तेल के दाम 60 डॉलर से उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं. ईरान के हमलों की वजह से सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे देशों ने तेल का उत्पादन कम कर दिया है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट गई है. आज स्थिति यह है कि ईरान 'मजबूत स्थिति' (Position of Strength) में खड़ा है और पूरी दुनिया में तेल का संकट गहरा गया है.
मिडटर्म इलेक्शन और गिरती लोकप्रियता
ट्रंप की इस हताशा के पीछे एक बड़ा कारण घरेलू राजनीति भी है. अमेरिका में पेट्रोल के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और महंगाई चरम पर है. इसी साल नवंबर में अमेरिका में 'मिडटर्म इलेक्शन' होने हैं. सर्वे बता रहे हैं कि इस युद्ध की वजह से ट्रंप की लोकप्रियता काफी गिर गई है और उनकी पार्टी यह चुनाव हार सकती है. अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप की ताकत खत्म हो जाएगी. यही वजह है कि वे किसी भी तरह इस दलदल से बाहर निकलना चाहते हैं और मध्यस्थता की पेशकश को एक मौके की तरह देख रहे हैं.
इजरायल और अमेरिका के हितों का टकराव
यहां से इजरायल और अमेरिका के रास्ते अलग होते दिख रहे हैं. नेतन्याहू चाहते हैं कि यह युद्ध तब खत्म हो जब ईरान पूरी तरह बर्बाद हो जाए, उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम और मिसाइल ताकत खत्म हो जाए और हमास-हिजबुल्ला जैसे संगठन मिट जाएं. इसके लिए अमेरिका का साथ रहना जरूरी है. लेकिन दूसरी तरफ, ईरान को शक है कि यह ट्रंप और इजरायल की कोई मिलीजुली चाल भी हो सकती है. उसे डर है कि ट्रंप समझौते की बात करके सिर्फ वक्त निकाल रहे हैं ताकि ईरान की घेराबंदी कर उसके 'खर्ग द्वीप' पर बड़ा हमला किया जा सके, जहां से ईरान का 90 प्रतिशत तेल निर्यात होता है.
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