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'शाहीन-3' और 'अबाबील' के साथ उन्‍नत होती पाकिस्तान की म‍िसाइल क्षमता अमेर‍िका के ल‍िए खतरा : तुलसी गबार्ड

नई द‍िल्‍ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राज्य अमेरिका की शीर्ष खुफिया अधिकारी तुलसी गबार्ड ने पाकिस्‍तान को ऐसे देश की श्रेणी में रखा, जो अमेर‍िका के लि‍ए खतरा बन सकता है। पाकिस्तान की उन्‍नत होती म‍िसाइल क्षमता को खतरा बताते हुए गबार्ड ने कहा क‍ि यह अमेर‍िका तक पहुंच बना सकती है।

राष्ट्रीय खुफिया निदेशक गबार्ड ने 2026 की वार्षिक खतरा मूल्यांकन रिपोर्ट को सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने प्रस्तुत क‍िया।

गबार्ड ने कहा कि पाकिस्तान नए, उन्नत या पारंपरिक मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर रिसर्च और डेवलपमेंट कर रहा है, जो परमाणु और पारंपरिक पेलोड के साथ अमेरिका को अपनी पहुंच में ला सकते हैं।

हालांकि, पाकिस्तान ने दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी रणनीतिक क्षमताएं पूरी तरह रक्षात्मक हैं और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से हैं।

एक ओर इस्लामाबाद इन आरोपों से इनकार कर रहा है, वहीं अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तान लगातार अधिक परिष्कृत तकनीक विकसित कर रहा है।

पाकिस्तान के ‘विश्वसनीय प्रतिरोध’ के घोषित सिद्धांत और उसकी वास्तविक गतिविधियों के पैमाने तथा वैश्विक विस्तार के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। पाकिस्तान हमेशा से यह कहता रहा है कि उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भारत-केंद्रित है, लेकिन यदि शाहीन-3 के विकास को देखा जाए, जिसकी मारक क्षमता लगभग 2,750 किलोमीटर है, और वहीं अबाबील के विकास को देखें जो एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने वाले वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। इससे यह स्‍पष्‍ट होता है क‍ि पाकिस्तान अपनी तत्काल क्षेत्रीय जरूरतों से आगे बढ़ चुका है।

सूचना युद्ध और मनोवैज्ञानिक युद्ध की जांच करने वाली डिसइन्फो लैब नामक शोधकर्ताओं के एक समूह ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर कई पोस्ट्स की श्रृंखला में खुलासा किया कि पाकिस्तान का व्यापक विनाश के हथियारों (डब्‍ल्‍यूएमडी) के विकास में सबसे कुख्यात प्रसार रिकॉर्ड रहा है।

उनका कहना है कि 2,750 किलोमीटर दूर स्थित पड़ोसी देश के लिए इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) क्षमता विकसित नहीं की जाती। यहां संदर्भ शाहीन-3 का था, जो ईरान तक पहुंचने में सक्षम है। इस श्रेणी की मिसाइल तेहरान जैसे शहरों को अपनी पहुंच में ला सकती है। यह पाकिस्तान की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है, जो लंबी दूरी की डिलीवरी प्रणालियों की ओर बढ़ रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रतिरोध केवल भारत तक सीमित है, तो पाकिस्तान ऐसी क्षमताएं क्‍यों हा‍स‍िल कर रहा है जो उस परिचालन दायरे से आगे जाती हैं। डिसइन्फो लैब भी अब्दुल कदीर खान द्वारा संचालित नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिन्हें व्यापक रूप से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का वास्तुकार माना जाता है।

यह नेटवर्क आधुनिक इतिहास के सबसे व्यापक प्रसार अभियानों में से एक रहा है। यह एक ज्ञात तथ्य है कि खान के नेटवर्क ने ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया को संवेदनशील परमाणु तकनीक और डिजाइन उपलब्ध कराए। यह नेटवर्क महाद्वीपों में फैले बिचौलियों के जाल के माध्यम से संचालित होता था। उन्होंने शेल कंपनियों, अवैध वित्तीय चैनलों और फ्रंट-एंड प्रोक्योरमेंट संरचनाओं का उपयोग किया।

पाकिस्तान का कहना है कि उसने खान की गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया है, लेकिन इस नेटवर्क की विरासत आज भी यह तय करती है कि वैश्विक खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान की वर्तमान गतिविधियों की व्याख्या कैसे करती हैं। 2023 के बाद से वाशिंगटन ने पाकिस्तान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों से जुड़ी कई संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें घरेलू कंपनियां और विदेशी आपूर्तिकर्ता, विशेष रूप से चीन के आपूर्त‍िकर्ता शाम‍िल हैं। इस तंत्र के केंद्र में राज्य-संबद्ध संस्थाएं जैसे नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (एनडीसी) और एईआरओ हैं, जो पाकिस्तान की क्रूज मिसाइलों और रणनीतिक यूएवी के लिए सैन्य खरीद इकाई है।

एईआरओ, 2014 में ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद, बिचौलिया कंपनियों के जरिए संवेदनशील पुर्जे हासिल करना जारी रखे हुए है। इनमें से ज्यादातर संस्थाओं की कोई सार्वजनिक मौजूदगी नहीं है, न ही कोई पहचान योग्य कर्मचारी हैं और न ही कोई पारदर्शी वित्तीय रिकॉर्ड हैं। हालिया प्रतिबंधों की एक खास बात चीनी कंपनियों की भूमिका है। उन पर महत्वपूर्ण पुर्जों की आपूर्ति करने का आरोप है, जिनमें फिलामेंट वाइंडिंग मशीनों से लेकर उन्नत वेल्डिंग प्रणालियां शामिल हैं, जिनका उपयोग मिसाइलों के उत्पादन में किया जाता है। ये तकनीकें मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) के अंतर्गत आती हैं, जो 500 किलोग्राम से अधिक पेलोड को 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तक पहुंचाने में सक्षम प्रणालियों के प्रसार को सीमित करता है।

पाकिस्तान एमटीसीआर का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, जिससे उसके लिए ऐसी तकनीकों को वैध चैनलों के माध्यम से प्राप्त करना कठिन हो जाता है। अमेरिका की जांच से पता चला है कि इसकी वजह से गुप्त खरीद के रास्ते बढ़ गए हैं, जिनमें कराची में बैठे बिचौलिए, दिखावटी ट्रेडिंग कंपनियां और दोहरे इस्तेमाल वाले उपकरणों को छिपाने के तरीके शामिल हैं।

अमेरिका ने 2023 से 2025 के बीच कई बार प्रतिबंध लगाए हैं, जिनका निशाना पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी संस्थाएं थीं। अधिकारियों का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि पाकिस्तान का हथियार कार्यक्रम न तो स्थिर है और न ही पूरी तरह से क्षेत्रीय। इसके बजाय, यह कार्यक्रम तकनीकी रूप से आगे बढ़ रहा है, खरीद के नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और ऐसे रास्तों से काम कर रहा है जो लगातार और ज्यादा अस्पष्ट होते जा रहे हैं।

पाकिस्तान गैरकानूनी तरीके से अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का कहना है कि अब चिंता दक्षिण एशिया में हथियारों के संतुलन को लेकर नहीं है, बल्कि एक ऐसे कार्यक्रम को लेकर है, जो गंभीर और खतरनाक सवाल खड़े करता है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत जोड़ी 9 गीगावाट से अधिक की रूफटॉप सोलर क्षमता

नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना फरवरी 2024 में लॉन्च होने से बाद से अब तक देश में 9.566 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी जा चुकी है। यह बयान सरकार की ओर से बुधवार को दिया गया।

सरकार की ओर से बताया गया कि एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने से 25 साल की परियोजना अवधि में लगभग 1,000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन होगा और 720 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति श्रृंखला, बिक्री और स्थापना, संचालन एवं रखरखाव सेवाओं और वित्तीय सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

इसके अलावा, सरकार ने यह भी बताया कि भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचने की संभावना है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने राज्यसभा में कहा, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक भारत में लगभग 8000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता चालू हो चुकी है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

विश्व बैंक समूह ने कहा कि हरित हाइड्रोजन उत्पादन की कुल लागत में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान 50-70 प्रतिशत है।

स्थानीय डिस्कॉम से ग्रिड से जुड़े बिजली कनेक्शन वाले आवासीय उपभोक्ता, योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन करके आरटीएस सिस्टम लगाने के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना योजना का लाभ उठा सकते हैं।

देश में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर लगाने के लक्ष्य को प्राप्त करने और रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने आवेदन से लेकर सब्सिडी के वितरण तक की पूरी प्रक्रिया को राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवासीय उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे वितरित करने की ऑनलाइन सुविधा शुरू की है।

इसके अलावा, राष्ट्रीयकृत बैंकों से आवेदकों को रियायती ब्याज दर (रेपो दर प्लस 50 बीपीएस) पर, यानी वर्तमान में 5.75 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर पर, 10 वर्षों की अवधि के लिए बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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हरमनप्रीत कौर ने भरी हुंकार- कहा, खिताबी जीत ने भरी नई जान, दुनिया में कहीं भी जीतने को तैयार है भारत

Harmanpreet Kaur: भारतीय महिला टीम की कप्तान की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा है कि उनकी निगाहें अब आईसीसी टी20 विश्व कप की ट्रॉफी जीतने पर है. हरमनप्रीत की कप्तानी में पिछले साल भारतीय टीम ने पहली बार वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था. इस खिताबी जीत से टीम इंडिया में एक नई जान मिली है. Wed, 25 Mar 2026 22:02:19 +0530

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