"कीड़े नहीं ये तो केसर है..." वंदे भारत ट्रेन में खाने में परोसा जा रहा है ये, देखकर भी नहीं होगा यकीन
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि वंदे भारत में यात्री खाने की शिकायत करते हुए नजर आ रहे हैं. इस वीडियो ने रेलवे की प्रीमियम सर्विस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक यात्री अपनी पूरी जानकारी देते हुए खाने की खराब क्वालिटी के बारे में बता रहा है. यात्री का कहना है कि उसे जो खाना दिया गया है, वह खाने लायक बिल्कुल भी नहीं है. यह घटना भारत की सबसे आधुनिक मानी जाने वाली ट्रेन की साख पर एक बड़ा धब्बा है.
दही में कीड़े या केसर?
वीडियो का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह है जहां यात्री अपने दही के पैकेट को दिखाता है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दही के अंदर छोटे-छोटे कीड़े तैर रहे हैं. जब यात्री इसकी शिकायत वहां मौजूद ट्रेन अटेंडेंट से करता है, तो स्टाफ की तरफ से बहुत ही अजीब जवाब मिलता है. अटेंडेंट कहता है कि दही में जो दिख रहा है वह केसर है. हालांकि, यात्री प्लेट में उन कीड़ों को साफ तौर पर दिखाकर यह साबित करता है कि वे केसर नहीं बल्कि गंदगी और कीड़े हैं. स्टाफ का इस तरह से बात को टालना यात्रियों की सेहत के साथ बड़े खिलवाड़ की तरफ इशारा करता है.
यात्रियों ने की शिकायत की मांग
इस पूरी घटना के दौरान यात्री काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं. वीडियो में यात्री को कहते हुए सुना जा सकता है कि आप तुरंत कंप्लेन बुक लेकर आइए, हमें लिखित में शिकायत दर्ज करनी है. इस दौरान ट्रेन के कोच में मौजूद दूसरे यात्री भी खाने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं. वीडियो में अटेंडेंट काफी आराम से बात करता हुआ दिखता है, जिससे लगता है कि उसे इस गंभीर मामले का कोई खास असर नहीं हो रहा है. यात्रियों का कहना है कि वे भारी किराया देकर इस लग्जरी ट्रेन में सफर करते हैं और बदले में उन्हें इस तरह का घटिया खाना मिल रहा है.
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लग्जरी ट्रेन की सर्विस पर सवाल
भारत में वंदे भारत जैसी ट्रेनों को लग्जरी और हाई-स्पीड ट्रेनों में गिना जाता है. इन ट्रेनों का किराया भी आम ट्रेनों के मुकाबले काफी ज्यादा होता है. ऐसे में अगर इन ट्रेनों में भी यात्रियों को साफ-सुथरा और अच्छा खाना नहीं मिल रहा है, तो यह रेलवे प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दिखाता है. यह अपने आप में हैरान करने वाली बात है कि जिस ट्रेन को आधुनिक भारत की पहचान बताया जाता है, वहां साफ-सफाई और हाइजीन का इतना बुरा हाल है. यात्रियों की सेहत के साथ ऐसी लापरवाही किसी भी हाल में सही नहीं कही जा सकती है.
Kalesh in Vande Bharat train over worms in served food.
— Kapil (@kapsology) March 25, 2026
Attendant said 'Kesar hai..kesar' for the insect leg found in the Dahi. ???? pic.twitter.com/3U4KALgHLc
घटना की जगह और समय पर संशय
हालांकि, इस वायरल वीडियो के साथ यह साफ नहीं हो पाया है कि यह घटना असल में किस तारीख की है और ट्रेन किस रूट पर चल रही थी. वीडियो में यात्री की डिटेल्स और कोच का नजारा तो दिख रहा है, लेकिन रूट और समय की पुख्ता जानकारी अभी सामने नहीं आई है. इसके बावजूद, वीडियो ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है. लोग लगातार इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं और रेलवे मंत्रालय से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. अभी तक रेलवे की तरफ से इस खास वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
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भारत-इजरायल साझेदारी से आईएमईसी को मिली मजबूती, चीन की बढ़ती पकड़ को संतुलित करने की कोशिश
नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत किया है। द जेरूसलम स्ट्रेटेजिक ट्रिब्यून में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह कदम एक बड़े रणनीतिक और आर्थिक खेल का हिस्सा है।
लेख में बताया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी के कनेसेट (इजरायल की संसद) में दिए गए भाषण में भारत की व्यापक रणनीतिक सोच और उसमें इजरायल की भूमिका साफ दिखाई दी। उन्होंने संकेत दिया कि भारत एक ऐसा क्षेत्रीय ढांचा बनाना चाहता है, जिससे पश्चिमी देशों के साथ व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़े, जिसमें इजरायल की अहम भूमिका हो।
यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ाना चाहता है और चीन के बढ़ते प्रभाव से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। अब भारत पुरानी गुटनिरपेक्ष नीति से आगे बढ़कर ऐसे देशों के साथ साझेदारी कर रहा है, जिनकी नीतियां स्थिर और भरोसेमंद हैं।
भारत की इस योजना के केंद्र में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) है। यह सिर्फ एक व्यापारिक मार्ग नहीं है, बल्कि इसे चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य एशिया और यूरोप के बीच व्यापार और ऊर्जा पर चीन के प्रभाव को कम करना है।
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने परिवहन, ऊर्जा और टेलीकॉम सेक्टर में बड़े निवेश करके कई देशों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था चीन पर निर्भर हो गई है।
ऐसे में आईएमईसी इस स्थिति को संतुलित करने की कोशिश है। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें पारदर्शिता, साझेदारी और साझा हितों को प्राथमिकता दी जाती है, बजाय एकतरफा नियंत्रण के।
भारत के लिए इस कॉरिडोर की सफलता के लिए इजरायल और ग्रीस जैसे देश अहम हैं, क्योंकि ये स्थिर व्यवस्था और बेहतर तकनीकी क्षमता प्रदान करते हैं।
हालांकि, चीन की स्थिति अभी भी काफी मजबूत है। बीआरआई के तहत पहले से ही कई बड़े प्रोजेक्ट और नेटवर्क तैयार हो चुके हैं, जैसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) और ग्वादर पोर्ट। इसके अलावा चीन का ईरान और खाड़ी देशों के साथ मजबूत संबंध भी उसकी ताकत बढ़ाते हैं।
इस वजह से आईएमईसी के सामने चुनौती सिर्फ एक विकल्प देने की नहीं है, बल्कि खुद को एक भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकने वाला मॉडल साबित करने की भी है।
लेख के अनुसार, भारत और उसके साझेदारों के लिए इस कॉरिडोर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह एक ऐसा सुरक्षित और पारदर्शी सिस्टम बना पाए, जो किसी एक देश पर निर्भर न हो और सभी देशों के हितों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाए।
--आईएएनएस
डीबीपी
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