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रूसी इलाके में इजरायल ने दागी मिसाइल? तगड़ा जवाब आया

मिडिल ईस्ट की जंग अब ऐसे मोड़ पर है जहां इसकी सीमाएं तेजी से टूटती नजर आ रही हैं। खबर आई कि कैप्सियन सी में इजराइल ने एक बड़ा हमला किया। बताया जाता है कि इजराइल ने पहली बार कैप्सन सागर में हमला करते हुए उस सप्लाई लाइन को निशाना बनाया जो रशिया और ईरान के बीच हथियारों की आवाजाही के लिए बेहद अहम मानी जाती है। यह सिर्फ एक हमला नहीं था बल्कि एक साफ संदेश कि अब जंग की कोई सीमा नहीं बची। इसकी तस्वीरें भी इज़राइल की तरफ से जारी की गई। माना गया कि इसी लिंक को निशाना बनाया गया है। इस सवाल के जवाब में जब रूस ये पूछा गया कि किस तरह से इन हमलों को देखते हैं तो क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेशकोव ने क्या कहा है यह भी जानना बड़ा जरूरी हो जाता है। दिमित्री पेशको कहते हैं कि यह बहुत नकारात्मक खबर है। हालांकि उनको इस तरह की कोई रिपोर्ट अभी तक मिली नहीं है। 

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इजराइल ने इस तरह के हमले को अंजाम देते हुए यह दावा किया कि उसने ऐसे दर्जनों बोट्स को निशाना बनाया जो एक तरह से मिसाइल बोट्स थी। मिलिट्री के स्पोक पर्सन ने कहा है कि ईरान की नेवल कैपेसिटी को निशाना बनाते हुए इस क्षेत्र को निशाना बनाया गया जहां से हथियारों की सप्लाई हो रही थी। दरअसल कैप्सियन सागर दुनिया का सबसे बड़ा इनलैंड वाटर बॉडी लंबे समय से रूस और ईरान के लिए एक सुरक्षित रास्ता बना हुआ था। यहां अमेरिकी नौसेना की पहुंच नहीं मानी जाती है। इसलिए यह इलाका हथियारों की सप्लाई के लिए लगभग सेफ जोन बन गया था। इसी रूट के जरिए बताया जाता है कि ड्रोन, आर्टिलरी शेल्स, भारी मात्रा में गोला बारूद ट्रांसफर किए जा रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक लाखों राउंड और हजारों शेल्स इसी रास्ते से भेजे गए जिससे जंग में दोनों देशों की ताकत बढ़ती रही। इस सप्लाई चेन में सबसे अहम भूमिका निभा रहे थे।

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 ईरान के शाहिद ड्रोन जिन्हें रशिया यूक्रेन में इस्तेमाल कर रहा था और ईरान खुद खाड़ी क्षेत्र में अपने ऑपरेशंस में यानी कि यह ड्रोंस इस पूरे नेटवर्क की रीड बन चुके थे। अब इसी नेटवर्क को तोड़ने के लिए इजराइल ने कैप्सन तट पर मौजूद बंदर अंजली पोर्ट को निशाना बनाया। इस हमले में वॉरशिप, नेवल कमांड सेंटर, शिपयार्ड, रिपेयर फैसिलिटीज तक को टारगेट किया गया।  पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दिया है कि रूस और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य गठजोड़, जंग के दौरान रूस ने ईरान को एडवांस टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस सपोर्ट जैसी चीजें मुहैया कराई होंगी। और यही वजह है कि इजराइल ने इस इलाके को निशाना बनाने का सोच लिया। हालांकि आपको यह भी बता दें कि बीते साल ही रशिया और ईरान के बीच में एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप ट्रीटी हस्ताक्षर हुई थी। जिसके जरिए कैप्सिन सागर में इन दोनों का गठजोड़ मजबूत होता दिखा है। हालांकि इस तरह के किसी भी हमले को लेकर रशिया का यह कहना है कि उसके किसी भी एसेट को निशाना नहीं बनाया गया है। 

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66 अमेरिकियों के साथ ईरान का खौफनाक काम, बदले की आग में जल रहे ट्रंप

दुनिया की राजनीति में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ इतिहास ही नहीं बल्कि वर्तामन में भी बड़े टकराव की जड़ बन जाती है। एक ऐसी ही कहानी जिसमें सत्ता बदली, रिश्ते टूटे और भरोसे की जगह गरही दुश्मनी ने ले ली। कभी एक दूसरे के दोस्त देश कैसे एक दूसरे के सबसे बड़े विरोधी बन गए। उस दौर की ऐसी कहानी जहां से शुरू हुआ टकराव जिसका असर आज भी खत्म नहीं हुआ है। 4 नवंबर 1979 अमेरिका के विदेश मंत्रालय में टेलीफोन की घंटी बजती है। फोन ईरान के अमेरिकी दूतावास से था और कॉल पर ऑफिसर एलिजाबेथ स्विफ्ट थी। एक ही सांस में उन्होंने कहना शुरू किया कि ईरानियों ने हमला कर दिया है। भीड़ दीवार फांद कर अंदर घुस रही है। दूतावास पर कभी भी कब्जा हो सकता है। स्विफ्ट अभी फोन पर ही थी, तभी ईरानियों ने दूतावास की पहली मंजिल में आग लगा दी। सभी कर्मचारी बाहर की तरफ भागे। दूतावास के स्टाफ को मेन गेट खोलना पड़ा। फोन कटने से पहले स्विफ्ट के आखिरी शब्द थे- वी आर गोइंग।

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डाउन दूतावास तबाह होने वाला था। अगले कुछ मिनटों में अमेरिकी डिप्लोमेट्स और कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया। उनकी आँख पर पट्टी बांध दी गई। ना उन्हें कुछ देखने की इजाजत थी ना ही कुछ बोलने की। यह खबर जैसे ही अमेरिका तक पहुंची पूरी सरकारी मशीनरी सक्रिय हो गई। राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर पल-पल की खबर ले रहे थे। कुछ देर बाद अचानक उनकी नजर टीवी स्क्रीन पर पड़ी जो नजारा दिखा उसने दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी। तेहरान में अमेरिकी नागरिकों, राजदूतों और कर्मचारियों को परेड कर ले जाया जा रहा था। पीछे भीड़ उनकी मौत के नारे लगा रही थी। पूरी दुनिया यह नजारा देख रही थी, सुपर पावर अमेरिका को ईरान ने घुटनों पर ला दिया था। 

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अमेरिका को कैसे ईरान ने सिखाया इतिहास का सबसे बड़ा सबक

1 अप्रैल 1979 को ईरान को एक इस्लामिक रिपब्लिक घोषित कर दिया गया। लेकिन खुमैनी का बदला अभी पूरा नहीं हुआ था वह शाह पहलवी को सबक सिखाना चाहते थे साथ ही अमेरिका को भी अब अमेरिका को क्यों क्योंकि शाह कैंसर का इलाज कराने के बहाने ईरान से भागकर अमेरिका चले गए थे उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति थे जिमी कार्टर ईरान ने अमेरिका से शाह को लौटाने के लिए कहा लेकिन अमेरिका ने ऐसा करने से मना कर दिया क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच डिप्लोमेटिक रिलेशंस खत्म हो चुके थे पर खुमैनी को बदला लेना ही था। 4 नवंबर 1979 को वह दिन भी आ गया सुबह-सुबह एक भीड़ अमेरिकी दूतावास की तरफ बढ़ने लगी। यह प्रदर्शनकारियों की भीड़ थी। इस भीड़ को खुमैनी का मौन समर्थन प्राप्त था। देखते ही देखते सभी डिप्लोमेट्स और कर्मचारियों को बंदी बना लिया गया जो संख्या में 66 थे। 

 

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100 विकेट का कीर्तिमान और दो वर्ल्ड कप ट्रॉफी, फिर भी अर्शदीप सिंह को है इस एक मौके का इंतजार

Arshdeep Singh wants to make splash in Test: टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह टी20 और वनडे के बाद टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करना चाहते हैं. अर्शदीप सिंह टीम इंडिया के लिए टी20 में लगातार धमाकेदार खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं. यही कारण है कि वह टी20 में भारत के लिए 100 विकेट लेने वाले पहले पेसर बने हैं. Wed, 25 Mar 2026 20:47:21 +0530

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