मध्य पूर्व संकट के बीच कृषि मंत्री की बड़ी बैठक: खाद आपूर्ति सुचारू रखने और जमाखोरी व कालाबाजारी रोकने के निर्देश
नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को एक समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच खाद की आपूर्ति मजबूत करने, कालाबाजारी रोकने और अन्य जरूरी कदमों पर जोर दिया गया।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि बैठक में आने वाले खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्रालय ने बताया कि लक्ष्य यह है कि किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य जरूरी संसाधन मिल सकें।
कृषि मंत्री ने कहा कि खाद की आपूर्ति पूरे देश में बराबर और बिना रुकावट के होनी चाहिए। उन्होंने फार्मर आईडी के काम को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि वितरण प्रणाली पारदर्शी बन सके। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर समन्वय के लिए वह जल्द ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों से भी बैठक करेंगे।
मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि खाद और बीज की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक संकट का फायदा उठाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक में कृषि रसायनों और बीज सुखाने के लिए जरूरी गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए।
कृषि क्षेत्र की लगातार निगरानी के लिए एक स्पेशल सेल बनाया गया है, जो चौबीसों घंटे काम करेगा। यह सेल हर हफ्ते खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर रिपोर्ट सीधे कृषि मंत्री को देगा।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संकट के समय उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सरकार किसानों तक जरूरी संसाधन समय पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में कृषि उत्पादन करीब 44 प्रतिशत बढ़ा है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है। केंद्र सरकार किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड खरीद भी शामिल है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-ताइवान का व्यापार 2025 में 17 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर के पार
नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। भारत-ताइवान का द्विपक्षीय व्यापार 2025 में सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 12.5 अरब डॉलर हो गया है। यह जानकारी ताइपे इकोनॉमिक एंड कल्चरल सेंटर (टीईसीसी) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों दी गई।
भारत की ओर से ताइवान का निर्यात बढ़कर 3.3 अरब डॉलर हो गया है। इसमें मिनरल फ्यूल, एल्यूमिनियम, लोहा, स्टील, जैविक रसायन और प्लास्टिक शामिल है। ताइवान का भारत को निर्यात 9.2 अरब डॉलर रहा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स इंटेग्रेटेड सर्किट्स, प्लास्टिक, जैविक रसायन, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लोहा और स्टील शामिल है।
एशियन कम्युनिटी न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान एक्सीलेंस एक्सपो इवेंट के लॉन्च के दौरान टीईसीसी की इकोनॉमिक डिविजन की डायरेक्टर एस्टेला चेन ने कहा,ताइवान सेमीकंडक्टर, एआई सर्वर, एआईओटी टोटल सॉल्यूशन और एज कंप्यूटिंग में अग्रणी भूमिका में है।
पिछले वर्ष ताइवान और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 12.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह बढ़ता आर्थिक संबंध निवेश को बढ़ावा दे रहा है और दोनों पक्षों के बीच व्यापार सहयोग को गहरा कर रहा है।
चेन ने आगे कहा कि ताइवानी कंपनियां भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और ऑटोमोटिव सेक्टर्स में सक्रिय रूप से निवेश कर रही हैं, जबकि भारतीय कंपनियां ताइवान के आईटी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में मूल्यवान अवसर तलाश रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ताइवान को भारत की प्रमुख पहलों जैसे डिजिटल इंडिया और इंडिया एआई मिशन में एक विश्वसनीय भागीदार होने पर गर्व है।
उन्होंने कहा, स्मार्टफोन और आईओटी मैन्युफैक्चरिंग से लेकर एडवांस हाइ-टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट डिजाइन तक, ताइवान की विशेषज्ञता भारत के डिजिटल परिवर्तन में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वर्तमान में, भारत में कार्यरत ताइवानी कंपनियों की कुल संख्या 300 से अधिक हो गई है।
हालांकि, अमेरिका (246.43 अरब डॉलर), चीन (100.1 अरब डॉलर), दक्षिण कोरिया (90.2 अरब डॉलर) और जापान (84.85 अरब डॉलर) जैसे अन्य देशों के साथ ताइवान के द्विपक्षीय व्यापार की तुलना में, भारत के साथ व्यापार में और अधिक प्रगति की संभावना है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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