मध्य पूर्व की जंग से फर्टिलाइजर पर क्या हो रहा असर? जिसके चलते कृषि मंत्री को बुलानी पड़ी उच्चस्तरीय बैठक
Middle East Crisis: मध्य पूर्व में जारी जंग के चलते दुनियाभर पर ईंधन का संकट मंडराने लगा है. पेट्रोल-डीजल और गैस के साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण है जो इस युद्ध के चलते प्रभावित हो रही है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं फर्टिलाइजर की. जिसे लेकर बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई. ये बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब मध्य पूर्व पुछले 26 दिनों से युद्ध की आग में जल रहा है. जिसके चलते फर्टिलाइजर के उत्पादन पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आईं. इन खबरों के सामने आने के बाद केंद्र ने तुरंत उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और साफ किया कि हर हाल में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति चलती रहे.
कृषि मंत्री के आवास पर हुई बैठक
बता दें कि केंद्रीय कृषि शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार यानी 25 मार्च आज अपने निवास पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ आगामी खरीफ सीजन के लिए रणनीतिक तैयारी सुनिश्चित करना था. इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि हमें संकट के समय सक्रिय भूमिका निभानी है.
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरक आपूर्ति और फार्मर आईडी को लेकर चर्चा की. जिससे काम में तेजी लाई जा सके और उर्वरकों का वितरण पारदर्शी हो सके. बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने फर्टिलाइजर की न्यायसंगत और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया. साथ ही उन्होंने अधिकारियों को 'फार्मर आईडी' के काम में तेजी लाने के भी निर्देश दिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके लिए वे जल्द ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ भी बैठक करेंगे.
कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर सख्ती
इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने मध्य पूर्व में चल रही जंग का लाभ उठाकर खाद और बीजों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने चाहिए. इस दौरान बीज सुखाने के लिए आवश्यक गैस और एग्रो-केमिकल्स की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई. कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को हर संभव संसाधन समय पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
मिडिल ईस्ट की जंग से फर्टिलाइजर पर क्यों पड़ रहा असर?
मिडिल ईस्ट में जारी संकट से सिर्फ कच्चे तेल की आपूर्ति पर ही असर नहीं पड़ा है बल्कि किसानों के लिए जरूरी उर्वरक यानी फर्टिलाइजर्स के उत्पादन पर भी असर पड़ा है. जिसमें यूरिया और डीएपी का उत्पादन मुख्य रूप से शामिल है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चा माल जैसे अमोनिया, सल्फर और पोटाश का आयात भी ठप हुआ है. जिसका इस्तेमाल फर्टिलाइजर बनाने में किया जाता है. इसी के चलते भारत में भी फर्टिलाइजर्स की किल्लत को लेकर आशंका पैदा हो गई है. अगर ये युद्ध जल्द नहीं थमा तो आने वाले दिनों में भारत समेत दुनियाभर के देशों में फर्टिलाइजर की किल्लत हो सकती है.
बता दें कि मध्य पूर्व में जंग का असर तेल, गैस और फर्टिलाइजर पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कई यूरिया प्लांट अपनी क्षमता से कम पर चल रहे हैं. क्योंकि फर्टिलाइजर और ऑयल गैस अलग नहीं हैं. नेचुरल गैस से अमोनिया बनता है और अमोनिया से बनता है यानी अगर गैस की सप्लाई रुकी तो यूरिया का उत्पादन ठप हो जाएगा. जिससे कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ेगा. दुनिया की बड़ी आबादी इसी सिस्टम पर निर्भर है. इसके अलावा सल्फर का उत्पादन भी रिफाइनरी से ही होता है. जिसका इस्तेमाल फर्टिलाइजर्स के अलावा फार्मा, केमिकल इंडस्ट्री और इलेक्ट्रोनिक्स में होता है
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