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ई20 पेट्रोल वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित, व्यापक परीक्षणों के बाद हुई पुष्टि : सरकार

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों, वाहन निर्माताओं और उद्योग संगठनों द्वारा किए गए व्यापक प्रयोगशाला परीक्षणों और वास्तविक परिस्थितियों में हुए परीक्षणों के बाद यह पुष्टि हुई है कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

संसद में एक लिखित उत्तर में भारी उद्योग मंत्रालय ने कहा कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) तथा विभिन्न वाहन निर्माताओं ने संयुक्त रूप से ई20 ईंधन पर विस्तृत परीक्षण किए।

मंत्रालय ने आगे कहा कि इन परीक्षणों के दौरान इंजन की मजबूती, वाहन की संचालन क्षमता, ठंडे मौसम में इंजन स्टार्ट होने की क्षमता, जंग प्रतिरोध, विभिन्न पुर्जों के साथ ईंधन की अनुकूलता, ईंधन प्रणाली की विश्वसनीयता, उत्सर्जन स्तर और ईंधन दक्षता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया।

इन सभी अध्ययनों के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि निर्धारित मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है और इससे वाहनों के प्रदर्शन या टिकाऊपन पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

भारी उद्योग मंत्रालय ने बताया कि 26 दिसंबर 2020 को नीति आयोग के तहत एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने वाहनों की ई20 ईंधन के साथ अनुकूलता, माइलेज और ईंधन दक्षता से जुड़े सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा की थी।

इस मूल्यांकन को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा किए गए शोध का भी पूरा समर्थन मिला।

मंत्रालय ने कहा कि ई20 ईंधन के वैज्ञानिक परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियां, ऑटोमोबाइल कलपुर्जा निर्माता, एसआईएएम, एआरएआई, परीक्षण एजेंसियां और तेल विपणन कंपनियां सक्रिय रूप से शामिल रहीं।

सरकार के अनुसार, ई20 ईंधन को लागू करने से पहले ईंधन प्रणाली, इंजन की मजबूती, वाहन संचालन क्षमता, विभिन्न पुर्जों के साथ ईंधन की अनुकूलता तथा उत्सर्जन प्रदर्शन का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया था।

मंत्रालय ने संसद को बताया कि परीक्षणों के दौरान निर्धारित परिचालन परिस्थितियों में पुराने वाहनों पर भी ई20 पेट्रोल के उपयोग से प्रदर्शन, इंजन की टिकाऊ क्षमता या वाहन के पुर्जों की अनुकूलता पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की के डिफेंस पैक्ट से भड़के हूती, दी खुली धमकी; क्या पश्चिम एशिया में बढ़ेगा तनाव?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए नए रक्षा समझौते ने पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, सुरक्षा समन्वय और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर इस समझौते को देखा जा रहा है. इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना बताया गया है, लेकिन करार के सामने आने के तुरंत बाद यमन के हूती विद्रोहियों की तीखी प्रतिक्रिया ने नई चिंता पैदा कर दी है.

हूती नेतृत्व की ओर से दिए गए बयानों में सऊदी अरब के साथ-साथ उसके सहयोगियों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है. इससे सवाल उठने लगा है कि क्या यह नया रक्षा गठजोड़ यमन संघर्ष को फिर से तेज करने का कारण बन सकता है.

हूतियों ने क्यों जताई नाराजगी?

हूती नेता हिजाम अल-असद की ओर से सोशल मीडिया पर जारी बयानों में सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और उसके सहयोगियों को लेकर कड़ी चेतावनी दी गई. उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन में अपनी सैन्य गतिविधियों को मजबूत करने के लिए नए साझेदारों का सहारा ले रहा है.

हूती नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया कि जो देश सऊदी सैन्य गतिविधियों में सहयोग करेंगे, वे भी उनके निशाने पर आ सकते हैं. हालांकि, ऐसी धमकियों को लेकर अभी तक सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से कोई बड़ा आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है.

डिफेंस पैक्ट में क्या है खास?

तीनों देशों के बीच सहयोग को सैन्य और रणनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसमें सुरक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने जैसे पहलुओं पर जोर है.

सऊदी अरब की आर्थिक क्षमता, पाकिस्तान का सैन्य अनुभव और तुर्की की तेजी से विकसित होती रक्षा तकनीक इस साझेदारी को खास बनाते हैं. खास तौर पर तुर्की के ड्रोन और अन्य रक्षा प्रणालियां क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

सऊदी अरब और हूतियों की पुरानी दुश्मनी

हूतियों और सऊदी अरब के बीच तनाव कोई नया नहीं है. यमन के गृहयुद्ध के दौरान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय तक संघर्ष चला. इस दौरान सऊदी क्षेत्र को ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना भी करना पड़ा.

लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण भी हूती संगठन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में रहा है. ऐसे में सऊदी अरब के साथ किसी नए सैन्य गठजोड़ को हूती नेतृत्व अपने खिलाफ संभावित रणनीतिक चुनौती के रूप में देख सकता है.

पाकिस्तान और तुर्की के लिए क्या चुनौती?

नए समझौते के बाद पाकिस्तान और तुर्की के सामने संतुलन साधने की चुनौती भी बढ़ सकती है. दोनों देशों के सऊदी अरब के साथ मजबूत संबंध हैं, लेकिन यमन संघर्ष में प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी एक संवेदनशील मुद्दा हो सकती है.

अगर सहयोग केवल रक्षा प्रशिक्षण, तकनीक और सुरक्षा समन्वय तक सीमित रहता है तो जोखिम अपेक्षाकृत कम रहेगा. लेकिन यदि किसी स्तर पर सैनिकों की तैनाती या प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो हूतियों की प्रतिक्रिया और व्यापक क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है.

क्या पश्चिम एशिया में बढ़ सकता है तनाव?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नए रक्षा समझौते के कारण कोई नया बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू हो जाएगा. हूतियों की धमकी को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है, लेकिन धमकी और वास्तविक सैन्य कार्रवाई के बीच बड़ा अंतर होता है.

फिर भी, लाल सागर, यमन और सऊदी सीमा क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील हैं. ऐसे में किसी भी नए सैन्य कदम से हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं.

भारत के लिए भी अहम घटनाक्रम

इस घटनाक्रम पर भारत की भी नजर रहना स्वाभाविक है. भारत के सऊदी अरब और तुर्की दोनों के साथ अलग-अलग स्तर पर आर्थिक और कूटनीतिक संबंध हैं. वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारतीय ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

इसलिए सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की रक्षा सहयोग और हूतियों की प्रतिक्रिया को केवल क्षेत्रीय विवाद के रूप में नहीं देखा जा सकता. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह गठजोड़ केवल रणनीतिक सहयोग तक सीमित रहता है या पश्चिम एशिया की सैन्य राजनीति में कोई बड़ा बदलाव लाता है.

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