Explainer: 50 साल के हीरो का 20 साल की हीरोइन संग रोमांस, लेकिन 40 की एक्ट्रेस को क्यों मिलता है मां का रोल?
Bollywood Age Gap Hero Heroine Explain: बॉलीवुड में हीरो की एज बढ़ती है, हालांकि, उनकी उम्र रोमांस के लिहाज से रुक सी जाती है. अक्सर आपने देखा होगा कि फिल्मों में 50 या 60 की उम्र के हीरो 20 35 साल की एक्ट्रेस संग रोमांस करते दिखाई देते हैं. दूसरी तरफ, वहीं, ज्यादा उम्र की हीरोइन को मां या सपोर्टिंग का रोल दिया जाता है. इस तरह का फर्क टीवी और फिल्मों में बहुत आम है. यह सवाल सिर्फ उम्र का नहीं, बल्कि स्टार सिस्टम, मार्केट वैल्यू और फिल्म या टीवी की स्क्रिप्ट लिखने के तरीके और सोसाइटी की सोच भी जुड़ा हुआ है. इस एक्सपेलर में समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है.
हीरो के नाम पर बिकती हैं फिल्म
बॉलीवुड में बड़े स्टार्स की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्टार पावर है. कई एक्टर अपने फैंस के बीच ऐसी खास जगह बना चुके हैं. उनके नाम से फिल्म बिकती है. इसलिए प्रोड्यूसर एक्टर की उम्र से ज्यादा जरूरी उसकी मार्केट वैल्यू और लोगों के बीच उसकी पकड़ को देखते हैं. यही वजह है कि 50 या 60 साल के एक्टर को भी फिल्म में जवान, फिट और रोमांटिक दिखाने की कोशिश की जाती है. मेकर्स जानते हैं कि स्टार की पॉपुलैरिटी फिल्म की कमाई, ओटीटी राइट्स, सैटेलाइट राइट्स और एड जैसी कई चीजों पर असर डाल सकती है.
वहीं, दूसरी तरफ हीरोइन के मामले में लंबे टाइम तक यह सोच उतनी स्टॉन्ग नहीं रही. उनको अक्सर जवान दिखने और रोमांटिक रोल्स से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए जैसे ही उन हीरोइन की उम्र बढ़ती है तो उनके मैन लीड रोल घटने लग जाते हैं.
40 साल की एक्ट्रेस को क्यों दिया जाता है मां का रोल
इसकी सबसे बड़ी वजह बॉलीवुड की पारंपरिक कहानी है. काफी लंबे समय तक हिंदी फिल्मो में कहानी का हीरो मेल एक्टर ही रहा है. उसके आसपास प्रेमिका, दोस्त, मां और फैमिली के दूसरे किरदार लिखे जाते रहे हैं. इस तरह की फिल्म की कहानी में हीरोइन को आसान ने प्रेमिका रोल मिल जाता है. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उन्हें ऐसे रोल मिलना बंद हो जाते हैं. कई फिल्मों में हीरो की मां का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस रियल लाइफ में उस एक्टर से बहुत कम उम्र की होती हैं. ऐसा केवल फिल्म की स्क्रिप्ट की डिमांड की वजह से होता है. लेकिन जब ऐसी कास्टिंग बार-बार होती है, तो सवाल उठता है कि एक्ट्रेस की उम्र को पर्दे पर इतनी जल्दी क्यों बढ़ा दिया जाता है.
देखा जाए तो यहां पर समस्या सिर्फ कास्टिंग की नहीं, किरदारों की कमी की भी है. 40 साल की एक्ट्रेस को मां बनाने के बजाय उसे डॉक्टर, वकील, पत्रकार, पुलिस अधिकारी, बिजनेसवुमन या मैन लीड एक्ट्रेस के तौर पर भी लिखा जा सकता है.
सोसाइटी भी है एक बड़ा कारण
फिल्में सोसाइटी की सोच से अलग नहीं बनतीं. जिस सोसाइटी में पुरुष की बढ़ती उम्र को एक्सपीरियंस, रुतबा और अट्रैक्शन से जोड़ा जाता है, वहीं महिलाओं पर एज और ब्यूटी को लेकर ज्यादा प्रेशर देखने को मिलता है. इसी तरह की सोच का असर फिल्मों में देखने को मिलता है. एक उम्रदराज पुरुष को सक्सेसफुल, ताकतवर और रोमांटिक दिखाना लोगों को नॉर्मल लगता है. लेकिन दूसरी तरफ एक्ट्रेस के लिए उम्र बढ़ने के साथ उसकी ब्यूटी, कपड़ों और पर्सनल लाइफ पर सवाल उठने लग जाते हैं. शादी या मां बनने के बाद भी कई एक्ट्रेस को ऐसी नजर से देखा जाता है जैसे उनका रोमांटिक या ग्लैमरस किरदार निभाने का टाइम खत्म हो गया हो.
हालांकि, इस तरह की सोच धीरे-धीरे बदल रही है. आज की ऑडियंस स्टोरी और एक्टिंग को ज्यादा जरूरी समझती है. इसलिए स्क्रीन पर एज का अंतर सिर्फ मेकर्स का फैसला नहीं होता बल्कि सोसाइटी में लंबे टाइम से चली आ रही पसंद और सोच का भी असर है.
युवा एक्ट्रेस के साथ बड़ा स्टार लगेगा अच्छा
हर साल बॉलीवुड में नए एक्टर लॉन्च होते हैं. युवा एक्ट्रेस की बड़ी संख्या मेकर्स को नई जोड़ियां बनाने का ऑप्शन देती है. कई बार प्रोड्यूसर और डायरेक्टर मान लेते हैं कि युवा एक्ट्रेस के साथ बड़ा स्टार ज्यादा रोमांटिक और शानदार दिखाई देगा.दूसरी तरफ, एक्सपीरियंस एक्ट्रेस के लिए केवल एज बढ़ना ही समस्या नहीं होती. उन्हें बढ़िया कहानी के साथ एक ऐसा किरदार करने की चाह होती है, जिससे उनकी एक्टिंग स्किल बाहर आ सके. ऐसे में किसी प्रोजेक्ट में ऐसे किरदार ही कम हैं तो अच्छे कलाकार होने के बावजूद उन्हें मौके लिमिटेड मिल सकते हैं.
इसके अलावा यहां फीस और मार्केट वैल्यू का सवाल उठता है. बड़े स्टार की फिल्म में एक्ट्रेस की को कई बार मैन कहानी के बजाय उसकी जोड़ी या ग्लैमर तक ही रखा जाता है. हालांकि, जब एक्ट्रेस खुद फिल्म में लीड एक्ट्रेस के तौर पर आती है तो उसकी तस्वीर ही बदल जाती है.
ओटीटी के जरिए आ रहा बदलाव
ओटीटी के आने से एक्ट्रेस के लिए किरदारों का दायरा बड़ा है. वेब सीरीज में स्टोरी को सिर्फ दो-ढाई घंटे में खत्म करने का प्रेशर नहीं होता है. सुष्मिता सेन की आर्या, रवीना टंडन की अरण्यक और काजोल की द ट्रायल जैसे प्रोजेक्ट्स ने दिखाया कि उम्रदराज एक्ट्रेस भी स्टोरी की लीड बन सकती हैं. इनमें उनका किरदार सिर्फ किसी की पत्नी या मां नहीं था. वहीं, मैन स्ट्रीम की फिल्मों में भी तस्वीर बदल रही है. क्रू जैसी फिल्मों में तब्बू और करीना कपूर जैसी एक्ट्रेस ने लीड रोल निभाया था. ऐसी फिल्मों की सक्सेस ने साफ किया कि महिला कलाकारों के लिए उम्र के साथ किरदार खत्म होना जरूरी नहीं है बल्कि अच्छी स्क्रिप्ट और एक्ट्रेस पर भरोसे की है.
धीरे-धीरे आ रहा बदलाव
आज के समय में कई एक्ट्रेस अपनी उम्र छुपाने की जगह अपने एक्सपीरियंस को ताकत की तरह इस्तेमाल कर रही हैं. राइटर अब एक्ट्रेस के किरदारों को सिर्फ मां या पत्नी तक लिमिटेड रखने के बजाय उनको ध्यान में रखकर लिखते हैं. ऐसे में आगे भी ऐसा ही देखने को मिलता रहा तो 40 की एक्ट्रेस के लिए मां का किरदार निभाना एक ऑप्शन होगा ना की मजबूरी. इस तरह के बदलाव केवल एक्ट्रेस के लिए नहीं, इंडस्ट्री के लिए जरूरी है. अगर किसी एक्ट्रेस की उम्र उसके किरदार के लिए सही है, तो उसे उसी बेस पर उसे कास्ट किया जाना चाहिए.
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