मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव? आयुर्वेद से जानें उपाय और बचाव
नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। मासिक धर्म के दौरान अगर अत्यधिक या असामयिक रक्तस्राव को मेनोरेजिया कहा जाता है। इसे समझना जरूरी है क्योंकि यह सिर्फ शरीर की कमजोरी ही नहीं, बल्कि जीवनशैली और खान-पान की आदतों से भी जुड़ा होता है। मेनोरेजिया या असामान्य रक्तस्राव को कंट्रोल करना मुश्किल नहीं है। सही खान-पान, स्वच्छता, हल्की एक्सरसाइज और आयुर्वेदिक घरेलू उपाय इसे नियंत्रित करने में काफी मदद करते हैं।
बिहार में अब हर तीसरी सांसद-विधायक महिलाएं होंगी:मोदी सरकार ला रही महिला रिजर्वेशन, महिलाओं की कितनी सीटें बढ़ेंगी, क्या लगेगा फॉर्मूला
मोदी सरकार ने UP चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन देने की कवायद शुरू कर दी है। मौजूदा बजट सत्र में इसको लेकर एक संविधान संशोधन बिल आ सकता है। इसके बाद संसद से लेकर देशभर की विधानसभाओं में हर तीसरीसांसद-विधायक महिला ही नजर आएंगी। महिला रिजर्वेशन लागू होने पर क्या बदल जाएगा। देशभर में लोकसभा की कितनी सीटें बढ़ सकती है। बिहार में सदन की रूपरेखा कैसे बदल जाएगी, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः 33% महिला रिजर्वेशन लागू करने के लिए मोदी सरकार क्या करने वाली है? जवाबः 2023 में संसद ने 33% महिला रिजर्वेशन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) कानून को पारित किया था। हालांकि, अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। इसे जल्द लागू करने में सबसे बड़ी अड़चन कानून में शामिल परिसीमन की अनिवार्यता है। दरअसल, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में शर्त है कि महिला आरक्षण नई जनगणना और उसके परिसीमन के बाद ही लागू होगा। 2027 तक जनगणना पूरा होने की संभावना है। मतलब महिला रिजर्वेशन 2029 से पहले संभव नहीं है। परिसीमन और जनगणना हटाने की विपक्ष शुरू से कर रहा मांग सवाल-2ः महिला रिजर्वेशन लागू हुआ तो क्या मौजूदा सीटों में कोटा होगा या सीटें बढ़ेंगी? जवाबः अभी तक स्पष्ट नहीं है कि महिला आरक्षण संसद और विधानसभा की मौजूदा सीटों पर ही लागू होगा या सीटें बढ़ाकर लागू किया जाएगा। अब दोनों परिस्थितियों में जानिए महिलाओं की कितनी सीटें होंगी… सवाल-3ः अगर सीटें बढ़ी तो बिहार में लोकसभा और विधानसभा में कितनी बढ़ेगी? जवाबः अगर मोदी सरकार का 50% वाला फॉर्मूला लागू हुआ तब… सवाल-4ः कौन सी सीट महिलाओं के लिए रिजर्व होगी, यह कैसे तय होगा? जवाबः अभी तक स्पष्ट नहीं है। लेकिन आरक्षित सीटों का चयन लॉटरी सिस्टम से हो सकता है। सीटों का निर्धारण हर चुनाव में बारी-बारी से बदला जाएगा, ताकि किसी क्षेत्र के पुरुष उम्मीदवारों के अवसर स्थायी रूप से प्रभावित न हों। जनरल सीटों पर भी ‘महिला प्राथमिकता’ का नया फॉर्मूला सूत्रों के मुताबिक, आरक्षण लागू करने के बाद भी सामान्य सीटें नहीं घटेंगी। 33% आरक्षित सीटों के अलावा अनारक्षित सीटों पर भी महिलाओं की उम्मीदवारी को प्राथमिकता देने का प्रावधान जोड़ने पर विचार हो रहा है। इससे संसद में महिलाओं की कुल हिस्सेदारी 38 से 40% तक पहुंचने की उम्मीद है। सवाल-5ः मोदी सरकार क्यों लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ाने की तैयारी कर रही? जवाबः लोकसभा में सीटों की संख्या आखिरी बार 1971 की जनगणना के आधार पर 543 की गई थी, जो अभी तक जस की तस है। जबकि, तब देश की आबादी महज 55 करोड़ थी, जो अब करीब 145 करोड़ है। मुंबई स्थित अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान की स्टडी के मुताबिक, बढ़ती आबादी के कारण सीटों का बढ़ना लाजमी हो गया है। वजह, आबादी बढ़ने से एक जनप्रतिनिधि पर 20-28 लाख तक की आबादी का बोझ आ गया है। संविधान कहता है- जनगणना के बाद सीट एडजस्ट हों
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