Black Cardamom Benefits: भारतीय किचन में मौजूद मसाले खाने के स्वाद को तो बढ़ाने काम करते ही हैं, साथ ही सेहत के लिए भी बेहद गुणकारी माने जाते हैं। कई मसालों को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं। आज हम आपको एक […]
भारतीय राजनीति के सबसे ऐतिहासिक पतों में से एक, 24 अकबर रोड, अब कांग्रेस पार्टी के हाथ से निकल सकता है। केंद्र सरकार ने कांग्रेस को राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने दो प्रमुख कार्यालयों—24 अकबर रोड (राष्ट्रीय मुख्यालय) और 5 रायसीना रोड—को खाली करने का बेदखली नोटिस (Eviction Notice) थमा दिया है।
28 मार्च तक का समय, पार्टी में मची हलचल
नोटिस के अनुसार, पार्टी को ये दोनों संपत्तियां 28 मार्च तक खाली करनी होंगी। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पुष्टि की है कि नोटिस कुछ दिन पहले ही प्राप्त हुए थे, जिससे पार्टी के पास कानूनी और राजनीतिक बचाव के लिए बहुत कम समय बचा है।
पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय 24 अकबर रोड और एक और अहम जगह 5 रायसीना रोड के लिए बेदखली के नोटिस दिए गए हैं, और खाली करने की आखिरी तारीख 28 मार्च तय की गई है। कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने इस बात की पुष्टि की कि नोटिस कुछ दिन पहले मिले थे, जिससे पार्टी के पास जवाब देने के लिए बहुत कम समय बचा है।
ये टिप्पणियां कांग्रेस के अंदर बढ़ती बेचैनी की ओर इशारा करती हैं कि क्या वह इन दो राजनीतिक रूप से अहम संपत्तियों पर अपना कब्ज़ा बरकरार रख पाएगी। पार्टी अब अपने अगले कदमों पर विचार कर रही है, जिसमें अदालत जाना और सरकार से और समय मांगना शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस संपत्ति के आवंटन को फिर से व्यवस्थित करने के लिए थोड़े और समय का अनुरोध कर सकती है। विचाराधीन विकल्पों में से एक यह है कि किसी सीनियर नेता को राज्यसभा में लाया जाए और बंगला उनके नाम पर आवंटित करवाया जाए, जिससे वह लगातार इस्तेमाल के लिए योग्य हो जाए। हालांकि, इसके लिए 28 मार्च की समय सीमा से पहले तेज़ी से राजनीतिक और कानूनी दांव-पेच चलने की ज़रूरत होगी।
24 अकबर रोड, जो लंबे समय से कांग्रेस नेतृत्व से जुड़ा रहा है, के संभावित रूप से हाथ से निकल जाने के प्रतीकात्मक और व्यावहारिक, दोनों तरह के असर होंगे। 5 रायसीना रोड के साथ-साथ, ये संपत्तियां दिल्ली में पार्टी के तालमेल और फ़ैसले लेने के लिए अहम केंद्रों के तौर पर काम करती रही हैं।
Royal challengers bengaluru sale: आईपीएल इतिहास में एक और बड़ा रिकॉर्ड बन गया। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु फ्रेंचाइजी को करीब 1.78 अरब डॉलर (लगभग 16,660 करोड़ रुपये) में एक बड़े कंसोर्टियम ने खरीद लिया। यह डील मौजूदा मालिक यूनाइटेड स्पिरिट्र्स लिमिटेड ने आधिकारिक तौर पर घोषित की।
इस कंसोर्टियम में आदित्य बिरला ग्रुप, टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप, बोल्ट वेंचर्स और ब्लैकस्टोन की BXPE रणनीति शामिल है। इस ऑल-कैश डील के बाद आरसीबी की पुरुष और महिला दोनों टीमें अब इस नए समूह के स्वामित्व और संचालन में होंगी।
लखनऊ-गुजरात फ्रेंचाइजी की वैल्यू से ज्यादा में हुआ सौदा यह सौदा इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी कीमत 2021 में बेची गई लखनऊ सुपर जायंट्स और गुजरात टाइटंस की संयुक्त वैल्यू से भी ज्यादा है। इससे साफ है कि आईपीएल फ्रेंचाइजी की ब्रांड वैल्यू तेजी से बढ़ रही।
पहले डियाजियो के पास था मालिकाना हक दरअसल, पिछले साल नवंबर में डियाजियो ने संकेत दिए थे कि वह RCB में अपनी हिस्सेदारी की समीक्षा कर रही है, क्योंकि क्रिकेट उसका मुख्य कारोबार नहीं है। इसके बाद बिक्री की प्रक्रिया शुरू हुई और अब यह डील पूरी हो गई है। हालांकि, अंतिम तौर पर इस सौदे को बीसीसीआई और प्रतिस्पर्धा आयोग से मंजूरी मिलना बाकी है।
2008 में 111 मिलियन डॉलर में आरसीबी बिकी थी आरसीबी आईपीएल की शुरुआत 2008 से ही जुड़ी हुई टीम है। उस समय इसे विजय माल्या के नेतृत्व वाले यूनाइटेड ब्रेवरीस ग्रुप ने करीब 111.6 मिलियन डॉलर में खरीदा था। इसके अलावा 2023 में RCB ने महिला प्रीमियर लीग (WPL) की टीम को भी 901 करोड़ रुपये में खरीदा था।
नए कंसोर्टियम ने भी इस डील को लेकर उत्साह जताया है। उनके अनुसार, RCB की मजबूत ब्रांड पहचान, बेंगलुरु से गहरा जुड़ाव और दुनिया भर में फैला फैन बेस इसे एक खास फ्रेंचाइजी बनाता है। कंसोर्टियम ने कहा कि वे टीम को मैदान के अंदर और बाहर नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस नए समूह में आर्यमन बिड़ला को चेयरमैन और सत्यन गजवानी को वाइस-चेयरमैन बनाया जाएगा। वहीं, यूएसएल के सीईओ प्रवीण सोमेश्वर ने कहा कि RCB आज आईपीएल और WPL की सबसे सफल और लोकप्रिय फ्रेंचाइजी में से एक बन चुकी है।
यह डील एक बार फिर दिखाती है कि भारतीय क्रिकेट और खासकर आईपीएल की आर्थिक ताकत लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।