ग्राहकों के लिए यूपीआई बना रहेगा मुफ्त और एमडीआर पर चल रही बहस से छोटे व्यापारी नहीं होंगे प्रभावित: पीसीआई
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा। साथ ही छोटे कारोबारियों को भी यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में उद्योग संगठन ने कहा कि वर्ष 2016 में लॉन्च होने के बाद से ही यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए नि:शुल्क रहा है और व्यक्तियों पर किसी प्रकार का ट्रांजैक्शन शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
पीसीआई ने कहा, यूपीआई 2016 में शुरू होने के बाद से हमेशा उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है। देश का हर नागरिक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के तत्काल डिजिटल भुगतान करना जारी रख सकेगा।
संगठन ने बताया कि यूपीआई को समाज के सभी वर्गों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था और आज भी यह भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बना हुआ है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब देश के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान ढांचे को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने को लेकर चर्चा तेज है। पीसीआई ने कहा कि मौजूदा बहस उपभोक्ताओं से शुल्क वसूलने को लेकर नहीं, बल्कि ऐसे डिजिटल इकोसिस्टम के रखरखाव और विकास को लेकर है, जो हर महीने अरबों लेनदेन संभाल रहा है।
संगठन ने जोर देकर कहा कि छोटे व्यापारियों पर किसी प्रकार का एमडीआर लागू नहीं है और उन्हें यूपीआई भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। छोटे कारोबारियों को सशक्त बनाना और उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना यूपीआई की मूल सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पीसीआई के अनुसार, छोटे व्यापारियों को यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर कोई एमडीआर नहीं देना पड़ता। यूपीआई को इस तरह डिजाइन किया गया था कि देश के सबसे छोटे व्यवसाय भी बिना अतिरिक्त लागत के डिजिटल भुगतान अपना सकें।
यूपीआई ने देश भर के लाखों छोटे दुकानदारों, ठेला विक्रेताओं, किराना कारोबारियों और सूक्ष्म उद्यमों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने का आसान और किफायती माध्यम उपलब्ध कराया है। इससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है।
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि यूपीआई अब एक साधारण भुगतान प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बन चुका है। इसके चलते तकनीकी उन्नयन, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और परिचालन क्षमता को लगातार मजबूत करने की जरूरत बढ़ी है।
संगठन के मुताबिक, जैसे-जैसे यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस विशाल डिजिटल ढांचे को टिकाऊ बनाए रखने के तरीकों पर चर्चा हो रही है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर किसी तरह का वित्तीय बोझ न पड़े।
पीसीआई ने बताया कि पिछले लगभग एक दशक में बैंकों, फिनटेक कंपनियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मिलकर यूपीआई नेटवर्क के निर्माण और संचालन में बड़ा निवेश किया है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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Delhi Water Logging: बारिश का कहर, डूब गई दिल्ली शहर? जारी हुआ रेड अलर्ट
Delhi Water Logging: दिल्ली-NCR में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. राजधानी के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है. बारिश के बाद कई पॉश इलाकों से लेकर आम रिहायशी क्षेत्रों तक पानी भर गया, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई.
सैनिक फार्म इलाके से सामने आई तस्वीरों में देखा गया कि भारी बारिश के बाद सड़कों पर काफी पानी जमा हो गया. हालात ऐसे हो गए कि लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. स्थानीय लोगों का कहना है कि जल निकासी की व्यवस्था कमजोर होने के कारण बारिश के दौरान हर साल ऐसी स्थिति बन जाती है.
नोएडा के महामाया फ्लाईओवर के नीचे जलभराव
बारिश का असर नोएडा में भी देखने को मिला. महामाया फ्लाईओवर के नीचे भारी मात्रा में पानी भर गया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई. जलभराव के बीच एक एंबुलेंस भी फंस गई.
राहत की बात यह रही कि एंबुलेंस में उस समय कोई मरीज मौजूद नहीं था. इसके बावजूद वाहन को पानी से बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. इस घटना के बाद उस रास्ते पर यातायात काफी देर तक प्रभावित रहा.
लोगों को करना पड़ा परेशानी का सामना
दिल्ली-NCR में बारिश के बाद कई जगहों पर सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं. कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई और लोगों को लंबा जाम झेलना पड़ा.
बारिश के कारण ऑफिस जाने वाले लोगों, स्कूली बच्चों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई जगह वाहन पानी में फंसते नजर आए.
प्रशासन की बढ़ी चुनौती
हर साल मानसून के दौरान दिल्ली और आसपास के इलाकों में जलभराव बड़ी समस्या बनकर सामने आता है. भारी बारिश के बाद प्रशासन के सामने पानी निकासी और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने की चुनौती बढ़ गई है.
मौसम विभाग ने आगे भी बारिश की संभावना जताई है. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी गई है. प्रशासन भी प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने में जुटा है.
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