प्रदेश के बाल कैंसर रोगियों के इलाज के लिए अन्य राज्यों में धन उपलब्ध कराएगी पंजाब सरकार
चंडीगढ़, 24 मार्च (आईएएनएस)। एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पंजाब सरकार आधिकारिक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य के बाल कैंसर रोगियों के इलाज के लिए अन्य राज्यों के अस्पतालों को सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (डीएचएफडब्ल्यू) में गैर-संचारी रोग विभाग के सहायक निदेशक डॉ. गगनदीप सिंह ग्रोवर ने कहा कि हाल ही में हमें हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक अस्पताल से सूचीबद्ध होने का अनुरोध प्राप्त हुआ, जहां एम्स से पंजाब के पांच मरीजों को इलाज के लिए स्थानांतरित किया गया था।
एक बयान के अनुसार, वे यहां कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए उपचार की पहुंच में सुधार पर आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला के दौरान बोल रहे थे।
बाल कैंसर देखभाल को मजबूत करने पर हितधारकों के संवाद में भाग लेते हुए हरियाणा के गैर-संचारी रोग विभाग के निदेशक डॉ. सुशील माही ने बच्चों को उनके घरों के पास स्थित उत्कृष्ट केंद्रों में आसानी से कैंसर का इलाज कराने में मदद करने के लिए सभी विकल्पों का पता लगाने की राज्य सरकार की तत्परता व्यक्त की।
आईसीएमआर की केंद्रीय मानव अनुसंधान नीति समिति की सदस्य, कैनकिड्स की संस्थापक और चाइल्डहुड कैंसर इंटरनेशनल की डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की प्रतिनिधि पूनम बागई ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है, क्योंकि इन राज्यों के मरीज पड़ोसी राज्यों में इलाज के लिए जाते रहते हैं।
उत्तर प्रदेश के ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जहां मरीजों ने मध्य प्रदेश के किसी अस्पताल में इलाज के लिए अपने राज्य की वित्तीय सहायता का लाभ उठाया है, लेकिन छह उत्तरी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सरकारी बीमा योजनाओं की ऐसी अंतरसंचालनीयता सीमित है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को हितधारकों के रूप में मिलकर काम करने और लद्दाख से लेकर हिमाचल प्रदेश और हरियाणा तक के क्षेत्र में कैंसर से पीड़ित 4,400 बच्चों के लिए समाधान खोजने की आवश्यकता है, ताकि यदि रोगी पड़ोसी राज्य के अधिक सुलभ केंद्र में उपचार कराने का विकल्प चुनता है तो उसके गृह राज्य की सरकारी वित्तीय सहायता योजना उसके साथ जारी रहे।
बगाई ने कहा कि उदाहरण के लिए, पंजाब मुख्यमंत्री राहत कोष के लाभार्थी को हरियाणा में मुफ्त उपचार मिलना चाहिए, या लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के बच्चों को चंडीगढ़ के पीजीआई में उपचार के दौरान अपनी सरकार की वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम होना चाहिए।
बयान में कहा गया है कि सम्मेलन में भाग लेने वालों में लुधियाना के सीएमसी में बाल रोग विभाग की प्रोफेसर, हेमेटोलॉजी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई की सलाहकार श्रुति कक्कड़ और चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर के एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर में पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी यूनिट की प्रोफेसर अमिता त्रेहान शामिल थीं।
सम्मेलन के सत्रों में उत्तर-पश्चिम भारत में व्यापक बाल कैंसर देखभाल के लिए एकीकृत मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्तीय अंतर और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, उत्तरजीविता परिणामों में सुधार लाने में तृतीयक केंद्रों की भूमिका और नीति से जन तक, अंतिम छोर तक प्रभाव के लिए सरकार-गैर-सरकारी संगठनों की साझेदारी का लाभ उठाना।
बगाई ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के 6 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में, भौगोलिक सीमाओं की परवाह किए बिना, कैंसर से पीड़ित बच्चों को उनके संबंधित राज्य सरकार के फंड से निर्बाध रूप से सर्वोत्तम उपचार मिलता रहे, इसके लिए राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए शीघ्र ही एक कार्य बल का गठन किया जाएगा।
--आईएएनएस
एसडी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मध्य पूर्व मामलों पर चीन सरकार के विशेष दूत ने मध्य पूर्व की स्थिति पर चीन का रुख स्पष्ट किया
बीजिंग, 24 मार्च (आईएएनएस)। चीन सार्वजनिक कूटनीति संघ ने 23 मार्च की दोपहर पेइचिंग में एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें मध्य पूर्व मामलों पर चीन सरकार के विशेष दूत जाई च्युन को मध्य पूर्व की स्थिति पर चीनी और विदेशी मीडिया को जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया गया था।
जाई च्युन ने कहा कि मध्य पूर्व में वर्तमान स्थिति बेहद तनावपूर्ण है, और बढ़ता संघर्ष आसपास के क्षेत्रों में भी फैल रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित हो रहा है। वर्तमान स्थिति पर चीन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है, जिसका केंद्र युद्धविराम और संवाद एवं बातचीत शुरू करने का आह्वान करना है।
जाई च्युन ने कहा कि मध्य पूर्व की इस यात्रा के दौरान, उन्होंने क्षेत्र के देशों के समक्ष चीन का रुख और स्पष्ट किया।
सबसे पहले, यह एक ऐसा युद्ध है जो कभी नहीं होना चाहिए था। मध्य पूर्व के लोगों में शांति और स्थिरता की व्यापक उम्मीद और ईरान तथा अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं के नए दौर के बीच, अमेरिका और इजरायल ने अचानक युद्ध को भड़का दिया, जिससे राजनयिक प्रयास विफल हुए।
दूसरा, इस संकट के सही और गलत पहलू स्पष्ट हैं। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना ईरान पर हमला किया, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के उद्देश्यों और सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है। चीन इसका कड़ा विरोध और निंदा करता है।
तीसरा, संघर्ष के प्रसार और बढ़ने को दृढ़तापूर्वक रोकना होगा। वर्तमान संघर्ष मध्य पूर्व की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर रूप से खतरे में डालता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और समुद्री मार्गों को प्रभावित करता है, और सभी देशों के कल्याण के लिए खतरा है।
चौथा, युद्धविराम अत्यंत महत्वपूर्ण है और पांचवां, संवाद और बातचीत ही मूल समाधान हैं।
जाई च्युन ने कहा कि जिन देशों का दौरा किया गया, उन्होंने वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति पर चीन के निष्पक्ष रुख और संघर्ष शुरू होने के बाद से उसके निरंतर राजनयिक मध्यस्थता प्रयासों की बहुत सराहना की और तनाव कम करने में चीन की बड़ी भूमिका की उम्मीद जताई।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
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