दुनिया की जासूसी और तकनीकी जंग अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। हाल में सामने आई जानकारी ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल मिसाइल और टैंक से नहीं लड़े जाते, बल्कि कैमरों, डाटा और अदृश्य एल्गोरिदम से भी तय होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इजराइल ने ईरान की सड़कों पर लगे कैमरों को एक ऐसे घातक हथियार में बदल दिया, जिसने सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई तक खतरे की रेखा खींच दी।
यह कोई साधारण साइबर हमला नहीं था। यह एक सुनियोजित, गहराई तक घुसपैठ करने वाली रणनीति थी, जिसमें हजारों कैमरों को हैक कर उन्हें जासूसी और निशाना तय करने के औजार में बदल दिया गया। ईरान के शहरों, घरों और सड़कों पर लगे कैमरे, जो सुरक्षा के लिए लगाए गए थे, वही अचानक इजराइल की आंख और कान बन गए।
रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने ईरान के निगरानी तंत्र में ऐसी सेंध लगाई कि लगभग हर गतिविधि उसकी नजर में आ गई। यह केवल फुटेज देखना नहीं था, बल्कि लोगों की आवाजाही, उनके रोजमर्रा के पैटर्न और यहां तक कि गाड़ियों के ठहराव तक का विश्लेषण किया गया। इस डाटा के आधार पर संभावित लक्ष्यों की पहचान की गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र खामेनेई थे। जानकारी के अनुसार, उनके आवास और आसपास की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी गई। यह साफ संकेत देता है कि यह हमला केवल निगरानी तक सीमित नहीं था, बल्कि एक संभावित हत्या की योजना का हिस्सा था।
इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि इतनी गहरी घुसपैठ आखिर कैसे संभव हुई? रिपोर्ट बताती है कि यह केवल बाहरी हमला नहीं था, बल्कि इसमें अंदर से मिली मदद या सिस्टम की कमजोरियां भी शामिल थीं। इजराइल ने उन कमजोर कड़ियों को खोजा, जहां से वह पूरे नेटवर्क को अपने नियंत्रण में ले सकता था। यह भी सामने आया है कि कैमरों से प्राप्त डाटा को बाहर के सर्वर तक पहुंचाया गया, जिससे इजराइल को रीयल टाइम निगरानी की सुविधा मिली। इसका मतलब है कि ईरान का पूरा शहरी ढांचा कुछ समय के लिए दुश्मन के नियंत्रण में था।
देखा जाये तो यह घटना आधुनिक युद्ध की दिशा को पूरी तरह बदल देने वाली है। अब युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि शहरों के भीतर, लोगों के बीच और डिजिटल नेटवर्क के जरिए लड़े जाएंगे। इजराइल ने यह दिखा दिया कि यदि किसी देश का निगरानी तंत्र कमजोर है, तो वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकता है।
सामरिक दृष्टि से इजराइल का यह ऑपरेशन कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक तो यह साबित करता है कि साइबर और भौतिक युद्ध अब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। साथ ही निगरानी प्रणाली को हथियार में बदलना भविष्य के युद्धों की नई रणनीति बन सकता है। इसके अलावा, किसी देश के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने के लिए अब पारंपरिक तरीकों की जरूरत नहीं रह गई है।
देखा जाये तो इस खुलासे ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। यह केवल ईरान की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस देश के लिए चेतावनी है जो तकनीक पर निर्भर है। यदि कैमरे, सेंसर और निगरानी प्रणाली सुरक्षित नहीं हैं, तो वह दुश्मन के लिए खुले दरवाजे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के कई गंभीर निहितार्थ हैं। जैसे कि डाटा ही नया हथियार है यानि जो देश डाटा को नियंत्रित करेगा, वही युद्ध जीतेगा। साथ ही आंतरिक सुरक्षा की अहमियत सर्वाधिक है क्योंकि केवल बाहरी दुश्मन से नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों से भी खतरा है। इसके अलावा, नेतृत्व पर सीधा खतरा है यानि अब किसी भी देश का शीर्ष नेतृत्व सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
बहरहाल, इजराइल का यह ऑपरेशन एक संकेत है कि दुनिया किस दिशा में बढ़ रही है। यह खामोश युद्ध है, जहां गोलियां नहीं चलतीं, लेकिन निशाने सटीक होते हैं। जहां दुश्मन दिखाई नहीं देता, लेकिन हर समय मौजूद रहता है। ईरान के लिए यह एक बड़ा झटका है, लेकिन दुनिया के लिए इससे भी बड़ा सबक। अगर अभी भी देशों ने अपनी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत नहीं किया, तो आने वाले समय में कैमरे, फोन और नेटवर्क ही उनके खिलाफ सबसे घातक हथियार बन जाएंगे। यह कहानी डरावनी है, लेकिन सच है और यही सच आने वाले युद्धों की नई परिभाषा लिख रहा है।
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चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस साल इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो रहे हैं, जिसका समापन 27 मार्च होगा। चैत्र नवरात्रि की धूम पूरे देश में है। माता की भक्ति में लीन भक्तों को अब अष्टमी और नवमी का इंतजार है। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो गई है। वहीं इसका समापन 27 मार्च को होगा। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी और चैत्र नवरात्रि की नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। अष्टमी और नवमी पर कन्याओं को भोजन कराया जाता है। नवरात्र के दौरान अलग-अलग दिनों में देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। व्रत रखने वाले भक्त कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं। कन्याओं को देवी मां का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख, शांति एवं सम्पन्नता आती है। कन्या भोज के दौरान नौ कन्याओं का होना आवश्यक होता है। इस बीच यदि कन्याएं 10 वर्ष से कम आयु की हो तो जातक को कभी धन की कमी नही होती और उसका जीवन उन्नतशील रहता है।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि में कन्या पूजन का बहुत महत्व है। आमतौर पर नवमी को कन्याओं का पूजन करके उन्हें भोजन कराया जाता है। लेकिन कुछ श्रद्धालु अष्टमी को भी कन्या पूजन करते हैं। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या भोजन का विधान ग्रंथों में बताया गया है। इसके पीछे भी शास्त्रों में वर्णित तथ्य यही हैं कि 2 से 10 साल तक उम्र की नौ कन्याओं को भोजन कराने से हर तरह के दोष खत्म होते हैं। कन्याओं को भोजन करवाने से पहले देवी को नैवेद्य लगाएं और भेंट करने वाली चीजें भी पहले देवी को चढ़ाएं। इसके बाद कन्या भोज और पूजन करें। कन्या भोजन न करवा पाएं तो भोजन बनाने का कच्चा सामान जैसे चावल, आटा, सब्जी और फल कन्या के घर जाकर उन्हें भेंट कर सकते हैं।
कन्या पूजन महाष्टमी और रामनवमी
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि में कन्या पूजन या कुमारी पूजा, महाष्टमी और रामनवमी दोनों ही तिथियों को किया जाएगा। महाष्टमी को मां महागौरी और रामनवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। जिन घरों में महाष्टमी और महानवमी की पूजा होती है, वहां इस दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है और उन्हें गिप्ट बांटे जाते हैं।
पुराणों में है कन्या भोज का महत्व
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पौराणिक धर्म ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार नवरात्री के अंतिम दिन कौमारी पूजन आवश्यक होता है। क्योंकि कन्या पूजन के बिना भक्त के नवरात्र व्रत अधूरे माने जाते हैं। कन्या पूजन के लिए अष्टमी और नवमी तिथि को उपयुक्त माना जाता है। कन्या भोज के लिए दस वर्ष तक की कन्याएं उपयुक्त होती हैं।
कन्या और देवी के शस्त्रों की पूजा
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अष्टमी को विविध प्रकार से मां शक्ति की पूजा करें। इस दिन देवी के शस्त्रों की पूजा करनी चाहिए। इस तिथि पर विविध प्रकार से पूजा करनी चाहिए और विशेष आहुतियों के साथ देवी की प्रसन्नता के लिए हवन करवाना चाहिए। इसके साथ ही 9 कन्याओं को देवी का स्वरूप मानते हुए भोजन करवाना चाहिए। दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा को विशेष प्रसाद चढ़ाना चाहिए। पूजा के बाद रात्रि को जागरण करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए।
हर आयु की कन्या का होता है अलग महत्व
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 2 साल की कन्या को कौमारी कहा जाता है। इनकी पूजा से दुख और दरिद्रता खत्म होती है। 3 साल की कन्या त्रिमूर्ति मानी जाती है। त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और परिवार का कल्याण होता है। 4 साल की कन्या कल्याणी मानी जाती है। इनकी पूजा से सुख-समृद्धि मिलती है। 5 साल की कन्या रोहिणी माना गया है। इनकी पूजन से रोग-मुक्ति मिलती है। 6 साल की कन्या कालिका होती है। इनकी पूजा से विद्या और राजयोग की प्राप्ति होती है। 7 साल की कन्या को चंडिका माना जाता है। इनकी पूजा से ऐश्वर्य मिलता है। 8 साल की कन्या शांभवी होती है। इनकी पूजा से लोकप्रियता प्राप्त होती है। 9 साल की कन्या दुर्गा को दुर्गा कहा गया है। इनकी पूजा से शत्रु विजय और असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं। 10 साल की कन्या सुभद्रा होती है। सुभद्रा के पूजन से मनोरथ पूर्ण होते हैं और सुख मिलता है।
अष्टमी तिथि 26 मार्च
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च 2026 को सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। ऐसे में नवरात्र की अष्टमी तिथि का व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा।
नवमी तिथि 27 मार्च
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11:46 मिनट पर होगा। वहीं इस तिथि का अंत 27 मार्च 2026 को सुबह 10:07 मिनट पर होगा। ऐसे में नवरात्र की नवमी तिथि का व्रत 27 मार्च को रखा जाएगा।
इस तरह करें पूजन
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि कन्या पूजन के दिन घर आईं कन्याओं का सच्चे मन से स्वागत करना चाहिए। इससे देवी मां प्रसन्न होती हैं। इसके बाद स्वच्छ जल से उनके पैरों को धोना चाहिए। इससे भक्त के पापों का नाश होता है। इसके बाद सभी नौ कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। इससे भक्त की तरक्की होती है। पैर धोने के बाद कन्याओं को साफ आसन पर बैठाना चाहिए। अब सारी कन्याओं के माथे पर कुमकुम का टीका लगाना चाहिए और कलावा बांधना चाहिए। कन्याओं को भोजन कराने से पहले अन्य का पहला हिस्सा देवी मां को भेंट करें, िफर सारी कन्याओं को भोजन परोसे। वैसे तो मां दुर्गा को हलवा, चना और पूरी का भोग लगाया जाता है। लेकिन अगर आपका सामाथ्र्य नहीं है तो आप अपनी इच्छानुसार कन्याओं को भोजन कराएं। भोजन समाप्त होने पर कन्याओं को अपने सामथ्र्य अनुसार दक्षिणा अवश्य दें। क्योंकि दक्षिणा के बिना दान अधूरा रहता है।
विवाह में देरी
यदि शादी में देरी हो रही है तो पांच साल की कन्या को खाना खिलाकर। श्रृंगार का सामान भेंट करें।
धन संबंधी समस्या
पैसों की कमी से परेशान हैं तो चार साल की कन्या को खीर खिलाएं। इसके बाद पीले कपड़े और दक्षिणा दें।
शत्रु बाधा और काम में रुकावटें
नौ साल की तीन कन्याओं को भोजन सामग्री और कपड़ें दें।
पारिवारिक क्लेश
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि तीन और दस साल की कन्याओं को मिठाई दें।
बेरोजगारी
छह साल की कन्या को छाता और कपड़ें भेंट करें।
सभी समस्याओं का निवारण
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पांच से 10 साल की कन्याओं को भोजन सामग्री देकर दूध, पानी या फलों का रस भेंट करें। सौन्दर्य सामग्री भी दें।
- डा. अनीष व्यास
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक
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