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मूवी रिव्यू: डीसी:अभिनेता बने लोकेश कनगराज ने किया कमाल या फिल्म सिर्फ स्टाइल और एक्शन तक सिमटी? आइए जानते हैं।

हर खूबसूरत दिखने वाली फिल्म अच्छी हो, यह जरूरी नहीं। कुछ फिल्में अपने शानदार कैमरा वर्क, दमदार एक्शन और शानदार संगीत से शुरुआत में प्रभावित तो करती हैं, लेकिन जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनका जादू उतरने लगता है। डीसी भी ऐसी ही फिल्म है। यहां स्टाइल भरपूर है, हिंसा भरपूर है, लेकिन दिल को छू लेने वाली कहानी और किरदारों का भावनात्मक सफर कहीं पीछे छूट जाता है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 22 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? कहानी देवदास (लोकेश कनगराज) की है, जो अपराध की दुनिया का बड़ा नाम है और पुलिस से बचता फिर रहा है। एक हादसा उसकी जिंदगी बदल देता है और इसी दौरान उसकी मुलाकात चंद्रा (वामिका गब्बी) से होती है। चंद्रा बचपन से ही शोषण और हिंसा का शिकार रही है और अब उसकी जिंदगी में बचा ही क्या है, इसका जवाब वह खुद भी नहीं जानती। दो टूटे हुए लोग एक दूसरे का सहारा बनते हैं और फिर शुरू होती है खून, बदले और गोलियों से भरी लड़ाई। बीच में पार्वती (संजना कृष्णमूर्ति) की एंट्री होती है। शुरुआत में लगता है कि उनका किरदार कहानी की दिशा बदल देगा, लेकिन कुछ ही देर बाद वह सिर्फ एक अधूरी संभावना बनकर रह जाता है। पहला हिस्सा रहस्य और माहौल बनाने में सफल रहता है, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म एक ही तरह के एक्शन और हिंसा को बार बार दोहराती रहती है। गोलियां चलती रहती हैं, लोग मरते रहते हैं, लेकिन कहानी वहीं की वहीं खड़ी नजर आती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? मुख्य अभिनेता के तौर पर लोकेश कनगराज उम्मीद से बेहतर साबित होते हैं। अभिनय में अनुभव की कमी कहीं कहीं दिखती है, लेकिन किरदार को निभाने की उनकी ईमानदार कोशिश साफ नजर आती है। कम संवादों में भी वह चेहरे के भाव से असर छोड़ने की कोशिश करते हैं। वामिका गब्बी फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। दर्द, गुस्सा और बेबसी को उन्होंने बेहद सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है। उनका किरदार सबसे ज्यादा याद रह जाता है। संजना कृष्णमूर्ति को जितनी अहमियत के साथ पेश किया जाता है, पटकथा उन्हें उतना ही जल्दी भूल जाती है। बाकी कलाकार अपने हिस्से का काम ठीक करते हैं, लेकिन किसी को भी यादगार बनने का मौका नहीं मिलता। निर्देशन और तकनीकी पक्ष अरुण मथेश्वरन की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनका विजुअल ट्रीटमेंट रहा है और यहां भी वही नजर आता है। हर फ्रेम बेहद खूबसूरती से रचा गया है। लाल और नीले रंग का इस्तेमाल सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि किरदारों की मानसिक स्थिति दिखाने के लिए किया गया है। लेकिन निर्देशन वहीं कमजोर पड़ जाता है जहां कहानी को भावनाओं की जरूरत होती है। फिल्म लगातार यह बताती रहती है कि किरदार टूटे हुए हैं, लेकिन दर्शक कभी उनके दर्द से जुड़ नहीं पाता। दूसरे हिस्से में एक्शन इतना ज्यादा हो जाता है कि कुछ देर बाद उसका असर ही खत्म होने लगता है। कैमरा वर्क बेहतरीन है। कई दृश्य किसी पेंटिंग जैसे लगते हैं। प्रोडक्शन डिजाइन और लोकेशन फिल्म को अलग पहचान देते हैं। संपादन भी तेज है, लेकिन मजबूत पटकथा के बिना तकनीकी चमक ज्यादा देर तक काम नहीं आती। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। कई साधारण दृश्य भी उनके पृष्ठभूमि संगीत की वजह से बड़े और प्रभावशाली लगते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका संगीत अलग ही रोमांच पैदा करता है। अफसोस, पटकथा उस स्तर का साथ नहीं दे पाती। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? डीसी ऐसी फिल्म है जो आंखों को प्रभावित करती है, कानों को रोमांचित करती है, लेकिन दिल तक नहीं पहुंच पाती। लोकेश कनगराज अभिनय में अच्छी शुरुआत करते हैं, वामिका गब्बी शानदार काम करती हैं और अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत फिल्म को कई बार संभाल लेता है। लेकिन कमजोर पटकथा, दोहराव से भरा दूसरा हिस्सा और किरदारों से भावनात्मक दूरी इसे औसत अनुभव बनाकर छोड़ देती है। अगर आप सिर्फ स्टाइलिश एक्शन और शानदार विजुअल्स के लिए फिल्म देखना चाहते हैं तो शायद निराश नहीं होंगे। लेकिन मजबूत कहानी और यादगार भावनाओं की उम्मीद लेकर जाएंगे तो यह फिल्म अधूरी सी लगेगी।

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तरुण तेजपाल केस: फ़ैसले में सर्वाइवर के पक्ष में कही गईं ये तीन बातें

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फ़ैसले में सर्वाइवर के पक्ष में तीन महत्वपूर्ण बातें कही हैं. कोर्ट के फ़ैसले में कही गई ये बातें क़ानूनी तौर पर काफ़ी अहम हैं.

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  Sports

IRE vs AFG: राशिद खान ने अकेले उड़ा दिए 6 विकेट, 9 साल बाद हुआ ये कमाल, अफगानिस्तान की बड़ी जीत

ODI क्रिकेट में ये कोई पहली बार नहीं है जब राशिद खान ने एक पारी में 6 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं. उनसे ज्यादा बार ये कमाल सिर्फ पूर्व पाकिस्तानी पेसर वकार यूनुस ने किया है. Sat, 08 Aug 2026 01:52:36 +0530

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Hunter Biden: "Trump is the singular existential threat to this globe”. #BBCNews #tmktech #vivo #v29pro
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Pentagon releases a fresh batch of declassified UFO files. #BBCNews #tmktech #vivo #v29pro
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