दृश्यम 3 की रिलीज टली:2 अप्रैल की जगह अब 21 मई को आएगी मूवी, इसी दिन एक्टर मोहनलाल का बर्थडे
मलयालम एक्टर मोहनलाल की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'दृश्यम 3' की रिलीज डेट बदल गई है। जीतू जोसेफ के निर्देशन में बनी यह फिल्म अब 2 अप्रैल की जगह 21 मई, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। सोमवार शाम खुद मोहनलाल ने सोशल मीडिया पर इस खबर की पुष्टि की। खास बात यह है कि 21 मई को मोहनलाल का 66वां जन्मदिन भी है, ऐसे में मेकर्स ने इस दिन को फिल्म की रिलीज के लिए चुना है। हिंदी में दृश्यम फिल्म को अजय देवगन के साथ इसी नाम से रीमेक किया गया है, हालांकि इस बार मोहनलाल की फिल्म को ही हिंदी में रिलीज किया जाएगा। जन्मदिन पर 'जॉर्जकुट्टी' की वापसी मोहनलाल ने X (पहले ट्विटर) पर फिल्म का एक नया पोस्टर शेयर किया है। पोस्टर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, 'अतीत कभी चुप नहीं रहता... वह बस इंतजार करता है। जॉर्जकुट्टी आ रहा है, 21 मई, 2026 को।' दरअसल, फिल्म की रिलीज में देरी की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी। हालांकि फिल्म की शूटिंग पिछले साल दिसंबर में ही पूरी हो चुकी थी, लेकिन अब इसे सुपरस्टार के बर्थडे पर रिलीज कर यादगार बनाने की तैयारी है। खाड़ी में तनाव और अन्य फिल्मों का असर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की रिलीज टलने के पीछे खाड़ी देशों में चल रहा युद्ध और तनाव भी एक बड़ा कारण हो सकता है। मेकर्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। इसके अलावा, हाल के दिनों में यश की फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज भी जून तक के लिए टल चुकी है। 5 भाषाओं में पैन-इंडिया रिलीज होगी फिल्म 'दृश्यम' फ्रेंचाइज की शुरुआत साल 2013 में हुई थी, जो मलयालम सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इसका दूसरा पार्ट 2021 में आया था। हिंदी में इस फिल्म को अजय देवगन के साथ इसी नाम से रीमेक किया गया है, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। हालांकि, इस बार 'दृश्यम 3' में एक बड़ा ट्विस्ट है। डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने साफ किया है कि वे इस बार फिल्म को सीधे 5 भाषाओं में पैन-इंडिया रिलीज करेंगे, यानी मोहनलाल वाली 'दृश्यम 3' हिंदी में भी रिलीज होगी।
US-Israel-Iran War: मुजतबा खामेनेई ने ठुकराया शांति का प्रस्ताव; बोले- अमेरिका-इजरायल की हार तक समझौता नामुमकिन
Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका की ओर से आए शांति वार्ता के प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
28 फरवरी 2026 को अपने पिता अली खामेनेई की मृत्यु के बाद सत्ता की बागडोर संभालने वाले मुजतबा ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यह बातचीत का सही समय नहीं है।
ईरान के इस सख्त बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान के साथ किसी गुप्त समझौते या "डील" की ओर इशारा कर रहे थे।
मध्यस्थों के जरिए आए शांति प्रस्ताव का कड़ा खंडन
ईरान की ओर से आए ताजा बयानों के अनुसार, मुजतबा खामेनेई ने दो मध्यस्थ देशों के माध्यम से भेजे गए अमेरिकी प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि ईरान तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक दुश्मन सेना को पूरी तरह परास्त नहीं कर दिया जाता।
मुजतबा का मानना है कि वर्तमान स्थिति में युद्धविराम करना ईरान की कमजोरी माना जाएगा, इसलिए वे चाहते हैं कि अमेरिका और इजरायल पहले अपनी हार स्वीकार करें और युद्ध से हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दें।
उन्होंने अपनी पहली आधिकारिक विदेश नीति बैठक में यह संदेश दिया कि ईरान अब किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और वह अंतिम परिणाम तक लड़ने को तैयार है।
सुप्रीम लीडर की सार्वजनिक उपस्थिति पर गहराता सस्पेंस
मुजतबा खामेनेई के कड़े बयानों के बावजूद उनकी व्यक्तिगत स्थिति को लेकर दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां हैरान हैं। 9 मार्च को सुप्रीम लीडर घोषित किए जाने के बाद से मुजतबा एक बार भी कैमरे के सामने या किसी सार्वजनिक सभा में नजर नहीं आए हैं।
यहां तक कि ईरानी नववर्ष 'नौरोज' के अवसर पर भी उन्होंने अपना संदेश केवल लिखित रूप में टेलीग्राम के माध्यम से जारी किया। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायली मोसाद का अनुमान है कि 28 फरवरी के उन हमलों में मुजतबा को भी गंभीर चोटें आई थीं जिनमें उनके पिता की मौत हुई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, उनके पैरों में गंभीर चोट है जिसके कारण वे चलने या खड़े होने में असमर्थ हैं, और यही उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति का सबसे बड़ा कारण हो सकता है।
ट्रंप का पांच दिन का अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के बिजली संयंत्रों पर होने वाले हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया गया है क्योंकि कुछ "सम्मानित" ईरानी नेताओं के साथ उनकी उत्पादक बातचीत चल रही है।
ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी बातचीत मुजतबा खामेनेई से नहीं, बल्कि ईरान के किसी अन्य वरिष्ठ गुट से हो रही है, जो शायद युद्ध को खत्म करना चाहते हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें ट्रंप की एक राजनीतिक चाल बताया है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को कम कर सकें।
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