Explainer: कभी सोचा है नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और जिओ हॉटस्टार कैसे कमाते हैं पैसा? यहां पर जान लीजिए
How OTT Platforms Make Money: आज के समय में मनोरंजन का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. पहले जहां लोग टीवी पर तय समय पर अपने पसंदीदा शो या फिल्म का इंतजार करते थे, वहीं अब नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, जिओ हॉटस्टार, सोनी लिव, ज़ी5 और दूसरे OTT प्लेटफॉर्म्स ने मनोरंजन को पूरी तरह ऑन-डिमांड बना दिया है. अब दर्शक जब चाहें, जहां चाहें और जिस डिवाइस पर चाहें अपनी पसंद का कंटेंट देख सकते हैं.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये प्लेटफॉर्म आखिर पैसा कैसे कमाते हैं? क्या सिर्फ महीना या सालाना सब्सक्रिप्शन ही इनकी कमाई का जरिया है? अगर ऐसा सोचते हैं तो आप गलत हैं. दरअसल, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की कमाई के कई बड़े सोर्स होते हैं जिनकी वजह से ये कंपनियां हर साल हजारों करोड़ रुपये का कारोबार करती हैं. तो चलिए डिटेल में समझते हैं कि नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और जिओ हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का बिजनेस मॉडल कैसे काम करता है.
सब्सक्रिप्शन फीस
OTT प्लेटफॉर्म्स की कमाई का सबसे बड़ा सोर्स सब्सक्रिप्शन होता है. जब कोई यूजर नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो या जिओ हॉटस्टार का महीने क या सालाना प्लान खरीदता है, तो वो सीधे कंपनी की कमाई का हिस्सा बन जाता है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी प्लेटफॉर्म के 5 करोड़ पेड यूजर हैं और हर यूजर औसतन 200 रुपये प्रति महीना देता है, तो कंपनी हर महीने हजारों करोड़ रुपये की कमाई सिर्फ सब्सक्रिप्शन से कर सकती है. नेटफ्लिक्स का पूरा बिजनेस लंबे समय तक लगभग इसी मॉडल पर टिका रहा. वहीं प्राइम वीडियो और जिओ हॉटस्टार भी अपने प्रीमियम कंटेंट के लिए सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाते हैं.
ऐड से होती है मोटी कमाई
हर OTT प्लेटफॉर्म पूरी तरह ऐड फ्री नहीं होता. आज JioHotstar, Sony LIV, MX Player और कई अन्य प्लेटफॉर्म्स अपने फ्री या कम कीमत वाले प्लान में ऐड दिखाते हैं. जब लाखों लोग किसी पॉपुलर वेब सीरीज, क्रिकेट मैच या फिल्म को देखते हैं तो कंपनियां Advertisers से करोड़ों रुपये चार्ज करती हैं. क्रिकेट टूर्नामेंट जैसे IPL, ICC इवेंट्स या बड़े स्पोर्ट्स मुकाबलों के दौरान ऐड से होने वाली कमाई कई बार सब्सक्रिप्शन से भी ज्यादा हो जाती है. इसी वजह से कई OTT कंपनियां अब ऐड-सपोर्टेड प्लान्स यानी ऐड वाले सस्ते प्लान लॉन्च कर रही हैं.
फिल्मों और वेब सीरीज के एक्सक्लूसिव राइट्स
OTT प्लेटफॉर्म्स सिर्फ कंटेंट दिखाते ही नहीं, बल्कि उसके राइट्स खरीदते और बेचते भी हैं. कई बार किसी फिल्म के थिएटर रिलीज होने से पहले ही OTT प्लेटफॉर्म उसके डिजिटल राइट्स खरीद लेते हैं. मान लीजिए किसी फिल्म के OTT राइट्स 80 करोड़ रुपये में खरीदे गए. अगर उसी फिल्म की वजह से लाखों नए सब्सक्राइबर जुड़ जाते हैं, तो कंपनी अपनी लागत आसानी से निकाल लेती है. इसी तरह प्लेटफॉर्म्स अपने ओरिजिनल शो और फिल्मों के इंटरनेशनल राइट्स भी दूसरे देशों में बेचते हैं.
ओरिजिनल कंटेंट से बढ़ते हैं सब्सक्राइबर
नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और जिओ हॉटस्टार लगातार अपनी ओरिजिनल वेब सीरीज और फिल्में बनाते हैं. सेक्रेड गेम्स, मिर्जापुर, पंचायत, द फ़ैमिली मैन, फर्जी, असुर जैसे शो सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन ही नहीं करते, बल्कि नए सब्सक्राइबर जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया भी बनते हैं. अगर कोई वेब सीरीज सुपरहिट हो जाती है तो लाखों लोग सिर्फ उसी शो को देखने के लिए सब्सक्रिप्शन खरीद लेते हैं. यानी कंटेंट पर खर्च किया गया पैसा लंबे समय में कंपनी के लिए निवेश साबित होता है.
स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग है सोने की खान
भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स की कमाई का सबसे बड़ा हथियार लाइव स्पोर्ट्स बन चुका है. आईपीएल, क्रिकेट वर्ल्ड कप, चैंपियंस ट्रॉफी, प्रो कबड्डी, फुटबॉल लीग और दूसरे बड़े टूर्नामेंट्स के डिजिटल राइट्स हासिल करने के लिए कंपनियां हजारों करोड़ रुपये खर्च करती हैं. बदले में उन्हें- करोड़ों नए सब्सक्राइबर, ऐड से भारी कमाई, ब्रांड वैल्यू, लंबे समय तक दर्शकों की वफादारी जैसे कई फायदे मिलते हैं. यही वजह है कि स्पोर्ट्स राइट्स के लिए बड़ी कंपनियों के बीच कड़ा कम्पटीशन रहता है.
दूसरे बिजनेस को भी मिलता है फायदा
अमेजन प्राइम वीडियो
प्राइम वीडियो, अमेजन प्राइम मेम्बरशिप का हिस्सा है. जब कोई व्यक्ति प्राइम मेम्बरशिप लेता है तो उसे- प्राइम वीडियो, फ्री डिलीवरी
प्राइम म्यूजिक, शॉपिंग के फायदे सब कुछ एक साथ मिलता है. इससे अमेजन की ई-कॉमर्स बिक्री भी बढ़ती है.
जिओ हॉटस्टार
जिओ हॉटस्टार का फायदा सिर्फ OTT तक सीमित नहीं है. अगर कोई ग्राहक जिओ का डेटा प्लान लेता है, जिसमें OTT एक्सेस शामिल हो, तो इससे Jio के टेलीकॉम बिजनेस को भी फायदा मिलता है. यानी OTT कई कंपनियों के लिए पूरे बिजनेस इकोसिस्टम का हिस्सा होता है.
डेटा भी बनता है कमाई का जरिया
OTT प्लेटफॉर्म्स ये भी समझते हैं कि लोग क्या देखना पसंद करते हैं. वो ये जानकारी जुटाते हैं कि कौन-सी वेब सीरीज सबसे ज्यादा देखी जा रही है. लोग किस समय कंटेंट देखते हैं. किस भाषा का कंटेंट ज्यादा पॉपुलर है. कौन-सा जॉनर (कॉमेडी, थ्रिलर, रोमांस) ज्यादा पसंद किया जा रहा है. इस डेटा के आधार पर कंपनियां नया कंटेंट तैयार करती हैं और विज्ञापनदाताओं को बेहतर टारगेट ऑडियंस उपलब्ध कराती हैं. हालांकि, ये डेटा आम तौर पर गोपनीयता नीतियों और लागू नियमों के तहत उपयोग किया जाता है.
ब्रांड पार्टनरशिप और प्रोडक्ट प्लेसमेंट
OTT प्लेटफॉर्म्स की कमाई का एक और बड़ा जरिया ब्रांड इंटीग्रेशन है. कई वेब सीरीज और फिल्मों में आपको किसी मोबाइल, कार, ड्रिंक, कपड़ों या दूसरे प्रोडक्ट का इस्तेमाल दिखाई देता है. इसके लिए कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च करती हैं. इसे प्रोडक्ट प्लेसमेंट कहा जाता है. कई बार पूरी वेब सीरीज किसी बड़े ब्रांड के साथ मिलकर प्रमोट की जाती है.
FAQs
Q1. OTT प्लेटफॉर्म्स की कमाई का सबसे बड़ा जरिया क्या है?
A: पेड सब्सक्रिप्शन प्लान.
Q2. क्या OTT प्लेटफॉर्म्स विज्ञापनों से भी कमाई करते हैं?
A: हां, खासकर ऐड-सपोर्टेड प्लान्स और लाइव स्पोर्ट्स के जरिए.
Q3. OTT प्लेटफॉर्म्स फिल्मों के डिजिटल राइट्स क्यों खरीदते हैं?
A: नए सब्सक्राइबर जोड़ने और दर्शकों को एक्सक्लूसिव कंटेंट देने के लिए.
Q4. प्रोडक्ट प्लेसमेंट क्या होता है?
A: फिल्मों या वेब सीरीज में ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स को दिखाकर की जाने वाली प्रमोशनल मार्केटिंग.
सरकार ने खाद्य नियमों के उल्लंघन के मामले में कैटरर्स पर लगाए 5.13 करोड़ रुपए का जुर्माना; 6 कैटरिंग ठेके किए रद्द
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता से समझौता करने वाले कैटरिंग सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों के उल्लंघन के मामलों में कैटरर्स पर कुल 5.13 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है और 6 कैटरिंग ठेके रद्द किए गए हैं।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए गए हैं। इनमें 54 कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी करना और कई लाइसेंसधारकों को ब्लैकलिस्ट या डिबार करना शामिल है।
मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे हर वर्ष औसतन 58 करोड़ भोजन पैकेट यात्रियों को उपलब्ध कराता है। इसके मुकाबले भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों की संख्या बेहद कम है और यह कुल परोसे गए भोजन का मात्र 0.0008 प्रतिशत है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जिन लाइसेंसधारकों को डिबार किया गया है, उनकी सूची आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
रेल यात्रियों का भरोसा बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे और आईआरसीटीसी ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसके तहत रेलवे अधिकारियों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित तथा औचक निरीक्षण किए जाते हैं। इन निरीक्षणों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, कर्मचारियों की तैनाती, उपकरणों की स्थिति और नियामकीय मानकों के पालन की जांच की जाती है।
रेलवे ने आधुनिक बेस किचन के उपयोग को भी बढ़ावा दिया है और कई स्थानों पर नई अत्याधुनिक रसोइयां स्थापित की हैं। भोजन तैयार करने की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए बेस किचन में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि स्वच्छता मानकों की निगरानी के लिए फूड सेफ्टी सुपरवाइजर्स की नियुक्ति की गई है।
यात्रियों को अधिक जानकारी और पारदर्शिता उपलब्ध कराने के लिए रेलवे ने ट्रेनों में दिए जाने वाले भोजन पैकेटों पर क्यूआर कोड भी शुरू किए हैं। यात्री इस कोड को स्कैन करके भोजन की पैकिंग की तारीख, लाइसेंसधारी का नाम और एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा, रेलवे द्वारा ब्रांडेड कच्चे माल का उपयोग, भोजन के नमूनों की नियमित जांच, पेंट्री कार और रसोईघरों की गहन सफाई, कीट नियंत्रण अभियान, अनिवार्य एफएसएसएआई प्रमाणन, थर्ड-पार्टी ऑडिट और ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।
रेल मंत्री ने बताया कि आईआरसीटीसी समय-समय पर कैटरिंग कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है। इनमें ग्राहक सेवा, संवाद कौशल, व्यक्तिगत स्वच्छता और पेशेवर व्यवहार जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे यात्रियों को यात्रा के दौरान सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए लगातार आवश्यक कदम उठा रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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