सरकार ने खाद्य नियमों के उल्लंघन के मामले में कैटरर्स पर लगाए 5.13 करोड़ रुपए का जुर्माना; 6 कैटरिंग ठेके किए रद्द
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता से समझौता करने वाले कैटरिंग सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों के उल्लंघन के मामलों में कैटरर्स पर कुल 5.13 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है और 6 कैटरिंग ठेके रद्द किए गए हैं।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए गए हैं। इनमें 54 कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी करना और कई लाइसेंसधारकों को ब्लैकलिस्ट या डिबार करना शामिल है।
मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे हर वर्ष औसतन 58 करोड़ भोजन पैकेट यात्रियों को उपलब्ध कराता है। इसके मुकाबले भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों की संख्या बेहद कम है और यह कुल परोसे गए भोजन का मात्र 0.0008 प्रतिशत है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जिन लाइसेंसधारकों को डिबार किया गया है, उनकी सूची आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
रेल यात्रियों का भरोसा बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे और आईआरसीटीसी ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसके तहत रेलवे अधिकारियों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित तथा औचक निरीक्षण किए जाते हैं। इन निरीक्षणों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, कर्मचारियों की तैनाती, उपकरणों की स्थिति और नियामकीय मानकों के पालन की जांच की जाती है।
रेलवे ने आधुनिक बेस किचन के उपयोग को भी बढ़ावा दिया है और कई स्थानों पर नई अत्याधुनिक रसोइयां स्थापित की हैं। भोजन तैयार करने की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए बेस किचन में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि स्वच्छता मानकों की निगरानी के लिए फूड सेफ्टी सुपरवाइजर्स की नियुक्ति की गई है।
यात्रियों को अधिक जानकारी और पारदर्शिता उपलब्ध कराने के लिए रेलवे ने ट्रेनों में दिए जाने वाले भोजन पैकेटों पर क्यूआर कोड भी शुरू किए हैं। यात्री इस कोड को स्कैन करके भोजन की पैकिंग की तारीख, लाइसेंसधारी का नाम और एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा, रेलवे द्वारा ब्रांडेड कच्चे माल का उपयोग, भोजन के नमूनों की नियमित जांच, पेंट्री कार और रसोईघरों की गहन सफाई, कीट नियंत्रण अभियान, अनिवार्य एफएसएसएआई प्रमाणन, थर्ड-पार्टी ऑडिट और ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।
रेल मंत्री ने बताया कि आईआरसीटीसी समय-समय पर कैटरिंग कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है। इनमें ग्राहक सेवा, संवाद कौशल, व्यक्तिगत स्वच्छता और पेशेवर व्यवहार जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे यात्रियों को यात्रा के दौरान सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए लगातार आवश्यक कदम उठा रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गुजरात : 4 साल में 14925 सिकल सेल एनीमिया के मरीजों को 14.57 करोड़ से अधिक का मुफ्त इलाज
गांधीनगर, 7 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने पिछले चार वित्तीय वर्षों में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 14,925 से अधिक मरीजों को 14.57 करोड़ रुपए से ज्यादा की मुफ्त चिकित्सा सहायता प्रदान की है। राज्य सरकार विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में इस आनुवंशिक रक्त रोग की जल्द पहचान, उपचार और दीर्घकालिक देखभाल को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
जनजाति विकास विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 के दौरान राज्य की निःशुल्क चिकित्सा सहायता योजना के तहत यह आर्थिक सहायता दी गई है।
इस सहायता का उद्देश्य मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और इस दीर्घकालिक बीमारी के उपचार से जुड़े आर्थिक बोझ को कम करना है।
सरकार ने कहा कि वित्तीय सहायता के अलावा सिकल सेल एनीमिया पर नियंत्रण और मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए व्यापक स्वास्थ्य रणनीति भी अपनाई गई है।
आदिवासी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे बीमारी की समय पर पहचान हो सके। जिन मरीजों में सिकल सेल एनीमिया की पुष्टि हो जाती है, उन्हें नियमित दवाएं, निरंतर निगरानी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह उपलब्ध कराई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित करना है।
जिन मरीजों को उन्नत चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है, उनके लिए रेफरल प्रणाली और उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं को भी मजबूत किया गया है, ताकि उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
सरकार ने बताया कि यह पहल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के साथ समन्वय में संचालित की जा रही है।
विभाग ने कहा, राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम और उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग और जनजाति विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों को आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत तथा विस्तारित किया जाएगा।
गौरतलब है कि गुजरात में सिकल सेल एनीमिया का प्रभाव विशेष रूप से आदिवासी आबादी पर अधिक देखा जाता है। इसी कारण स्क्रीनिंग, समय पर पहचान और निरंतर उपचार राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के प्रमुख हिस्से बने हुए हैं, ताकि बीमारी से होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सके।
--आईएएनएस
एएमटी/पीएम
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