E20 Fuel विवाद: AAP का बड़ा ऐलान, 8 August से देशभर में शुरू होगा Nationwide Campaign
आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह ई20 ईंधन के खिलाफ आठ अगस्त से देशभर में टाउन हॉल (संवाद कार्यक्रम) की श्रृंखला शुरू करेगी। पार्टी का उद्देश्य वाहन मालिकों से बातचीत करना और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी समस्याओं पर लोगों की राय जानना है।
आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी ने इससे पहले दिल्ली में इस मुद्दे पर एक टाउन हॉल आयोजित किया था, जिसमें देशभर से करीब सात लाख लोगों ने ऑनलाइन भाग लिया था। उन्होंने कहा कि अब पार्टी इस अभियान को विभिन्न राज्यों में ले जाएगी और सार्वजनिक बैठकों के माध्यम से ई20 ईंधन (80 प्रतिशत पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत फसल-आधारित इथेनॉल) को लेकर लोगों की चिंताओं को समझने तथा इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने का काम करेगी। सिंह ने कहा कि आप की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज राष्ट्रव्यापी अभियान का समन्वय करेंगे।
पार्टी के अनुसार, यह अभियान आठ अगस्त को पश्चिम बंगाल में शुरू होगा, जिसके बाद नौ अगस्त को गुजरात और हरियाणा, 11 अगस्त को तेलंगाना और 17 अगस्त को छत्तीसगढ़ में कार्यक्रम होंगे। सिंह ने कहा कि इन सार्वजनिक बैठकों के दौरान पार्टी लोगों से ई20 ईंधन के खिलाफ उसके विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी करेगी। आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने ई20 ईंधन कार्यक्रम का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि इसे लोगों पर थोपा जा रहा है और इससे वाहनों के प्रदर्शन पर असर पड़ता है।
NHRC ने MP Government से मांगी रिपोर्ट, विदिशा में बेतवा नदी पार कर स्कूल जाते हैं छात्र
नयी दिल्ली, सात अगस्त राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने मध्यप्रदेश सरकार को उन खबरों के सिलसिले में एक नोटिस जारी किया है, जिनमें दावा किया गया है कि विदिशा जिले में कई विद्यार्थी स्कूल पहुंचने के लिए बेतवा नदी पार करते समय अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। आयोग ने एक बयान में कहा है कि उसने विदिशा जिले में स्कूल जाने के लिए बेतवा नदी पार करते समय ‘चेक डैम’ के खंभों पर कूदकर अपनी जान जोखिम में डालने वाले स्कूली विद्यार्थियों के बारे में मीडिया में आई एक खबर का स्वतः संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने कहा कि अगर यह खबर सच है, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है।
आयोग के मुताबिक, ये विद्यार्थी कथित तौर पर इस ‘‘खतरनाक रास्ते’’ का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इससे सड़क मार्ग की 13 किलोमीटर की दूरी घटकर सिर्फ 1.5 किलोमीटर रह जाती है। एनएचआरसी ने कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 21ए, छह से 14 साल की उम्र के बच्चों को सरकार की ओर से नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की गारंटी देता है। बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 भी छह से 14 साल की उम्र के हर बच्चे के लिए शिक्षा को एक अधिकार बनाता है।
इसके अलावा, आयोग ने उल्लेख किया कि उच्चतम न्यायालय ने अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ (2009) मामले में यह माना है कि शिक्षा के अधिकार में सुरक्षित स्कूल और सुरक्षित अवसंरचना का अधिकार भी शामिल है। आयोग ने कहा कि बच्चों के स्कूल पहुंचने के लिए सुरक्षित परिवहन का न होना ‘‘गरिमापूर्ण तरीके से शिक्षा पाने के उनके मूल अधिकार का उल्लंघन है।’’ इसी के तहत, आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बयान में कहा गया है कि चार अगस्त को मीडिया में आई एक खबर के अनुसार, खुले हुए ‘चेक डैम’ के खंभों के बीच बने चौड़े अंतराल को बच्चों के खतरनाक तरीके से कूदकर पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
बताया जाता है कि एक छात्रा अपनी वार्षिक परीक्षा में अनुतीर्ण हो गई, क्योंकि वह स्कूल नहीं जा सकी थी। छोटे कद की वजह से वह खंभों को पार नहीं कर सकी थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने उक्त स्थान का दौरा किया और कलेक्टर को इस समस्या के बारे में बताया।
हालांकि, आयोग ने कहा कि नदी पार करने के लिए सुरक्षित रास्ता बनाने की समय-सीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










