गर्भावस्था में कमजोरी, चक्कर और थकान? हो सकता है एनीमिया, जानें क्या करें
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं को कमजोरी, चक्कर आना, थकान और सांस फूलने जैसी समस्याएं होती हैं। अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो इसका कारण एनीमिया भी हो सकता है। एनीमिया (शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी) गर्भावस्था में मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। यह न केवल महिलाओं को रोजमर्रा के कामों में थकावट और कमजोरी महसूस कराता है, बल्कि बच्चे के विकास और वजन पर भी असर डाल सकता है।
एनीमिया के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन गर्भावस्था में यह सबसे ज्यादा आयरन की कमी के कारण होता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर और प्लेसेंटा के विकास के लिए अधिक लाल रक्त कोशिकाओं की जरूरत होती है, जिससे आयरन की मांग बढ़ जाती है। अगर महिलाओं की डाइट में पर्याप्त आयरन नहीं है या पहले से ही उनके शरीर में आयरन की कमी है, तो एनीमिया होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, लगातार प्रेग्नेंसी, छोटी अंतराल पर गर्भधारण और पर्याप्त एंटी-नेटल केयर न मिलने जैसी वजहें भी एनीमिया को बढ़ावा देती हैं।
एनीमिया के कुछ आम लक्षण हैं जैसे लगातार थकान, चक्कर आना, सांस फूलना, धड़कन तेज या अनियमित होना, त्वचा, होंठ और नाखूनों का पीला पड़ना, ठंडे हाथ-पैर, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन। अगर हीमोग्लोबिन लेवल 10.9 ग्राम/डीएल से कम हो, तो इसे गंभीर माना जाता है।
गर्भावस्था में एनीमिया से निपटने के लिए सबसे पहले सही खानपान बहुत जरूरी है। खाने में आयरन युक्त चीजें शामिल करें जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स, मूली के पत्ते या ड्रमस्टिक के पत्ते। इसके अलावा अमरूद, खजूर, आंवला और अंकुरित अनाज भी लाभकारी हैं। फोलिक एसिड युक्त चीजें जैसे गेहूं, बीन्स और संतरा भी डाइट में शामिल करें। सब्जियों में गाजर, चुकंदर, कच्चा केला और फलों में सेब, अंगूर, चीकू, केला और अनार को शामिल करना भी फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में भी एनीमिया के लिए कुछ असरदार दवाइयां हैं जैसे पुनर्नवादि मंडूर।
हालांकि अगर हीमोग्लोबिन 7 ग्राम/डीएल से कम हो या एक महीने तक सही उपचार के बाद भी बढ़ोतरी न हो या महिला में कोई ब्लीडिंग डिसऑर्डर हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। एनीमिया सिर्फ कमजोरी का कारण नहीं है, बल्कि मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पीएम मोदी राज्य सभा में रखेंगे पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भारत की रणनीति पर अपनी बात
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के विभिन्न पहलुओं और भारत की रणनीति के बारे में अपनी बात रखेंगे।
राज्यसभा में उनका संबोधन ऐसे समय में होगा, जब सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नियोजित सैन्य हमलों पर पांच दिन के विराम की घोषणा की। ट्रंप का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत चल रही है।
सोमवार को इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण देश के सामने आ रही चुनौतियों के बारे में जानकारी दी थी, जिसमें खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों पर पड़ने वाले प्रभाव और संकट के व्यापारिक और आर्थिक परिणामों के बारे में देश को बताया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, इस संघर्ष ने भारत के लिए अप्रत्याशित चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी और मानवीय हैं। भारत के युद्धग्रस्त देशों और उससे प्रभावित देशों के साथ व्यापक व्यापारिक संबंध हैं।
व्यापार पर संघर्ष के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह अन्य देशों के साथ हमारे व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी है। विशेष रूप से, हमारी कच्चे तेल और गैस की आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं।
संघर्ष से प्रभावित भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, प्रभावित देशों में प्रत्येक भारतीय को आवश्यक सहायता प्रदान की गई है। मैंने व्यक्तिगत रूप से दो दौर में अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है। उन सभी ने भारतीयों की पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशियाई देशों से 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से 1,000 लोग शामिल हैं और उन्होंने जरूरतमंदों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में स्थिति की समीक्षा की गई और मौजूदा तथा प्रस्तावित शमन उपायों पर चर्चा की गई।
--आईएएनएस
एसएके/वीसी
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