Technocraft Ventures IPO: सरकार के Water Infrastructure Mission से कितना मिलेगा फायदा? निवेश से पहले जानें पूरी जानकारी
Technocraft Ventures IPO: भारत इस समय वॉटर सप्लाई, सीवेज ट्रीटमेंट और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है. आने वाले सालों में इस सेक्टर में लाखों करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है. ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए लंबे समय तक ग्रोथ का बड़ा मौका बन सकता है. इसी बीच Technocraft Ventures अपना ₹251.88 करोड़ का IPO लेकर आ रही है. कंपनी मुख्य रूप से सरकार के लिए वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट्स, सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स और दूसरे अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर प्लांट्स पर काम करती है. कंपनी का IPO ₹201.51 करोड़ के फ्रेश इश्यू और ₹50.37 करोड़ के ऑफर फॉर सेल (OFS) का मिश्रण है. IPO के बाद कंपनी का अनुमानित मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹840 करोड़ होगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह केवल एक और इंफ्रास्ट्रक्चर IPO है, या फिर लंबे समय के लिए एक अच्छी इंवेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी बन सकता है?
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Technocraft Ventures क्या करती है?
जब भी किसी शहर में लोगों के घरों तक साफ पानी पहुंचता है या गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाता है, तो उसके पीछे एक पूरी इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम काम करता है. इस सिस्टम में अंडरग्राउंड पाइपलाइन्स, पंपिंग स्टेशन, सीवरेज नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स जैसी कई चीजें शामिल होती हैं. Technocraft Ventures इन्हीं प्रोजेक्ट्स को डिजाइन, बिल्ड और एग्जिक्यूट करने का काम करती है. कंपनी आम ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि लगभग पूरी तरह स्टेट गवर्नमेंट्स और गवर्नमेंट ऑथोरिटिज के लिए काम करती है. दिल्ली जल बोर्ड जैसी सरकारी एजेंसियां भी इसके ग्राहकों में शामिल हैं. कंपनी की लगभग पूरी आय गवर्नमेंट प्रोजेक्ट्स से आती है.
कंपनी की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
Technocraft की सबसे बड़ी खासियत इसकी माइक्रोटनलिंग टेक्नोलॉजी है. आसान भाषा में कहें तो अगर किसी शहर में नई अंडरग्राउंड पाइपलाइन डालनी हो, तो आमतौर पर पूरी सड़क खोदनी पड़ती है. लेकिन माइक्रोटनलिंग टेक्नोलॉजी की मदद से कम खुदाई में भी पाइपलाइन बिछाई जा सकती है. इससे ट्रैफिक कम प्रभावित होता है, काम तेजी से पूरा होता है और शहरों में परेशानी भी कम होती है. यही टेक्नोलॉजी कंपनी को कई दूसरे कॉम्पटीटर्स से अलग बनाती है. अब तक कंपनी 1,200 किलोमीटर से ज्यादा सीवर पाइपलाइन बिछा चुकी है और रोजाना 56 मिलियन लीटर सीवेज प्रोसेस करने की क्षमता वाले प्लांट्स बना चुकी है.
इस इंडस्ट्री में कितना बड़ी संभावना है?
भारत में वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर आने वाले सालों में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. FY27 से FY31 के बीच इस सेक्टर में ₹7.4 लाख करोड़ से ₹7.8 लाख करोड़ तक का निवेश होने का अनुमान है. जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission), अमृत AMRUT 2.0 और तेजी से बढ़ते अर्बनाइजेशन की वजह से वॉटर सप्लाई और सैनिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग लगातार बढ़ रही है. हालांकि, सिर्फ इंडस्ट्री का बढ़ना ही किसी कंपनी की सफलता की गारंटी नहीं देता. इस सेक्टर में कॉम्पिटिशन भी काफी ज्यादा है और ज्यादातर प्रोजेक्ट्स गवर्नमेंट टेंडर के जरिए मिलते हैं.
कंपनी की फाइनेंशियल पोजिशन कैसी है?
टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स की सबसे बड़ी मजबूती इसका मजबूत ऑर्डर बुक है. कंपनी के पास इस समय ₹1,235 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर बुक है, जो FY26 की रेवेन्यू का लगभग 3.5 गुना है. इसका मतलब है कि कंपनी के पास आने वाले कई वर्षों तक काम की अच्छी विजिबिलिटी मौजूद है. इसके अलावा पिछले दो सालों में कंपनी की रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है. कंपनी का ROE 26.5% और ROCE 27.7% है, जो बताता है कि मैनेजमेंट शेयरहोल्डर्स के पैसे का बेहतर इस्तेमाल कर रही है. लेकिन रिस्क भी कम नहीं हैं. हर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस की तरह Technocraft Ventures के सामने भी कुछ बड़े रिस्क हैं.
कंपनी की लगभग पूरी कमाई गवर्नमेंट प्रोजेक्ट्स से आती है. अगर किसी कारण गवर्नमेंट स्पेंडिंग धीमी पड़ती है या प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो इसका सीधा असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ सकता है. इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पहले काफी पैसा लगाना पड़ता है, जबकि गवर्नमेंट पेमेंट्स कई बार महीनों बाद मिलती हैं. ऐसे में वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ जाती है और कैश फ्लो पर दबाव आ सकता है. कंपनी के ऊपर बैंक गारंटी और प्रोजेक्ट एक्जिक्यूशन से जुड़े फाइनेंशियल कमिटमेंट्स भी हैं, जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए.
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वैल्यूएशन कैसी है?
अपर प्राइस बैंड पर Technocraft Ventures का P/E लगभग 19.38x और EV/EBITDA 12.7x है. यह वैल्यूएशन कई लिस्टेड पीयर्स के मुकाबले डिस्काउंट पर है. हालांकि इसका कारण भी साफ है. कंपनी का साइज अभी छोटा है, गवर्नमेंट प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता ज्यादा है और वर्किंग कैपिटल की जरूरत भी अधिक है. यानी कंपनी ग्रोथ दिखा रही है, लेकिन इसके साथ कुछ रिस्क भी जुड़े हुए हैं.
इंवेस्टर्स के लिए क्या मायने हैं?
टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स ऐसे सेक्टर में काम करती है, जहां आने वाले सालों में सरकारी खर्च मजबूत रहने की उम्मीद है. कंपनी के पास मजबूत ऑर्डर बुक, बेहतर काम पूरा करने की क्षमता और लगातार बढ़ता मुनाफा जैसे कई सकारात्मक पहलू हैं. हालांकि, गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट पर अधिक निर्भरता, कैश फ्लो का दबाव और वर्किंग कैपिटल की जरूरत जैसे रिस्क भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते.
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