थाईलैंड के पास 103 दिन का तेल भंडार, उपलब्धता निगरानी के लिए 'पंप रडार' ऐप किया लॉन्च
बैंकॉक, 23 मार्च (आईएएनएस)। थाई सरकार ने बताया कि देश के पास लगभग 103 दिन का पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नियामक उपायों को आगे बढ़ा रही है।
ऊर्जा व्यवसाय विभाग के महानिदेशक सरावुत केवतातिप ने रविवार को बताया कि थाईलैंड के पास कुल मिलाकर पर्याप्त तेल भंडार हैं, जो लगभग 103 दिनों तक चल सकता है। आपूर्ति स्तर सामान्य मांग से अधिक है।
वर्तमान में थाईलैंड प्रतिदिन लगभग 35.28 मिलियन लीटर गैसोलीन का उत्पादन करता है और दैनिक खपत 34.41 मिलियन लीटर के लगभग बराबर है।
डीजल के मामले में लगभग 79.91 मिलियन लीटर प्रतिदिन का उत्पादन है, जो प्रतिदिन औसतन 67 से 70 मिलियन लीटर की घरेलू मांग को पर्याप्त रूप से पूरा करता है।
कुछ क्षेत्रों में खपत में अचानक वृद्धि के कारण अस्थायी वितरण बाधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने देशभर में 24 घंटे ईंधन परिवहन की अनुमति दी है और वितरण को तेज किया है।
उन्होंने कहा कि स्थिति एक से दो सप्ताह में स्थिर होने की उम्मीद है, जबकि ईंधन परिवहन में अनियमितताओं की जांच की जा रही है। इस बीच, जमाखोरी और अनुचित मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए अधिकारियों ने निरीक्षण तेज कर दिए हैं।
आंतरिक व्यापार विभाग की उप महानिदेशक यानी श्रीमनी ने बताया कि देशभर में कुल 2,321 निरीक्षण किए गए हैं, जिनमें कुछ उल्लंघन पाए गए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा व्यवसाय विभाग ने निजी क्षेत्र के साथ मिलकर पंप रडार नामक एक ऐप लॉन्च किया है, जिससे लोग वास्तविक समय में ईंधन की उपलब्धता की निगरानी कर सकते हैं।
इससे पहले 19 मार्च को, थाईलैंड के प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने कहा था कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है। कच्चे तेल का आयात सामान्य रूप से जारी है। उत्पादन क्षमता और आउटपुट में कोई कमी नहीं आई है।
अनुतिन ने ये टिप्पणी मध्य पूर्व की स्थिति के लिए संयुक्त प्रबंधन और निगरानी केंद्र में आयोजित एक बैठक के दौरान की। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब खबरें आ रही हैं कि हाल के दिनों में पूरे थाईलैंड में लोग पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए लंबी कतारों में लगे दिखे।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
द ग्रेट एस्केप: सुरंग, साहस और सजा! द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फरारी की कहानी
नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। नाजी जर्मनी के कड़े सुरक्षा वाले युद्धबंदी शिविर स्टालाग लुफ्ट तृतीय से 70 से अधिक मित्र राष्ट्रों के सैनिकों का सुरंग बनाकर भाग निकलना इतिहास में द ग्रेट एस्केप के नाम से दर्ज है। 24 मार्च 1944 की रात हुई ये साधारण फरारी नहीं थी, बल्कि महीनों की गुप्त योजना, इंजीनियरिंग कौशल और असाधारण साहस का परिणाम थी।
इस अभियान के पीछे ब्रिटिश वायुसेना के अधिकारी रोजर बुशेल का दिमाग था, जिन्हें “बिग एक्स” कहा जाता था। उन्होंने एक साथ तीन सुरंगें—टॉम, डिक और हैरी—खोदने की योजना बनाई, ताकि अगर एक पकड़ी जाए तो दूसरी का इस्तेमाल किया जा सके। कैदियों ने बिस्तरों के तख्तों, खाने के डिब्बों और साधारण औजारों से लगभग 100 मीटर लंबी सुरंग बनाई, जिसमें हवा के लिए पाइप, रोशनी के लिए अस्थायी बिजली और मिट्टी छुपाने के जटिल तरीके अपनाए गए।
भागने में कुल 76 कैदी सफल हुए, लेकिन यह आजादी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। नाजी शासन का नेतृत्व कर रहे एडोल्फ हिटलर के आदेश पर पकड़े गए 50 कैदियों को बाद में गोली मार दी गई—जो युद्ध कानूनों का गंभीर उल्लंघन था और बाद में युद्ध अपराध माना गया।
इस घटना का सबसे विश्वसनीय विवरण पॉल ब्रिकहिल की किताब द ग्रेट एस्केप में मिलता है। ब्रिकहिल खुद भी उसी शिविर में कैदी थे। वे लिखते हैं कि यह फरारी सिर्फ भागने के लिए नहीं थी, बल्कि दुश्मन को यह दिखाने के लिए थी कि कैदियों का मनोबल नहीं टूटा है—यह आजादी से ज्यादा, प्रतिरोध का प्रतीक था।
इसी भावना को रोजर बुशेल के एक कथन में भी देखा जाता है, जो अक्सर उद्धृत किया जाता है—हमारा कर्तव्य सिर्फ भागना नहीं, बल्कि जितने अधिक जर्मन संसाधनों को इसमें उलझाना है, उतना ही युद्ध में योगदान देना है।
इस तरह “द ग्रेट एस्केप” सिर्फ एक साहसी कहानी नहीं, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मनोबल, रणनीति और प्रतिरोध की एक अनोखी मिसाल बन गई। जिस पर 1963 में एक फिल्म भी बनी और जबरदस्त कमाई भी की थी।
--आईएएनएस
केआर/
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