सतारा में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया। शिवसेना-एनसीपी गठबंधन के पास कागजों पर अधिक सदस्य थे, लेकिन क्रॉस-वोटिंग और अंतिम समय के घटनाक्रमों ने परिणाम बदल दिया। भाजपा उम्मीदवार प्रिया शिंदे ने एक निर्दलीय सदस्य के समर्थन से यह पद हासिल किया।
चुनाव के दौरान क्रॉस-वोटिंग
चुनाव में भ्रम और तनाव का माहौल था। खबरों के अनुसार, कुछ सदस्यों ने क्रॉस-वोटिंग की, जिससे भाजपा को जीत हासिल करने में मदद मिली। वहीं, मतदान केंद्र से अराजकता, विरोध प्रदर्शन और यहां तक कि हाथापाई की भी खबरें आईं। शिवसेना नेताओं ने दावा किया कि कुछ सदस्यों को वोट डालने से रोका गया, जिससे अंतिम परिणाम प्रभावित हुआ। विवाद को और बढ़ाते हुए, दो एनसीपी सदस्यों को कथित तौर पर वोट डालने जाते समय हिरासत में लिया गया।
गठबंधन में फूट
इस घटना ने महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन के भीतर दरारें उजागर कर दी हैं। शिवसेना के नेताओं ने स्थिति की खुलकर आलोचना की और पुलिस पर अनुचित कार्रवाई का आरोप लगाया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस घटना को "लोकतंत्र की हत्या" करार दिया और कहा कि किसी भी मतदाता को वोट डालने से नहीं रोका जाना चाहिए। मंत्रियों ने भी विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। चुनाव के दौरान पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिवसेना और एनसीपी के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने मंत्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया और मतदाताओं को रोकने की कोशिश की। राज्य विधान परिषद में सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी को निलंबित करने की मांग उठी। उपसभापति नीलम गोरहे ने सरकार को इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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