रूस में नहीं पहन सकते इस तरह के अंडरगार्मेंट्स ? जानिए क्या है वजह
दुनिया के अलग-अलग देशों में रोजमर्रा की चीजों को लेकर भी अलग-अलग नियम लागू होते हैं. कहीं च्युइंग गम पर प्रतिबंध है तो कहीं बच्चों से जुड़ी कुछ वस्तुओं की बिक्री पर रोक लगाई गई है. इसी तरह रूस, बेलारूस और कजाकिस्तान में भी कुछ खास मानकों पर खरे न उतरने वाले अंडरगार्मेंट्स की बिक्री प्रतिबंधित है. पहली नजर में यह नियम काफी अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे मुख्य वजह फैशन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और त्वचा की सुरक्षा से जुड़ी बताई जाती है.
क्या रूस में लेसी अंडरवियर पर बैन है?
साल 2013 में रूस, बेलारूस और कजाकिस्तान के बीच लागू किए गए नियमों को लेकर काफी चर्चा हुई थी. शुरुआत में खबरें सामने आईं कि इन देशों में लेस या सिंथेटिक कपड़े से बने अंडरगार्मेंट्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इससे यह धारणा बनी कि डिजाइनर या जालीदार अंडरवियर पूरी तरह प्रतिबंधित हैं.
हालांकि, बाद में यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई. नियम किसी खास डिजाइन या लेस वाले कपड़े पर सीधे प्रतिबंध नहीं लगाता. असल शर्त अंडरगार्मेंट्स की हाइग्रोस्कोपिसिटी, यानी नमी सोखने की क्षमता से जुड़ी है.
क्या है 6 फीसदी नमी सोखने का नियम?
सरल भाषा में समझें तो हाइग्रोस्कोपिसिटी यह बताती है कि कोई कपड़ा शरीर से निकलने वाली नमी या पसीने को कितनी मात्रा में सोख सकता है. संबंधित नियमों के तहत ऐसे अंडरगार्मेंट्स की बिक्री पर रोक है, जो निर्धारित न्यूनतम नमी सोखने के मानक को पूरा नहीं करते.
बताया गया है कि अंडरगार्मेंट्स में कम से कम 6 फीसदी हाइग्रोस्कोपिसिटी का मानक पूरा होना चाहिए. यानी अगर किसी कपड़े की नमी सोखने की क्षमता इस स्तर से कम है, तो वह निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा.
आखिर स्वास्थ्य से इसका क्या संबंध है?
शरीर के संपर्क में रहने वाले कपड़ों में नमी का जमा रहना असहजता पैदा कर सकता है. पसीना त्वचा पर लंबे समय तक बना रहे तो चिपचिपाहट, जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. नमी वाला वातावरण बैक्टीरिया के पनपने के लिए भी अनुकूल हो सकता है.
इसी वजह से ऐसे कपड़ों को प्राथमिकता देने की कोशिश की गई जो शरीर की नमी को कुछ हद तक सोख सकें और पहनने में अधिक आरामदायक हों.
क्या 100% सिंथेटिक अंडरवियर नहीं बिक सकता?
जरूरी नहीं कि हर सिंथेटिक अंडरगार्मेंट प्रतिबंधित हो. असल कसौटी उसका फैब्रिक और निर्धारित नमी सोखने का प्रदर्शन है. उदाहरण के लिए, पूरी तरह नायलॉन से बना कोई ऐसा कपड़ा जो नमी बहुत कम सोखता है, मानक पर खरा नहीं उतर सकता.
वहीं, कॉटन की लाइनिंग या नमी सोखने वाली दूसरी सामग्री वाला सिंथेटिक अंडरगार्मेंट आवश्यक मानक पूरा कर सकता है.
कौन से अंडरगार्मेंट्स बेचे जा सकते हैं?
कॉटन से बने अंडरवियर और ब्रा इस तरह के मानकों को पूरा करने में सामान्यतः सक्षम होते हैं. इसके अलावा कॉटन-पॉलिएस्टर या कॉटन-नायलॉन जैसे मिश्रित फैब्रिक से बने उत्पाद भी निर्धारित मानक पूरा करने पर बेचे जा सकते हैं.
खास बात यह है कि लेस वाली ब्रा या पैंटी पर भी स्वतः प्रतिबंध नहीं है. यदि उनमें ऐसी कॉटन लाइनिंग या गसेट मौजूद है, जो आवश्यक नमी सोखने का मानक पूरा करती है, तो उनकी बिक्री संभव है.
नियम का असली मकसद क्या है?
पूरे मामले को सिर्फ 'लेसी अंडरवियर पर बैन' कहना सही तस्वीर पेश नहीं करता. असल में नियम का केंद्र कपड़े का डिजाइन नहीं, बल्कि उसकी तकनीकी गुणवत्ता है. इसका उद्देश्य शरीर के सीधे संपर्क में आने वाले कपड़ों को स्वास्थ्य और आराम से जुड़े न्यूनतम मानकों के अनुरूप रखना है.
इसलिए रूस में अंडरगार्मेंट्स से जुड़ा यह नियम फैशन को नियंत्रित करने से ज्यादा कपड़े की नमी सोखने की क्षमता और उपभोक्ता स्वास्थ्य पर केंद्रित है.
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