Gold Silver Price Fall: भरभराकर गिरे सोने और चांदी के दाम, एक दिन में इतने हजार कम हो गई कीमत
Gold Silver Price Fall: सोना और चांदी दो ऐसी धातुएं हैं जो प्राचीन काल से ही लोगों की पसंद का जरिया रही हैं. हालांकि बीते कुछ वक्त में इसकी कीमतों में तेजी से उछाल देखने को मिला है. यही कारण है कि ये लगातार आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही थीं. लेकिन आपको बता दें कि जो लोग गोल्ड या सिल्वर खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए एक अच्छी सामने आई है. दरअसल एक ही दिन में गोल्ड की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. जी हां 10 हजार रुपए से ज्यादा प्रति तोला रेट कम हुए हैं. आइए जानते हैं कि 23 मार्च 2026 को क्या है 10 ग्राम सोने के ताजा दाम.
क्या है गोल्ड के 1 तोला का रेट
गोल्ड खरीदने वालों के लिए बता दें कि 23 मार्च 2026 को 24 कैरेट प्रति 10 ग्राम सोने के दाम 1,35,650 रुपए है. जबकि बीते दिन ये कीमत 1,45,970 रुपए प्रति 10 ग्राम थी. यानी एक दिन में 10,320 रुपए प्रति तोला कीमतों में कमी देखने को मिली है. जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट कही जा सकती है. वहीं 22 कैरेट गोल्ड की बात करें तो ये 1,24,350 रुपए प्रति 10 ग्राम बना हुआ है. वहीं अगर आप 18 कैरेट में गोल्ड खरीदते हैं तो आपको सिर्फ 101740 रुपए ही खर्च करना होंगे.
कैसे खरीदें सस्ता सोना?
सस्ता सोना खरीदना चाहते हैं तो आपको कैरेट यानी शुद्धता से थोड़ा समझौता करना होगा. दरअसल बीते कुछ वक्त में सोने की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं. बीते 6 महीने में ही गोल्ड के रेट में 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऐसे में जेवर आदि बनवाने के लिए आपको काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है. ऐसे में अगर आप कैरेट से समझौता करें यानी 22 की जगह 18 या फिर 16 कैरेट में गोल्ड के आभूषण बनवाएं तो आपको ज्यादा खर्च नहीं करना होगा. ऐसे में आप कम बजट में भी गोल्ड की खरीदारी कर सकते हैं. बता दें कि सरकार ने अब 9 कैरेट गोल्ड को भी बीएस मान्यता दे दी है.
क्या है सिल्वर के दाम
एक गोल्ड में रेट गिरे हैं तो दूसरी तरफ युद्ध के बीच चांदी की कीमतें भी भरभरा कर गिरी हैं. एक ही दिन में प्रति किलो चांदी पर 15000 रुपए की कमी दर्ज की गई है. यानी आपको बता दें कि सिर्फ सोमवार यानी 23 मार्च 2026 को सिल्वर 2,30000 पर पहुंच गई है. जो बीते दिन 2,45000 रुपए थी. बता दें कि 420000 के ऑल टाइम हाई के बाद ये सिल्वर में सर्वाधिक गिराटव मानी जा रही है. करीब-करीब चांदी में 2 लाख रुपए से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है.
(नोट- कीमतें गुड्स रिटर्न के माध्यम से ली गई हैं.)
डिस्क्लेमर:यह खबर केवल जानकारी देने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है. सोना-चांदी या किसी भी प्रकार के निवेश से जुड़ा फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें. बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है और कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहता है. इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी निवेश के लिए News Nation या लेखक जिम्मेदार नहीं होंगे. निवेश करने से पहले अपने स्तर पर पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी है.
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भारत के रणनीतिक भंडारों में 3.37 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद : केंद्र
नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि देश के रणनीतिक भंडारों में 3.37 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है, जो कि कुल स्टोरेज क्षमता का 64 प्रतिशत है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नामक एक विशेष इकाई के माध्यम से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन स्थानों पर 5.3 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) कच्चे तेल की कुल क्षमता वाली रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) सुविधाएं स्थापित की हैं, जो अल्पकालिक आपूर्ति संकटों के लिए बफर के रूप में कार्य कर सकती हैं।
मंत्री ने बताया कि तटीय क्षेत्रों में स्थित इन भंडारों में उपलब्ध कच्चे तेल की सटीक मात्रा बाजार की स्थितियों के आधार पर बदलती रहती है। वास्तविक भंडार एक गतिशील संख्या है जो स्टॉक और वास्तविक खपत पर निर्भर करती है और ये दोनों ही स्थिर नहीं हैं। वर्तमान में, आईएसपीआरएल के पास लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64 प्रतिशत है।
उन्होंने आगे बताया कि जुलाई 2021 में सरकार ने ओडिशा और कर्नाटक में कुल 6.5 मिलियन मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाली दो अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाओं की स्थापना को भी मंजूरी दी थी।
मंत्री ने आगे कहा कि कच्चे तेल की आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी एक क्षेत्र से कच्चे तेल पर निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र के तेल और गैस उद्यम (पीएसई), जो बोर्ड द्वारा संचालित संस्थाएं हैं, अपनी तकनीकी और व्यावसायिक आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न स्रोतों से कच्चा तेल प्राप्त करते हैं। वर्तमान में, ये पीएसई मध्य पूर्व के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं जैसे इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर के अलावा, अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, कोलंबिया, ब्राजील और मैक्सिको जैसे नए आपूर्तिकर्ताओं सहित 41 देशों से कच्चा तेल आयात करते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने के बाद, जिससे विश्व के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का होता है, भारत ने मध्य पूर्व के अलावा अन्य स्रोतों से अपने तेल और गैस आयात में विविधता लाई है। अब देश के तेल आयात का लगभग 70 प्रतिशत खाड़ी देशों के बाहर के देशों से आ रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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