कार में ये 5 फीचर्स नहीं हुए, तब भी चल जाएगा काम! ऐसे बचा सकते हैं लाखों रुपये
नई कार खरीदते समय सिर्फ फीचर्स की लिस्ट देखकर फैसला करना भारी पड़ सकता है. कई ऐसे फीचर्स हैं जो दिखने में प्रीमियम लगते हैं, लेकिन असल जिंदगी में काम के नहीं होते. ये आपकी जेब पर बोझ डालते हैं और ड्राइविंग को मुश्किल भी बना सकते हैं. जानिए कौन से 5 फीचर्स से दूर रहना चाहिए.
शंकराचार्य 2.18 लाख सैनिकों की 'चतुरंगिणी' सेना बनाएंगे:काशी में ऐलान, कहा- रोकेगी, टोकेगी फिर ठोक देगी
वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को चतुरंगिणी सेना बनाने का ऐलान किया। उन्होंने बताया- चतुरंगिणी सेना में 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक होंगे। इसमें देशभर से लोग भर्ती होंगे। उन्होंने बताया- यह सेना गोरक्षा, धर्म रक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा का कार्य करेगी। उनकी ड्रेस पीली होगी। हाथ में परशु (फरसा) होगा। अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना बनाने के लिए श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा का गठन किया है। इसका अध्यक्ष उन्होंने खुद को बनाया है। शंकराचार्य ने अपनी सेना के काम करने के तरीके बताए। उन्होंने कहा- पहले टोको, यानी टोकेंगे। कहो कि यह गलत हो रहा है। नहीं माने तो रोको। भाई, आपको रुकना पड़ेगा। नहीं तो फिर ठोको। ठोको का मतलब सीधे प्रहार करना नहीं है। मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना भी ठोको में आएगा। ये सभी संवैधानिक तरीके अपनाते हुए काम करेंगे। शंकराचार्य बोले- एक टीम में 10 लोग होंगे शंकराचार्य ने कहा- 1 पत्ती (टीम) में 10 लोग होंगे। 21 हजार 870 टीमें बनेंगी तो सेना तैयार हो जाएगी। भारत में अभी करीब 800 जिले हैं। अगर हर जिले में 27 टीमें, यानी 270 लोग तैयार हो गए, तो 2 लाख 16 हजार लोग तैयार हो जाएंगे। ‘धार्मिक परिसर में उसी धर्म के लोग जाएं, जिसे वे मानते हैं’ उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के मामले में शंकराचार्य ने कहा- मक्का-मदीना में 40 किलोमीटर पहले ही दूसरे धर्म के लोगों को रोक दिया जाता है। वह गलत नहीं है। ठीक है। वैसे ही हमारे भी धर्म स्थल हैं। हमें भी अपनी पवित्रता चाहिए। हमें भी अपने ढंग से पूजा-पाठ करना है। वहां दूसरा क्यों जाएगा। हमारे यहां परंपरा है कि धार्मिक परिसरों में उसी धर्म के लोग जा सकते हैं, जिसे वे मानते हैं। शंकराचार्य को चतुरंगिणी सेना बनाने की जरूरत क्यों पड़ी चतुरंगिणी का मतलब क्या है? चतुरंगिणी सेना का जिक्र प्राचीन भारत में है। महाभारत में भगवान कृष्ण की नारायणी सेना भी एक चतुरंगिणी सेना थी। यह चार मुख्य अंगों- हस्ती (हाथी), अश्व (घोड़े), रथ, और पदाति (पैदल सैनिक) से मिलकर बनती थी। शतरंज खेल का आधार भी इसी चतुरंगिणी सेना को माना जाता है। क्योंकि इस खेल में भी हाथी, घोड़े और पैदल सैनिक होते हैं। ---------------- शंकराचार्य से जुड़ी हुई ये खबर भी पढ़ें- लखनऊ में शंकराचार्य से मिले अखिलेश, बोले- नकली संत अब बेनकाब होंगे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से गुरुवार को मुलाकात की। एक घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान अखिलेश जमीन पर बैठे नजर आए। बाहर निकलने पर अखिलेश ने मीडियाकर्मियों से कहा- शंकराचार्य से मिलकर आ रहा हूं। उनके आशीर्वाद से अब नकली संतों का अंत होगा। अब वे लोग भी बेनकाब होंगे, जो धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं। सबका सच सामने आएगा। पढ़ें पूरी खबर
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