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रूस-पाक के लिए तो दे देंगे जान, खुद के मतलब के लिए सिर्फ 'अपना' है ईरान, Expert ने खोल दी चीन की स्ट्रैर्जी की पूरी पोल-पट्टी

जैसे-जैसे तेल की सप्लाई रुक रही है और मिसाइलें चल रही हैं, पूरी दुनिया के बाज़ारों में हड़कंप मच गया है। ऐसे मुश्किल वक्त में चीन ने बीच-बचाव करने के बजाय खुद को दूर रखना ही बेहतर समझा है। इससे यह साफ़ हो गया है कि चीन केवल मतलब का यार है। यूके चाइना ट्रांसपेरेंसी के ट्रस्टी हावर्ड झांग ने इस स्थिति को बड़ी गहराई से समझाया है। उनका कहना है चीन और ईरान भले ही एक-दूसरे को 'रणनीतिक साझेदार' कहें, लेकिन अब तक बीजिंग ने ईरान को सिर्फ बातों की हमदर्दी दी है। वह मीडिया में ईरान का पक्ष ले रहा है और शांति की अपील कर रहा है। लेकिन, चीन ने न तो ईरान को सुरक्षा की कोई गारंटी दी है और न ही कोई सैन्य मदद। वह ऐसी कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं ले रहा जिससे वह सीधे तौर पर ईरान के खेमे में खड़ा दिखाई दे। झांग आगे कहते बताते हैं कि चीन की ये साझेदारियां दिखावे के लिए तो ठीक हैं, लेकिन बराबरी की नहीं हैं।

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गौरतलब है कि जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, टकराव और तेज होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ़ कहा है कि अगर ईरान ने 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' का रास्ता नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को पूरी तरह तबाह कर देगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उन पर हमला हुआ, तो वे पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और इजरायल के तेल और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाएंगे। इसका असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। महत्वपूर्ण तेल गलियारे के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण, कच्चे तेल की कीमतों में इस वर्ष 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि अमेरिकी गैस की कीमतों में भी तेजी से उछाल आया है, जिससे ट्रंप पर दबाव और बढ़ गया है क्योंकि युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इसी बीच, इज़राइल ने लेबनान में अपने अभियान तेज़ कर दिए हैं और लिटानी नदी पर बने क़स्मिया पुल को नष्ट कर दिया है, जो दक्षिण और देश के बाकी हिस्सों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पुल था। लेबनानी अधिकारियों ने इसे ज़मीनी आक्रमण की संभावित शुरुआत बताया, जबकि इज़राइली कमांडरों ने हिज़्बुल्लाह के खिलाफ एक लंबे अभियान का संकेत दिया। 

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झांग का मानना है कि चीन का यह बर्ताव कोई गलती नहीं बल्कि उसकी सोची-समझी रणनीति है। वे कहते हैं कि  चीन पश्चिमी देशों की तरह कोई 'गठबंधन' नहीं चलाता। वह संधियों या एक-दूसरे की रक्षा करने वाले कड़े शब्दों के बजाय 'साझेदारी' जैसे नरम शब्दों का इस्तेमाल करना पसंद करता है। इसे समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप इसे दोस्ती नहीं, बल्कि एक 'सीढ़ी' की तरह देखें, जहाँ हर देश का दर्जा अलग है। इस ढांचे के बिल्कुल केंद्र में है, यानी सबसे खास। पाकिस्तान को सुरक्षा के मामले में एक विशेषाधिकार वाला दर्जा मिला हुआ है। झांग लिखते हैं कि पाकिस्तान चीन के लिए "इतना काम का और भौगोलिक रूप से इतना जरूरी है कि उसे सिर्फ एक आम दोस्त देश नहीं माना जा सकता।

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यहां तक ​​कि जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान उत्पन्न किया, जिससे होकर चीन के तेल आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है, तब भी बीजिंग ने संयम बरतने की अपीलों तक ही अपनी प्रतिक्रिया सीमित रखी, जिससे उसकी यह सोच तुरंत पुष्ट हो गई। झांग इसे एक ही नियम में समेटते हैं: सवाल यह नहीं है कि चीन किसी दूसरे देश को साझेदार कहता है या नहीं... बल्कि अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चीन की साझेदारियों की श्रेणी में वह देश किस स्थान पर है, और बीजिंग वास्तव में उसकी ओर से कितना जोखिम उठाने को तैयार है।

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America Security Shield | आसमान से चेतावनी, जमीन से जवाब: कैसे काम करता है अमेरिका का अरबों डॉलर का 'सुरक्षा कवच' | SBIRS Satellite Technology

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने न केवल खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे को हिला कर रख दिया है, बल्कि क्षेत्र में तैनात अमेरिका की अत्याधुनिक रडार प्रणालियों को भी निशाना बनाया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेना 'इनकमिंग मिसाइल' का पता कैसे लगाती है और ड्रोन को रोकना क्यों चुनौती बना हुआ है।

यह खबर पीटीआई भाषा द्वारा प्रसारित की गयी है लेखक ने बस मामूली शाब्दिक और व्याकरण से संबंधित बदलाव किए हैं-

अंतरिक्ष से पहली नजर: इन्फ्रारेड उपग्रह

किसी भी मिसाइल हमले का पता लगाने का सबसे तेज जरिया जमीन पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में है। अमेरिका की SBIRS (Space-Based Infrared System) जैसी प्रणालियां पृथ्वी की चौबीसों घंटे निगरानी करती हैं।

गर्मी की पहचान: जब कोई बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च होती है, तो उसके बूस्टर इंजन से अत्यधिक गर्मी निकलती है। अंतरिक्ष में मौजूद संवेदनशील इन्फ्रारेड सेंसर इस 'हीट सिग्नेचर' को तुरंत पकड़ लेते हैं।

त्वरित चेतावनी: लॉन्च के कुछ ही सेकंड के भीतर डेटा 'ज्वाइंट टैक्टिकल ग्राउंड स्टेशन' को भेजा जाता है, जिससे सैनिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने या डिफेंस सिस्टम सक्रिय करने के लिए कीमती समय मिल जाता है। 

अमेरिका और उसके सहयोगियों ने एक बहुस्तरीय प्रणाली विकसित की है, जो दिन-रात आसमान पर नजर रखती है। इस प्रणाली में अंतरिक्ष में उपग्रह, जमीन पर रडार, समुद्र में तैनात युद्धपोत और हवा में उड़ान भरने वाले विमान शामिल हैं। इसके साथ ही अमेरिकी अंतरिक्ष कमान के प्रशिक्षित सैन्य अधिकारी इनसे मिले डेटा के आधार पर तुरंत फैसले लेते हैं। अमेरिकी वायु सेना के पूर्व अधिकारी और अब मिसिसिपी विश्वविद्यालय में एयरोस्पेस और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रोफेसर के रूप में मैंने उन विशाल गठबंधनों और प्रणालियों के नेटवर्क का अध्ययन किया है जो इसे संभव बनाते हैं। मिसाइल का पता लगाने का सबसे तेज तरीका अंतरिक्ष से निगरानी है।

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अमेरिका के उन्नत उपग्रह, जैसे अंतरिक्ष आधारित इंफ्रारेड प्रणाली, पृथ्वी के ऊपर से लगातार निगरानी करते हैं। मिसाइल रक्षा के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले ये अरबों डॉलर के उपग्रह, मिसाइल प्रक्षेपण से निकलने वाली तीव्र गर्मी को लगभग तुरंत ही पहचान सकते हैं। जब कोई मिसाइल दागी जाती है, तो उससे निकलने वाली तेज गर्मी अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है। उपग्रह अपने इंफ्रारेड सेंसर से इस गर्मी को पहचान लेते हैं और कुछ ही सेकंड में चेतावनी भेज दी जाती है। यह शुरुआती चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे जमीन या समुद्र पर मौजूद सेना को तैयारी का समय मिल जाता है।

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यह संकेत बाद में जमीन पर मौजूद ‘ज्वाइंट टैक्टिकल ग्राउंड स्टेशन’ तक पहुंचता है, जहां से इसे पूरे रक्षा नेटवर्क में तेजी से साझा किया जाता है। रडार से मिसाइल की पूरी उड़ान पर नजर : उपग्रह सिर्फ शुरुआत में मदद करते हैं, इसके बाद जमीन आधारित रडार मिसाइल पर नजर रखते हैं। मिसाइल छोड़े जाने के बाद जमीन पर स्थित रडार शुरुआती उपग्रह संकेत के बाद स्थिति संभालते हैं।रडार रेडियो तरंगें भेजते हैं, जो किसी वस्तु (जैसे मिसाइल) से टकराकर वापस आती हैं। इससे पता चलता है कि मिसाइल कहां है और किस दिशा में जा रही है।

अमेरिका छोटी और लंबी दोनों दूरी के रडार का इस्तेमाल करता है: लंबी दूरी का रडार (एन/एफपीएस-132) लगभग 4,800 किमी दूर तक देख सकता है। एक अन्य अहम रडार एनएन/टीपीवाई-2 करीब 3,200 किमी की दूरी तक अधिक सटीक जानकारी देता है। टीपीवाई-2 रडार आमतौर पर मिसाइल को मार गिराने वाले हथियारों के पास ही लगाए जाते हैं, ताकि जानकारी तुरंत इस्तेमाल हो सके। कुल मिलाकर उपग्रह मिसाइल के प्रक्षेपण को पकड़ते हैं और रडार उसकी पूरी उड़ान पर नजर रखते हैं। हालांकि, ईरानी बलों ने हाल ही में जॉर्डन और कतर में तैनात इन महत्वपूर्ण रडार प्रणालियों को निशाना बनाया।

ये प्रणालियां बहुत महंगी हैं और इन्हें जल्दी बदलना आसान नहीं है। इसके कारण अमेरिका को एक अतिरिक्त टीपीवाई-2 मिसाइल को कोरिया से हटाकर पश्चिम एशिया में तैनात करना पड़ा है। हालांकि, इससे अमेरिकी निगरानी प्रणाली कमजोर जरूर हुई है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिका के पास अन्य रडार भी हैं, जैसे ब्रिटेन में मौजूद प्रणाली, जो मदद कर सकते हैं। अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर एजिस कॉम्बैट सिस्टम (एएन/एसपीवाई-1 रडार) लगे होते हैं, जो करीब 322 किलोमीटर तक निगरानी कर सकते हैं। जहाज जरूरत के हिसाब से खतरे वाले क्षेत्रों के पास जा सकते हैं। ड्रोन पकड़ना क्यों मुश्किल है? ईरान से आ रही मिसाइलों की तुलना में ड्रोन को पकड़ना और नष्ट करना ज्यादा कठिन साबित हो रहा है।

इसका कारण यह है कि मिसाइलें तेज और ज्यादा गर्म होती हैं, इसलिए आसानी से पकड़ी जाती हैं। शाहिद प्रणाली जैसे ईरान के ड्रोन अलग हैं। वे कम गर्मी छोड़ते हैं, जिससे इंफ्रारेड सेंसर उन्हें जल्दी से पकड़ नहीं पाते हैं। कई ड्रोन छोटे होते हैं और जमीन के पास उड़ते हैं जिससे उन्हें रडार पर देख पाना मुश्किल होता है। कुछ फाइबर या प्लास्टिक से बने होते हैं, जो रडार में कम दिखते हैं। कई ड्रोन जीपीएस प्रणाली से चलते हैं और रेडियो सिग्नल नहीं छोड़ते। इससे उनकी पहचान और उन पर नजर रखना कठिन हो जाता है। कई तकनीकों का संयुक्त उपयोग : ड्रोन से निपटने के लिए एक ही तकनीक काफी नहीं है।

अमेरिका कई तरीकों का एक साथ इस्तेमाल करता है। इसके अलावा, नयी तकनीकों पर भी काम चल रहा है, जैसे: ध्वनि सेंसर, जो ड्रोन की आवाज से उन्हें पहचान सकते हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी लगातार अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत कर रहे हैं। उदाहरण के लिए अमेरिका यूक्रेन से ध्वनिक सेंसर खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है, जो ड्रोन के आने की आवाज सुन सकते हैं, भले ही उन्हें अन्य तरीकों से देखा न जा सके। नए सेंसर, बेहतर सॉफ्टवेयर और तेज संचार से रक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाने में मदद मिलेगी। लक्ष्य साफ है: खतरों का जल्द पता लगाना, तेजी से प्रतिक्रिया देना और लक्ष्य को तेजी से भेदना।

News Source- Press Trust OF India

यह खबर पीटीआई भाषा द्वारा प्रसारित की गयी है लेखक ने बस मामूली शाब्दिक और व्याकरण से संबंधित बदलाव किए हैं-

 

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  Sports

IPL 2026: सरफराज खान के बेटे के साथ मस्ती करते दिखे एमएस धोनी, वीडियो हो रहा वायरल

आईपीएल 2026 के शुरू होने से पहले एक बार फिर चेन्नई सुपर किंग्स के दिग्गज खिलाड़ी एमएस धोनी के संन्यास को लेकर चर्चा फिर से तेज हैं। उन्होंने भले ही 6 साल पहले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो लेकिन वो आज भी आईपीएल में एक्टिव हैं। पूर्व क्रिकेटर्स के अनुसार धोनी का पीली जर्सी में ये आखिरी सीजन हो सकता है। चेन्नई  सुपर किंग्स ने रविवार को चेपॉक में एक इवेंट का आयोजन किया जिसमें टीम के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर भी शामिल हुए। इस दौरान धोनी का एक वीडियो सामने आया जिसमें वह सरफराज खान के बेटे के साथ मस्ती करते हुए दिख रहे हैं। 

बता दें कि, इस इवेंट के दौरान अपने पुराने साथियों से मिलकर एमएस धोनी काफी खुश दिखे। धोनी का ड्रेसिंग रूम के अंदर का एक वीडियो सामने आया। जहां वह सरफराज खान के बेटे के साथ मस्ती करते दिखे। धोनी सरफराज के बेटे को अपनी गोद में लिए हुए थे और अपने दाएं हाथ में मौजूद टेनिस बॉल को बच्चे से निकालने के लिए कह रहे थे। बच्चे ने उनके हाथ से गेंद को निकाला और सामने फेंक दिया। धोनी बच्चे को ऊपर उठाने की कोशिश कर रहे थे।

फिलहाल, आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी ऋतुराज गायकवाड़ के हाथों में होगी। वहीं सीएसके राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 30 मार्च से अपने अभियान की शुरुआत करेगा। जबकि उनका पहला घरेलू मैच 3 अप्रैल को पंजाब किंग्स के खिलाफ होगा। सीएसके लीग की सबसे लोकप्रिय फ्रेंचाइजी में से एक है जो पांच बार चैंपियन बन चुकी है। 

Mon, 23 Mar 2026 13:04:33 +0530

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