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Shaheed Diwas 2026 | 'भारत माता के वीर सपूतों का बलिदान सदैव प्रेरित करेगा', PM Modi ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को किया नमन

आज पूरा देश 'शहीद दिवस' के अवसर पर उन महान क्रांतिकारियों को याद कर रहा है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि राष्ट्र उनके साहस के आगे नतमस्तक है।

PM मोदी का संदेश: "अमिट है उनका बलिदान"

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर राष्ट्र के नाम एक प्रेरक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा: "आज, हम भारत माता के वीर सपूतों - भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। राष्ट्र के लिए उनका बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में हमेशा के लिए अंकित है। कम उम्र में ही, उन्होंने असाधारण साहस और भारत की स्वतंत्रता के प्रति अटूट समर्पण दिखाया। न्याय और देशभक्ति के उनके आदर्श आज भी करोड़ों भारतीयों के मन में जोश भरते हैं।" 

शहीद दिवस क्यों मनाया जाता है?

शहीद दिवस, जो हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है, उस दिन की याद दिलाता है जब 1931 में अंग्रेजों द्वारा इन तीनों क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। तब से, उनका बलिदान भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया है। इस दिन को पूरे देश में श्रद्धांजलि सभाओं, कार्यक्रमों और आयोजनों के साथ याद किया जाता है, जो उनके योगदान का सम्मान करते हैं और उनकी विरासत को जीवित रखते हैं।

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उनकी सफलता के पीछे की कहानी

उनकी फांसी तक ले जाने वाली घटनाओं की शुरुआत 1928 में हुई, जब साइमन कमीशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। लाहौर में ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हो गए और बाद में उनका निधन हो गया। इस घटना ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहरा आघात पहुँचाया। इसके जवाब में, उन्होंने इस हमले के लिए जिम्मेदार एक ब्रिटिश अधिकारी को निशाना बनाने की योजना बनाई। हालाँकि, गलती से उन्होंने एक दूसरे अधिकारी, जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी।

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1929 में, भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर, ब्रिटिश कानूनों के विरोध में दिल्ली स्थित केंद्रीय विधान सभा में एक प्रतीकात्मक बम धमाका भी किया था। इस कृत्य का उद्देश्य एक सशक्त संदेश देना था, न कि किसी को नुकसान पहुँचाना। 23 मार्च, 1931 को उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर जेल में फाँसी दे दी गई।

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Smriti Irani Birthday: कभी धोए बर्तन, आज Modi Cabinet की पावरफुल मंत्री, जानिए संघर्ष का सफर

आज के समय में स्मृति ईरानी राजनीतिक जगत का एक चर्चित नाम हैं। आज यानी की 23 मार्च को स्मृति ईरानी अपना 50वां जन्मदिन मना रही हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक अभिनेत्री के रूप में जानी जाती थीं, जिनके अभिनय की कला घर-घर में गूंजती थी। एक दौर ऐसा भी था कि जब पैसों की तंगी के कारण स्मृति ने होटल में वेट्रेस तक का काम किया था। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर स्मृति ईरानी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

बता दें कि 23 मार्च 1976 को स्मृति ईरानी का जन्म हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पिता कुरियर की कंपनी चलाते थे। साल 1998 में स्मृति ने अपनी किस्मत आजमाई और मुंबई में मिस इंडिया का ऑडिशन दिया। जिसमें वह सिलेक्ट हो गईं। फिर वह फाइनल तक पहुंची, लेकिन वह जीतने में कामयाब नहीं हो सकीं। एक समय पर उन्होंने पैसों के लिए बर्तन तक धोए और होटल में वेट्रेस का भी काम किया था। साल 2001 में स्मृति की शादी जुबिन ईरानी से हुई।

एक्टिंग करियर

साल 1998 में स्मृति ईरानी पहली बार गायक मीका सिंह के एल्बम 'सावन में लग गई आग' में नजर आई थीं। साल 2000 में स्मृति ने अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत 'आतिश' और 'हम हैं कल आज और कल' से की। इसके साथ ही स्मृति ने डीडी मेट्रो पर 'कविता' में भी अभिनय किया था। साल 2000 में उनको एकता कपूर के प्रोडक्शन में एक धारावाहिक मिला, जिसका नाम 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' था।

इस सीरियल ने स्मृति ईरानी की किस्मत बदलकर रख दी थी। वह इस सीरियल में स्मृति ने तुलसी वीरानी का किरदार निभाया था। फिर साल 2008 में स्मृति ईरानी, साक्षी तंवर के साथ मिलकर 9X पर रियलिटी शो में नजर आई। साल 2009 में उन्होंने कॉमेडी शो 'मणिबेन डॉट कॉम' में काम किया और साल 2012 में बंगाली फिल्म 'अमृता' में भी नजर आईं।

सियासी सफर

स्मृति ईरानी ने सिर्फ अभिनय जगत में बल्कि राजनीतिक जगत में कई रिकॉर्ड्स हासिल किए। साल 2019 में स्मृति ईरानी ने अमेठी से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शिकस्त दी थी। एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में महिला बाल विकास मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।

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  Sports

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राजस्थान रॉयल्स की कुल मार्केट वैल्यूएशन अब लगभग 15,301 करोड़ रुपये ($1.8 Billion approx) आंकी गई है. इस कुल वैल्यूएशन का 3 प्रतिशत हिस्सा शेन वॉर्न के पास है यानि वॉर्न की हिस्सेदारी (3%): ₹459.03 करोड़ (लगभग 460 करोड़ रुपये) है. ये राशि शेन वॉर्न के परिवार को मिलेगी जो बताती है कि ये महान लेग स्पिनर कितना दूरदर्शी था.  Wed, 25 Mar 2026 19:48:19 +0530

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