Jammu and Kashmir के सांबा में एक मकान के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में विस्फोट,कोई हताहत नहीं
जम्मू कश्मीर के सांबा जिले के एक गांव में रविवार देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में विस्फोट हुआ। अधिकारियों ने बताया कि यह विस्फोट अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 10 किलोमीटर दूर घगवाल सेक्टर में स्थित गावाला तालाब में पूर्व सरपंच जय राम शर्मा के आवास के मुख्य द्वार के समीप देर रात करीब दो बजे हुआ।
उन्होंने बताया कि विस्फोट से मुख्य द्वार और चारदीवारी का एक हिस्सा ढह गया, इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और घटनास्थल से नमूने लिए। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। मामले की जांच जारी है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई
धमाके की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुँच गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
फॉरेंसिक जांच: फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम ने सोमवार सुबह घटनास्थल का दौरा किया और साक्ष्यों के नमूने एकत्र किए ताकि विस्फोट की प्रकृति (विस्फोटक का प्रकार) का पता लगाया जा सके।
एफआईआर दर्ज: पुलिस ने इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी: जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद घटनास्थल पर मौजूद हैं और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।
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सुरक्षा को लेकर चिंता
सीमावर्ती जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के इतने करीब विस्फोट होना सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी चुनौती माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह आतंकी हमला था या इसके पीछे कोई और कारण। पुलिस सभी पहलुओं से मामले की गहनता से जांच कर रही है।
US-Iran Conflict Update | पश्चिम एशिया महायुद्ध और बढ़ा! Donald Trump का 48 घंटे का अल्टीमेटम और ईरान की 'टोटल शटडाउन' की धमकी | Strait of Hormuz
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, और स्थिति 'आर-पार' की जंग में बदलती दिख रही है। रविवार को दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को नष्ट करने की सीधी धमकी दी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर काले बादल मंडरा रहे हैं।
ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका अपने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिजली संयंत्रों पर हमले की धमकी पर अमल करता है, तो तेल और अन्य निर्यात के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल ‘‘पूरी तरह से बंद’’ कर दिया जाएगा। ट्रंप ने शनिवार देर रात ईरान को जलडमरूमध्य को खोलने के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी थी।
ईरान ने इजराइल के एक गुप्त परमाणु अनुसंधान स्थल पर मिसाइल हमला किया और इस हमले में आस पास के स्थानों पर रहने वाले लोग बड़ी संख्या में घायल हुए, जिसके बाद इजराइल के नेताओं ने वहां जा कर लोगों से मुलाकात की और उनका हाल चाल जाना। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमले में किसी की जान नहीं गई और यह एक चमत्कार है।
नेतन्याहू ने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका अपने युद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन लक्ष्यों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और सशस्त्र समर्थन को कमजोर करना तथा ईरान की जनता को धार्मिक शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने में सक्षम बनाना शामिल है। इजराइल की मंशा के विपरीत ईरान में न तो किसी विद्रोह का कोई संकेत मिला है और न ही उस लड़ाई के अंत का जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त हवाई मार्गों को खतरे में डाल दिया है।
अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए इस युद्ध में 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस बीच, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने सोमवार तड़के कहा कि उनकी हवाई रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपट रही है, वहीं बहरीन में हवाई हमले के संकेत देने वाले सायरन बज रहे हैं। ईरान ने फारस की खाड़ी को शेष विश्व से जोड़ने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है और कहा है कि शत्रु देशों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति है, लेकिन जहाजों पर हमलों ने लगभग सभी टैंकर यातायात को रोक दिया है।
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वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान जलडमरूमध्य नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके ‘‘ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।’’ अमेरिका का तर्क है कि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करता है और इसका उपयोग युद्ध अभियानों को शक्ति प्रदान करने के लिए करता है।
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वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो पूरे क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचे को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा, जिसमें खाड़ी देशों में पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा और जल शोधन प्रतिष्ठान शामिल हैं।
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