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एयर इंडिया समूह पश्चिम एशिया के लिए 30 उड़ानें संचालित करेगा

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस सोमवार को पश्चिम एशिया से आने-जाने वाली कुल 30 निर्धारित और गैर-निर्धारित उड़ानें संचालित करेंगी। हालांकि कई मार्गों पर सेवाएं सीमित रहेंगी। एयरलाइन की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार यह जानकारी मिली है।

एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस मिलकर 23 मार्च को पश्चिम एशिया क्षेत्र से आने-जाने वाली 30 निर्धारित और गैर-निर्धारित उड़ानें संचालित करेंगी।

दोनों एयरलाइंस जेद्दा के लिए अपनी निर्धारित उड़ानें जारी रखेंगी। भारत और सऊदी अरब के इस शहर के बीच कुल 10 उड़ानें होंगी। एयर इंडिया दिल्ली और मुंबई से एक-एक वापसी उड़ान संचालित करेगी जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु, कोझिकोड और मंगलुरु से उड़ानें संचालित करेगी।

जेद्दा के अलावा, एयर इंडिया एक्सप्रेस मस्कट से आने-जाने वाली चार निर्धारित उड़ानें संचालित करेगी, जिनमें दिल्ली और मुंबई से आने वाली उड़ानें भी शामिल हैं। इसके अलावा, यह बेंगलुरु और कोझिकोड से रियाद के लिए भी चार निर्धारित उड़ानें संचालित करेगी।

नियमित उड़ानों के अलावा, एयर इंडिया समूह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब के लिए 12 अनियमित उड़ानें संचालित करेगा, जो स्लॉट की उपलब्धता और परिचालन स्थितियों पर निर्भर करेंगी।

ये उड़ानें भारतीय और स्थानीय नियामक प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद संचालित की जा रही हैं।

संयुक्त अरब अमीरात के गंतव्यों में से दुबई, अबू धाबी और शारजाह के लिए विशेष सेवाएं संचालित की जाएंगी।

एयर इंडिया दिल्ली और दुबई के बीच सेवाएं संचालित करेगी जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली और मुंबई को अबू धाबी से और मंगलुरु को शारजाह से जोड़ने वाली उड़ानें संचालित करेगी।

एयरलाइन ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात में रास अल खैमाह और अल ऐन, ओमान में सलालाह, सऊदी अरब में दम्माम और बहरीन, दोहा, कुवैत और तेल अवीव सहित कई गंतव्यों के लिए कोई निर्धारित या आकस्मिक उड़ानें नहीं होंगी।

इस दौरान, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य क्षेत्रों से आने-जाने वाली एयर इंडिया की सभी उड़ानें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलती रहेंगी।

जिन मार्गों पर निर्धारित सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित हैं, उन पर बुकिंग कराने वाले यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्रा पुनः बुक करने या पूर्ण धनवापसी प्राप्त करने का विकल्प दिया गया है। एयर इंडिया ने यात्रियों को सहायता के लिए अपनी वेबसाइट का उपयोग करने या ग्राहक सहायता केंद्रों से संपर्क करने की सलाह दी है।

एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्रियों, विशेष रूप से यूएई स्टेशनों से यात्रा करने वालों को, बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अन्य वाणिज्यिक उड़ानों में पुनः बुकिंग करने का विकल्प दिया गया है।

एयरलाइन ने व्हाट्सएप पर अपने डिजिटल असिस्टेंट के माध्यम से भी पुनः बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई है।

एयरलाइन समूह ने कहा कि वह प्रभावित यात्रियों से सीधे संपर्क कर रहा है और परिचालन की व्यवहार्यता के आधार पर पश्चिम एशियाई गंतव्यों के लिए अतिरिक्त तदर्थ उड़ानें संचालित करने की संभावना तलाश रहा है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

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ईरान के खिलाफ संघर्ष में सभी विकल्प खुले हैं: अमेरिकी दूत

वाशिंगटन, 23 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दो तरह की रणनीति पर काम कर रहा है। एक तरफ वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर जिम्मेदारी बांट रहा है और दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर सीधे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दे रहा है। यह बात संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कही।

सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम ‘फेस द नेशन’ में वॉल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका दोनों रास्तों पर एक साथ आगे बढ़ सकता है। उन्होंने साफ किया कि यह जरूरी नहीं है कि अमेरिका सिर्फ बल प्रयोग करे या केवल सहयोगियों पर निर्भर रहे, दोनों विकल्प साथ-साथ चल सकते हैं।

उन्होंने बताया कि अब इटली, जर्मनी, फ्रांस समेत कई देश इस मिशन में मदद के लिए आगे आए हैं। इसके अलावा जापान ने भी नौसेना सहयोग देने का वादा किया है, क्योंकि खाड़ी से निकलने वाले तेल का बड़ा हिस्सा एशिया जाता है।

वॉल्ट्ज ने यह भी कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर कार्रवाई तेज करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पहले ही साफ कर चुके हैं कि ईरान की सैन्य ताकत, मिसाइल, नौसेना और ड्रोन क्षमता को लगातार कमजोर किया जाएगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोले, नहीं तो उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला किया जा सकता है। इस पर वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति के लिए कोई भी विकल्प पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है।

वॉल्ट्ज के मुताबिक, ईरान की सैन्य और नागरिक व्यवस्था आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स देश के बड़े हिस्से के अहम ढांचे, अर्थव्यवस्था और कई सरकारी संस्थानों को नियंत्रित करता है।

उन्होंने कहा कि अगर ईरान की सैन्य क्षमता और रक्षा उत्पादन को कमजोर किया जा रहा है, तो सभी विकल्प खुले रहने चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र की ओर से ऊर्जा ढांचे पर हमले को लेकर युद्ध अपराध की आशंका जताए जाने पर वॉल्ट्ज ने अमेरिकी रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान अपने महत्वपूर्ण ढांचे का इस्तेमाल न सिर्फ अपने लोगों को दबाने के लिए करता है, बल्कि पड़ोसी देशों पर हमले करने और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद परमाणु हथियार की दिशा में बढ़ने के लिए भी करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हमले करते समय सिर्फ सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाएगा। उनके अनुसार, राष्ट्रपति, पेंटागन और उनकी टीम यह सुनिश्चित करेगी कि लक्ष्य सिर्फ ईरान के सैन्य ढांचे तक सीमित रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर सैन्य ठिकानों को नागरिक इलाकों के साथ मिलाकर रखता है।

ईरान की मिसाइल क्षमताओं के बारे में बात करते हुए, वॉल्ट्ज ने हाल के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए पिछली खुफिया जानकारियों को चुनौती दी। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन ने हाल ही में डिएगो गार्सिया की ओर दागी गई मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल की निंदा की है। उनका कहना था कि ऐसी मिसाइलें यूरोप की राजधानियों तक पहुंच सकती हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने अपने नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम के जरिए अपनी तकनीकी प्रगति को छिपाया है। उनके मुताबिक, अंतरिक्ष तकनीक और मिसाइल तकनीक को जोड़ना ज्यादा मुश्किल नहीं है।

वॉल्ट्ज ने अमेरिकी रणनीति को पहले से उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति समय रहते कार्रवाई कर रहे हैं ताकि ईरान को पूरी तरह परमाणु ताकत बनने से रोका जा सके। उन्होंने इसकी तुलना उत्तर कोरिया से की।

अमेरिका में इस मुद्दे पर लोगों की शंका को भी वॉल्ट्ज ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के करीब 90 प्रतिशत लोग ट्रंप के इस प्रयास का समर्थन करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति की सबसे बड़ी प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा है।

आखिर में वॉल्ट्ज ने दोहराया कि किसी भी विकल्प को अभी खारिज नहीं किया गया है, जिसमें जरूरत पड़ने पर जमीनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। उनके मुताबिक, अमेरिका अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हर संभव रास्ता खुला रखेगा।

--आईएएनएस

एएस/

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