नहीं थम रही नोरा फतेही की मुश्किलें, 'सरके चुनर' गाना विवाद के बीच इंडिया से डिपोर्ट करने की हुई मांग
Sarke Chunar Song Controversy: कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का हिंदी गाना ‘सरके चुनर’ रिलीज होते ही बड़े विवाद में घिर गया है. गाने के कथित अश्लील और आपत्तिजनक लिरिक्स को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त विरोध देखने को मिला, जिसके बाद मेकर्स को यह गाना सभी प्लेटफॉर्म्स से हटाना पड़ा. हालांकि गाना हटाए जाने के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और अब मामला कानूनी स्तर तक पहुंच गया है. इतना ही नहीं, अब नोरा फतेही का भारत में वर्क परमिट भी कैंसिल होने की कगार पर आ गया है. चलिए आपको सब डिटेल में बताते हैं.
गाने को लेकर बढ़ा विवाद
फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के इस गाने में एक्ट्रेस नोरा फतेही नजर आई थीं. गाने के हिंदी वर्जन के कुछ शब्दों को लेकर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और समाज के लिए अनुचित बताया. रिलीज के तुरंत बाद ही सोशल मीडिया पर गाने के खिलाफ कैंपेन शुरू हो गया, जिसमें इसे हटाने की मांग की गई. बढ़ते विरोध को देखते हुए आखिरकार मेकर्स ने गाने को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटा लिया.
वर्क परमिट रद्द करने की मांग
विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 वकीलों के एक समूह ने भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स को शिकायत भेजकर नोरा फतेही के वर्क परमिट को रद्द करने की मांग की है. इसके साथ ही शिकायत में उन्हें भारत से डिपोर्ट करने की भी अपील की गई है. यह शिकायत कई अन्य संस्थाओं को भी भेजी गई है, जिनमें Central Board of Film Certification (CBFC), Ministry of Electronics and Information Technology और National Commission for Women शामिल हैं.
शिकायत में क्या कहा गया?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नोरा फतेही भारत में काम करने के विशेषाधिकार का दुरुपयोग कर रही हैं. आरोप यह भी है कि वह ऐसे कंटेंट का हिस्सा बन रही हैं और उसे बढ़ावा दे रही हैं, जिसे अश्लील, अभद्र और सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ माना जा रहा है. शिकायतकर्ताओं ने Foreigners Act 1946 का हवाला देते हुए कहा है कि यदि कोई विदेशी नागरिक सार्वजनिक शालीनता और व्यवस्था के लिए खतरा बनता है, तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
नोरा फतेही और लिरिसिस्ट का पक्ष
वहीं बता दें कि विवाद बढ़ने के बाद नोरा फतेही ने अपनी सफाई भी दी. उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि उन्हें बिना वजह ट्रोल किया जा रहा है और उन्हें हिंदी लिरिक्स की पूरी जानकारी नहीं थी. साथ ही गाने के लिरिसिस्ट ने भी इस पूरे मामले पर माफी मांगी है. उनका कहना है कि गाना मूल रूप से कन्नड़ भाषा से अनुवादित किया गया था और अनुवाद के दौरान कुछ शब्दों का चयन गलत हो गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया.
सोशल मीडिया पर जारी है बहस
गाना हटाए जाने के बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है. एक तरफ जहां कुछ लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे ओवररिएक्शन मानते हुए क्रिएटिव फ्रीडम की बात कर रहे हैं.
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राजस्थान के उद्योगपतियों के साथ बातचीत से 5,055 करोड़ का निवेश और रोजगार सुनिश्चित: सीएम मोहन यादव
भोपाल, 22 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जयपुर में उद्योगपतियों के साथ हुए संवाद सत्र के दौरान निवेश को आकर्षित करने के अभियान को काफी गति मिली। इसके परिणामस्वरूप 5,055 करोड़ रुपए के निवेश की प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुईं।
रविवार को अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रस्तावों से विभिन्न क्षेत्रों में 3,530 से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद है, जो व्यापार विस्तार के लिए एक पसंदीदा जगह के तौर पर राज्य की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
सीएम ने इसे इस बात का सबूत बताया कि राजस्थान के उद्यमी, आपसी आर्थिक विकास के लिए मध्य प्रदेश के फायदों का लाभ उठाने में बढ़ती दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
शनिवार को जयपुर में आयोजित यह कार्यक्रम, निवेशकों और उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार के राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा था। मध्य प्रदेश की निवेशक-अनुकूल नीतियों, मजबूत बुनियादी ढांचे और प्रगतिशील औद्योगिक ढांचे को प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किए गए इस सत्र में आकर्षक प्रोत्साहन योजनाओं और क्षेत्र-विशेष के अवसरों पर प्रकाश डाला गया।
सीएम यादव ने प्रमुख कारोबारी नेताओं के साथ विस्तार से चर्चा की, जिसमें उन्होंने भारत के केंद्र में राज्य की रणनीतिक स्थिति, कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति और नवीकरणीय ऊर्जा, विनिर्माण, कपड़ा, दवा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में राज्य की ताकतों पर जोर दिया।
मध्य प्रदेश को असाधारण अवसरों की भूमि के रूप में प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि पड़ोसी राज्य राजस्थान से निवेश का प्रवाह लगातार जारी रहेगा। उन्होंने राज्य के औद्योगिक विकास को भारत के महत्वाकांक्षी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से जोड़ा और सतत तथा उच्च-विकास वाले निवेश के लिए मध्य प्रदेश की एक उभरती हुई शक्ति के रूप में भूमिका पर जोर दिया।
इस संवादात्मक प्रारूप ने प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री और उद्योग नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे स्पष्टीकरण मांगने का अवसर प्रदान किया। कई उद्योगपतियों ने इस पारदर्शी दृष्टिकोण और सहायक वातावरण की सराहना की और कुछ ने राज्य में अपनी इकाइयों का विस्तार करने या नई इकाइयां स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के आउटरीच सेशन जानकारी की कमी को दूर करने, निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी दिलाने में मदद करते हैं। मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के बड़े अभियान के तहत, दूसरे शहरों में भी इसी तरह के कार्यक्रम पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं।
जैसे-जैसे मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और नीतियों में सुधार पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है, सरकार का लक्ष्य आने वाले महीनों में और भी ज्यादा निवेश आकर्षित करना है।
--आईएएनएस
पीएसके
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