केवल हथकरघा दिवस नहीं, बल्कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन का भी ऐतिहासिक दिन: CM योगी
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जहां स्वदेशी, हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है. सीएम योगी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले प्रदेश में विकास नहीं, बल्कि वोटबैंक और परिवारवाद की राजनीति होती थी.
स्वतंत्रता के संकल्प को मजबूत किया
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "बबुआ" देर से उठते थे, शाम तक महफिल सजती थी, ऐसे में प्रदेश के विकास की चिंता कैसे होती. लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 7 अगस्त केवल हथकरघा दिवस ही नहीं, बल्कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन का भी ऐतिहासिक दिन है. वर्ष 1905 में इसी दिन स्वदेशी आंदोलन ने देश की आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी थी. स्वदेशी ने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारत को एक सूत्र में बांधकर स्वतंत्रता के संकल्प को मजबूत किया.
विद्युत सुविधा उपलब्ध कराई गई
सीएम योगी ने कहा कि हथकरघा प्रदेश की समृद्ध विरासत है. प्रदेश में लगभग ढाई लाख परिवार सीधे हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं और पावरलूम को जोड़ लिया जाए तो करीब 30 लाख लोगों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है. उन्होंने बताया कि सरकार ने हस्तशिल्पियों और बुनकरों के सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं. पिछले वर्ष 40 हजार हस्तशिल्पियों को 109 करोड़ रुपये की विद्युत सुविधा उपलब्ध कराई गई.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले भदोही का कालीन उद्योग लगभग मृतप्राय हो चुका था, लेकिन आज वहीं के कालीन वैश्विक बाजार में करोड़ों रुपये का निर्यात कर रहे हैं. नई संसद के लिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भदोही के कालीन को प्राथमिकता देने की बात कही थी. सरकार का प्रयास है कि देश का पैसा देश के कारीगरों पर खर्च हो, जिससे उनके जीवन में समृद्धि आए.
प्रदेश के बारे में सोचने का समय कहां
अपने संबोधन में सीएम योगी ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा, "कुछ लोगों के साथ कुछ शब्द जीवनभर जुड़े रहते हैं. कुछ लोग जीवनभर 'बबुआ' ही बने रहते हैं. 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे, 5 बजे जिम जाते थे और 7 बजे महफिल सज जाती थी. फिर प्रदेश के बारे में सोचने का समय कहां था."
उन्होंने कहा कि इसी कारण पहले प्रदेश दंगों, लंबे कर्फ्यू, इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी समस्याओं से जूझता था. सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल थी, न पेयजल की व्यवस्था थी और न ही शौचालय. आज स्कूलों में बच्चों को बैग, पुस्तकें और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं और प्रधानमंत्री के 'निपुण भारत' अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है.
विकास के बजाय वोट बैंक की राजनीति होती थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बिजली, सड़क और कानून व्यवस्था की स्थिति खराब थी. व्यापारी और बेटियां सुरक्षित नहीं थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय विकास के बजाय वोट बैंक की राजनीति होती थी, जिसका सबसे अधिक नुकसान गरीबों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को उठाना पड़ा. उन्होंने कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं और सुरक्षित तथा बेहतर माहौल मिलने से उन्हें भी व्यापक लाभ मिला है.
डाबर को अंतरिम राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने एफएसएसएआई के आदेश पर लगाई रोक
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के उस प्रतिबंध आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें डाबर इंडिया लिमिटेड को कथित रूप से भ्रामक “100 प्रतिशत” दावे वाले कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया था।
एकल न्यायाधीश पीठ के न्यायमूर्ति अमित महाजन ने यह आदेश देते हुए कहा कि डाबर को सुनवाई का अवसर दिए बिना इस तरह का प्रतिबंध आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए था।
अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता की दलीलों को देखते हुए, इस अदालत की प्रथम दृष्टया राय है कि इस तरह का प्रतिबंध आदेश सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित नहीं किया जाना चाहिए था। अगली सुनवाई की तारीख तक विवादित आदेश पर रोक लगाई जाती है।”
न्यायमूर्ति महाजन ने डाबर इंडिया की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार और एफएसएसएआई से जवाब मांगा और अंतरिम आदेश पारित किया।
इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
डाबर ने एफएसएसएआई के प्रतिबंध आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। नियामक ने कंपनी को कुछ चिन्हित खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का निर्देश दिया था, जिन पर “100 प्रतिशत प्राकृतिक”, “100 प्रतिशत शुद्ध”, “100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी”, “100 प्रतिशत ऑर्गेनिक” और “100 प्रतिशत टेंडर नारियल पानी” जैसे दावे किए गए थे।
मामले को शुरुआत में तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष रखा गया था। पीठ ने मामले को तत्काल आधार पर सुनवाई के लिए अनुमति दी थी।
शुक्रवार की सुनवाई के दौरान डाबर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि कंपनी दशकों से इन उत्पादों की बिक्री कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी ने आदेश पारित किया, उसके पास इस तरह से इन उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का अधिकार नहीं था।
यह भी दलील दी गई कि आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना और कंपनी को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना पारित किया गया।
एफएसएसएआई की ओर से पेश केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने नियामक की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध आदेश जारी करने से पहले डाबर को सुधार संबंधी नोटिस दिया गया था।
दलीलों पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया मामला डाबर के पक्ष में बनता है और अगली सुनवाई की तारीख तक प्रतिबंध आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
एफएसएसएआई ने इससे पहले कहा था कि डाबर के कुछ उत्पादों पर इस्तेमाल किए गए “100 प्रतिशत” दावे अस्पष्ट, सत्यापित न किए जा सकने वाले और उपभोक्ताओं को गुमराह करने की संभावना वाले थे। नियामक के अनुसार, यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन तथा दावे विनियम, 2018 का उल्लंघन है।
नियामक ने डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर जैविक भारत लोगो के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई थी। खाद्य नियामक ने आरोप लगाया था कि इन उत्पादों के पास वैध एफएसएसएआई ऑर्गेनिक अनुमोदन नहीं था, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक जैविक खाद्य विनियम, 2017 का उल्लंघन है।
--आईएएनएस
एबीएस
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