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Explainer: 'ऑपरेशन सफेद सागर' की असली कहानी क्या है? जानें कारगिल युद्ध से जुड़ी इस सीरीज की पूरी डिटेल

Operation Safed Sagar Real Story: कारगिल युद्ध पर अब तक कई फिल्में और डॉक्यूमेंट्री बन चुकी हैं, लेकिन भारतीय वायुसेना के ऐतिहासिक मिशन 'ऑपरेशन सफेद सागर' पर पहली बार वेब सीरीज बनाई गई है. ये सीरीज 7 अगस्त 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है. इस सीरीज में युद्ध तो दिखाया ही गया है, इसके अलावा उन जवानों के परिवारों की कहानी भी दिखाई गई है, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी. आइए जानते हैं कि इस सीरीज की कहानी क्या है, इसकी स्टार कास्ट, बजट से जुड़ी पूरी जानकारी?

क्या है 'ऑपरेशन सफेद सागर'?

'ऑपरेशन सफेद सागर' भारतीय वायुसेना का वो सैन्य अभियान था, जिसे 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान चलाया गया था. जब पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों ने कारगिल की ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था, तब भारतीय सेना के साथ मिलकर वायुसेना ने दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ये ऑपरेशन शुरू किया था. पहाड़ों की ऊंचाई, खराब मौसम और सीमित सैन्य विकल्पों के बावजूद भारतीय वायुसेना ने कई सफल मिशन पूरे किए और युद्ध की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई थी.

बेहद मुश्किल था ये मिशन

बता दें, उस दौर में ऑपरेशन सफेद सागर भारतीय वायुसेना के लिए आसान नहीं था. दुश्मन ऊंचे पहाड़ों पर मौजूद था, जबकि भारतीय लड़ाकू विमानों को नीचे से हमला करना पड़ता था. उस समय सरकार ने वायुसेना को LoC पार नहीं करने का आदेश दिया था, ऐसे में पायलटों को सीमित दायरे में रहकर मिशन पूरा करना पड़ा. ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, खराब मौसम और दुश्मन की मिसाइलों के बीच उड़ान भरना किसी चुनौती से कम नहीं था. इसके बावजूद भारतीय वायुसेना ने मिग-21, मिग-27, मिराज-2000 और दूसरे लड़ाकू विमानों की मदद से दुश्मन के कई ठिकानों को तबाह किया.

सीरीज की कहानी क्या है?

वेब सीरीज की कहानी की बात करे तो ये कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना की 'गोल्डन एरोज' स्क्वाड्रन के इर्द-गिर्द घूमती है. इसमें दिखाया गया है कि किस तरह युवा पायलट दुश्मन के कब्जे वाले इलाकों में बेहद जोखिम भरे मिशन पर उड़ान भरते हैं. युद्ध के मैदान में उनके फैसले, साथियों के साथ रिश्ते और देश के प्रति समर्पण को दिखाया गया है. सीरीज केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहती. इसमें मेकर्स ने इमोशंस भी दिखाया है, जिसमें सैनिकों के परिवारों की चिंता, इंतजार और मानसिक संघर्ष देखने को मिलेगा.

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क्या रियल स्टोरी है 'ऑपरेशन सफेद सागर'

'ऑपरेशन सफेद सागर' सीरीज 1999 के  'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar ) से प्रेरित है. इसमें दिखाए गए युद्ध, सैन्य अभियान और कई घटनाएं ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं. हालांकि, दर्शकों को कहानी से जोड़ने के लिए कई किरदार, संवाद और घटनाएं काल्पनिक भी बनाई गई हैं. यानी ये किसी एक पायलट या अधिकारी की बायोपिक नहीं है, बल्कि असली मिशन की का ड्रामेटाइज्ड वर्जन है.

'ऑपरेशन सफेद सागर' की स्टार कास्ट

'ऑपरेशन सफेद सागर' में कई सितारें नजर आए हैं. एक्टर सिद्धार्थ (Siddharth), जिमी शेरगिल (Jimmy Shergill), अभय वर्मा (Abhay Verma) , दिया मिर्जा (Dia Mirza), आदिल हुसैन अहम रोल में हैं. इनके अलावा प्राजक्ता कोली, मिहिर आहूजा, तारुक रैना, अर्नव भसीन, अमृता बागची और विनय पाठक भी सपोर्टिंग किरदार निभाते दिखें हैं.  इनके अलावा कई यंग कलाकार भी भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और जवानों के रोल में नजर आए हैं. सीरीज का निर्देशन ओनी सेन ने किया है, जबकि इसे अभिजीत सिंह परमार और कुशल श्रीवास्तव ने बनाया है.

कितने बजट में बनी सीरीज?

इसके बजट की बात करे तो मेकर्स ने सीरीज का आधिकारिक बजट रिवील नहीं किया है.  हालांकि, नेटफ्लिक्स का कहना है कि 'ऑपरेशन सफेद सागर' भारत में उसके सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक है. नेटफ्लिक्स के सह-सीईओ टेड सारांडोस के मुताबिक, इस सीरीज के निर्माण से भारतीय अर्थव्यवस्था में 215 करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान हुआ है।. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस प्रोजेक्ट पर बड़े स्तर पर काम किया गया है और इसे बनाने में काफी पैसा खर्च हुआ है.

कितने एपिसोड हैं?

कारगिल युद्ध पर बनी ज्यादातर फिल्मों में भारतीय सेना के जमीनी ऑपरेशन को ज्यादा दिखाया गया है. 'ऑपरेशन सफेद सागर' पहली ऐसी बड़ी सीरीज है, जिसमें भारतीय वायुसेना की भूमिका को विस्तार से दिखाया गया है. इस सीरीज में कुल 6 एपिसोड है और हर एक एपिसोड लगभग 40 से 55 मिनट का है. इसकी पूरी कहानी कारगिल युद्ध के अलग-अलग चरणों को जोड़ते हुए आगे बढ़ती है. 

सीरीज देखकर क्या बोल रहे लोग?

वहीं, अब सीरीज ओटीटी पर स्ट्रीम की जा चुकी है और दर्शकों को पसंद भी आ रही है. अगर अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित वॉर ड्रामा देखना पसंद करते हैं, तो 'ऑपरेशन सफेद सागर' अच्छी चॉइस हो सकती है. इसमें देशभक्ति, एक्शन, इमोशन और भारतीय वायुसेना के साहस को करीब से दिखाया गया है. हालांकि, अगर आप पूरी तरह डॉक्यूमेंट्री जैसी कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो इसमें कई काल्पनिक किरदार और ड्रामेटिक एलिमेंट भी शामिल हैं. ऐसे में इस विकेंड आप ये सीरीज देख सकते हैं.

FAQ

1. 'ऑपरेशन सफेद सागर' नाम क्यों रखा गया था?
ये भारतीय वायुसेना के 1999 के कारगिल एयर ऑपरेशन का आधिकारिक कोडनेम था.

2. सीरीज में किस सैन्य अभियान को दिखाया गया है?
-सीरीज में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के मिशन को दिखाया गया है.

3. क्या यह किसी एक एयर फोर्स ऑफिसर की बायोपिक है?
ये सीरीज बायोपिक नहीं है, बल्कि कई वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक वॉर ड्रामा है.

4. 'ऑपरेशन सफेद सागर' की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
- इसमें भारतीय वायुसेना की भूमिका और सैनिकों के परिवारों की भावनाओं को भी दिखाया गया है.

5. यह सीरीज किन दर्शकों के लिए है?
देशभक्ति, वॉर ड्रामा और सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानियां पसंद करने वाले दर्शकों इसे देख सकते हैं.

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आधी उम्र की लड़कियों संग रिलेशन, पत्नी से नहीं बनाए सालों से संबंध, दुनिया के सामने ‘परफेक्ट हसबैंड’ दिखने वाले एक्टर की खुली पोल

Detective Tanya Puri: शोबिज की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार और परफेक्ट नजर आती है, हमेशा सेलेब्स की लाइफ उनती सीधी और सरल नहीं होती है. आज के सोशल मीडिया के जमाने में कई बार स्टार की पर्सनल लाइफ से जुड़े ऐसे खुलासे सामने आते हैं, जो फैंस को भी चौंका देते हैं. इसी बीच एक प्राइवेट डिटेक्टिव तान्या पुरी (Tanya Puri) के दावे ने एक फेमस बॉलीवुड एक्टर को लेकर खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि शादीशुदा लाइफ में कैसे स्टार्स चीट करते हैं. हालांकि, डिटेक्टिव ने एक्टर का नाम नहीं बताया. 

प्राइवेट डिटेक्टिव ने खोली एक्टर की पोल 

डिटेक्टिव तान्या पुरी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इंडस्ट्री के एक टॉप एक्टर की पोल खोलते हुए बताया. उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री का वह एक्टर लोगों की नजर में 'ग्रीन फ्लैग' और एक आइडल फैमिली मैन है. उनके मुताबिक, उनकी एक परफेक्ट इमेज है, पत्नी और बच्चे हैं और बाहर से उसकी मैरिड लाइफ काफी अच्छी है. उन्होंने बताया कि उस एक्टर की पत्नी उनकी कंपनी में आई थीं. उन्हें लंबे टाइम से अपने पति को लेकर कुछ गबबड़ी लग रही थी. अपने पति को लेकर भी उन्हें कुछ गॉसिप सुनने को मिल रही थी और वह इसकी सच्चाई जानना चाहती थीं. जिसके बाद उनकी कंपनी ने उस एक्टर के बारे में पड़ताल कि और जिसके बाद चौंकाने वाले खुलासे हुए. 

आधी उम्र की लड़कियों संग रिलेशन

तान्या के मुताबिक, वह जिस एक्टर की बात कर रही हैं. वह एक ऐसी फ्रेंचाइजी की फिल्म में काम कर रहे थे, जहां उनकी मुलाकात उससे आधी उम्र की लड़कियों से मुलाकात हुई. उन्होंने दावा किया कि वह एक्टर सिर्फ फिल्मों में ही नहीं बल्कि  रियल लाइफ में भी खुद से कम उम्र की लड़कियों के साथ रिलेशन में था. यहां पर आपको बता दें कि तान्या ने उस एक्टर के नाम का जिक्र नहीं किया. तान्या ने बताया कि उस एक्टर ने पब्लिक में अपनी इमेज 'ग्रीन फ्लैग' हसबैंड के तौर पर बना रखी है. लेकिन वह कपल अलग-अलग रिलेशन में है लेकिन अपनी पत्नी से सालों से संबंध नहीं बनाए. 

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तान्या दिखाई देंगी ट्रेटर्स 2 में

ट्रेटर्स 2 के दूसरे सीजन को लेकर लोगों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट देखने के लिए मिल रही है. जानकारी के मुताबिक, इस शो में डिटेक्टिव तान्या पुरी भी बतौर कंटेस्टेंट्स हिस्सा ले रही हैं. खास बात यह है कि तान्या रियल लाइफ में प्राइवेट डिटेक्टिव हैं, इसलिए शो में जब उन्हें किसी के झूठ, चाल या धोखे को पकड़ना होगा, तो उनके लिए आसानी होगी. जिसे देखना काफी दिलचस्प होगा. हालांकि, पॉडकास्ट में तान्या ने जिस एक्टर के बारे में  खुलासा किया है, उसका नाम सामने नहीं आया है. इसलिए फिलहाल यह मामला एक अनाम स्टार की स्टोरी और तान्या के दावों तक ही सीमित है.

'द ट्रेटर्स 2' करण जौहर करेंगे होस्ट

आपको बता दें कि द ट्रेटर्स 2' भरोसे, चाल और धोखे पर बेस्ड शो है. जिसमें कंटेस्टेंट्स को एक-दूसरे पर भरोसा करते हुए भी यह पता लगाना होता है कि आखिर कौन उनके बीच 'ट्रेटर' कौन है. इस शो का पिछला सीजन करण जौहर ने होस्ट किया था और इस बार भी वही कर रहे हैं. यह शो Prime Video पर 13 अगस्त को रिलीज होगा. 

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  Sports

अजित आगरकर के कार्यकाल पर बोले Wasim Jaffer, नतीजों के दम पर Chief Selector को बताया पूरी तरह सफल

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर का कार्यकाल एक बार फिर चर्चा में है। हाल के महीनों में टीम चयन को लेकर कई सवाल उठे हैं, लेकिन पूर्व भारतीय बल्लेबाज वसीम जाफर का मानना है कि अगर केवल नतीजों के आधार पर देखा जाए तो आगरकर का कार्यकाल सफल माना जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ खिलाड़ियों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ और चयन प्रक्रिया में जो फैसले लिए गए, उन पर बहस होना स्वाभाविक है।

बता दें कि अजित आगरकर को जुलाई 2023 में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने मुख्य चयनकर्ता बनाया था। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने एकदिवसीय प्रारूप के विश्व कप का फाइनल खेला, एशिया कप जीता, चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की और लगातार दो बार बीस ओवर विश्व कप जीतकर इतिहास रचा। सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में टीम को कुछ बड़े झटके भी झेलने पड़े हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, आगरकर का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त होना था, लेकिन बीसीसीआई ने उन्हें तीन महीने का विस्तार दिया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उन्हें आगे भी जिम्मेदारी मिलती है या नहीं।

अपने वीडियो में वसीम जाफर ने कहा कि किसी भी चयनकर्ता का मूल्यांकन अंत में टीम के प्रदर्शन और परिणामों के आधार पर किया जाता है। उनके अनुसार, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े खिताब जीते हैं, इसलिए इस नजरिए से आगरकर का कार्यकाल सफल कहा जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ खिलाड़ियों को लेकर लिए गए फैसलों ने सवाल जरूर खड़े किए हैं।

जाफर ने विशेष रूप से मोहम्मद शमी, सरफराज खान, अभिमन्यु ईश्वरन और औकिब नबी का जिक्र किया। उनका कहना था कि इन खिलाड़ियों के चयन और बाहर किए जाने को लेकर कई बार स्पष्टता नहीं दिखाई दी। उन्होंने कहा कि जब किसी खिलाड़ी को मौका नहीं मिलता या अचानक टीम में शामिल किया जाता है, तो उसके पीछे की वजह साफ होनी चाहिए। इससे खिलाड़ियों का भरोसा भी बना रहता है और चयन प्रक्रिया पर भी सवाल कम उठते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में औकिब नबी को भारतीय टीम में स्थान मिला, जबकि इससे पहले उन्हें नजरअंदाज किया गया था। इसी तरह मोहम्मद शमी और सरफराज खान को लेकर भी लगातार चर्चाएं होती रही हैं। जाफर का मानना है कि इन मामलों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि खिलाड़ियों को अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट संदेश मिल सके।

वसीम जाफर ने भारतीय टीम की सफलता का बड़ा श्रेय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी दिया। उन्होंने कहा कि जब बुमराह टीम में होते हैं तो विरोधी टीम पर लगातार दबाव बना रहता है। वहीं जब वह किसी कारण से नहीं खेलते, तब भारतीय गेंदबाजी साधारण नजर आती है। इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भी यह अंतर साफ दिखाई दिया है।

उन्होंने यह भी बताया कि चयन समिति में सभी सदस्य मिलकर फैसला लेते हैं। हालांकि मुख्य चयनकर्ता की राय महत्वपूर्ण होती है, लेकिन किसी खिलाड़ी के चयन पर सामूहिक चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। जाफर का मानना है कि उपलब्धियों के आधार पर आगरकर का कार्यकाल सफल जरूर रहा है, लेकिन भविष्य में चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा स्पष्ट बनाने की जरूरत भी बनी हुई हैं।
Fri, 07 Aug 2026 19:59:44 +0530

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