महिलाओं के लिए बड़ा अवसर, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में 2584 परिचालकों की भर्ती
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने की दिशा में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने बड़ा कदम उठाया है. निगम ने 2584 महिला परिचालकों (कंडक्टर) की संविदा के आधार पर भर्ती करने की घोषणा की है. इस पहल का उद्देश्य न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ाना है.
गृह जनपद में मिलेगी नियुक्ति
इस भर्ती प्रक्रिया की खास बात यह है कि चयनित महिला अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद के डिपो में ही तैनात किया जाएगा. इससे उन्हें अपने परिवार के करीब रहकर काम करने का अवसर मिलेगा और आवागमन की समस्या भी कम होगी. यह निर्णय विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए राहत भरा है, जो दूर-दराज में नौकरी करने से हिचकिचाती हैं.
योग्यता और चयन प्रक्रिया
परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, इस भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट निर्धारित की गई है. इसके साथ ही अभ्यर्थियों के पास CCC (कंप्यूटर कॉन्सेप्ट कोर्स) का प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है.
चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा, जिसमें इंटरमीडिएट में प्राप्त अंकों को आधार बनाया जाएगा. इसके अलावा, जिन उम्मीदवारों के पास एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट, एनएसएस प्रमाणपत्र या भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य या राष्ट्रपति पुरस्कार हैं, उन्हें मेरिट में 5% अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे.
रोजगार मेलों के जरिए आसान प्रक्रिया
भर्ती प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों में रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है. यह मेले महिलाओं को सीधे मौके पर आवेदन और जानकारी प्राप्त करने का अवसर देंगे.
25 मार्च को सहारनपुर, झांसी, कानपुर, चित्रकूट धाम-बांदा और प्रयागराज में मेले आयोजित होंगे. 28 मार्च को गाजियाबाद, अलीगढ़, बरेली, अयोध्या और वाराणसी में आवेदन किए जा सकेंगे. 30 मार्च को मेरठ, इटावा, हरदोई, देवीपाटन और आजमगढ़ में मेले लगेंगे, जबकि 1 अप्रैल को नोएडा, आगरा, मुरादाबाद, लखनऊ और गोरखपुर में आयोजन होगा.
मिशनों से जुड़ाव अनिवार्य
इस भर्ती के लिए अभ्यर्थियों का उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन या उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन से जुड़ा होना भी जरूरी है. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित महिलाएं पहले से ही कौशल विकास कार्यक्रमों से लाभान्वित हो चुकी हों.
समान पारिश्रमिक और सशक्तिकरण
चयनित महिला परिचालकों को संविदा पर कार्यरत अन्य चालकों और परिचालकों के समान पारिश्रमिक दिया जाएगा. यह कदम न केवल आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को भी मजबूत करेगा.
कैसे करें आवेदन
इच्छुक महिला अभ्यर्थी अपने नजदीकी क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में जाकर आवेदन कर सकती हैं और रोजगार मेले में शामिल होकर प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं. यह पहल प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसरों को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
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रिपोर्ट: पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान में अपने ‘खतरनाक एजेंडे’ को छिपाने के लिए धर्म का कर रहा इस्तेमाल
वॉशिंगटन, 21 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में अपने कथित कठोर एजेंडे को छिपाने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहा है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
वॉशिंगटन स्थित ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के लिए लिखते हुए सेंगे सेरिंग ने कहा कि पाकिस्तान धर्म को “धुएं के पर्दे” की तरह इस्तेमाल कर रहा है, ताकि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने की अपनी नीतियों को छिपा सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ईरान और अरब देशों के बीच पूर्ण युद्ध होता है, तो पाकिस्तान में शिया समुदाय की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों के लिए “टू-नेशन थ्योरी” की बेड़ियों से मुक्त होकर भारत के साथ जुड़ना एक सम्मानजनक विकल्प हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कराकोरम हाईवे पर इस साल यातायात बाधाएं केवल बर्फबारी या भूस्खलन के कारण ही नहीं होंगी, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का भी असर दिखेगा। हालात उस घटना के बाद और बिगड़े, जब अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद गिलगित और स्कर्दू में हिंसा भड़क गई।
बताया गया है कि 1 मार्च को पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद हालात काबू करने के लिए कर्फ्यू लगाया गया। अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने दो सैनिकों की हत्या की और सेना से जुड़े कई ढांचों को आग के हवाले कर दिया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था एजेंसियां पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में दर्जनों लोगों की तलाश और गिरफ्तारी में जुटी हैं, जिन पर “ईरान समर्थित” धार्मिक नेटवर्क से जुड़े होने का शक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस रात में लोगों के घरों पर छापेमारी कर रही है और रमजान के दौरान भी हिरासत में लिए गए लोगों को गुप्त हिरासत केंद्रों में रखा जा रहा है। जो भी व्यक्ति सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है या लोगों को संगठित करने की क्षमता रखता है, वह निशाने पर है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में एडवोकेट एहसान अली, इंजीनियर महबूब, एडवोकेट नफीस, फिदा इसार, तारुफ अब्बास, शेख यूसुफ, नजर काज़मी और शब्बीर मयार जैसे राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के ये कदम बढ़ते आंतरिक असंतोष को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे हैं, जबकि अमेरिका और सऊदी अरब को उम्मीद है कि पाकिस्तानी सेना ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियानों में सहयोग करेगी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना अपने पश्चिमी और अरब सहयोगियों को खुफिया और विश्लेषणात्मक समर्थन दे रही है, साथ ही मीडिया के जरिए जनमत को प्रभावित कर ईरान के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
मीडिया पर आरोप है कि वह भारत-ईरान संबंधों को लेकर ईरान को खलनायक के रूप में पेश कर रहा है और घरेलू स्तर पर हिंदू विरोधी भावनाओं का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि अपने रणनीतिक हितों को साधा जा सके।
--आईएएनएस
डीएससी
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