अदाणी इलेक्ट्रिसिटी लगातार दूसरे साल बनी देश की नंबर-1 बिजली वितरण कंपनी
मुंबई, 21 मार्च (आईएएनएस)। अदाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड (अदाणी इलेक्ट्रिसिटी) ने लगातार दूसरे साल भारत की सबसे शीर्ष बिजली वितरण कंपनी का स्थान बरकरार रखा है। कंपनी को 92.5 स्कोर मिले हैं, जो इसके बेहतर प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
कंपनी के बयान के अनुसार, देश भर की 66 बिजली वितरण कंपनियों के आकलन में उसे ए+ रेटिंग मिली है। यह रेटिंग बेहतर बिजली सप्लाई, सही बिलिंग और शिकायतों के तेज समाधान जैसे मानकों पर दी गई है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंदर्प पटेल ने कहा कि लगातार दूसरी बार नंबर-1 स्थान बनाए रखना उनकी टीम की मेहनत और अनुशासन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के भरोसे को भी दिखाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी मुंबई में अपने उपभोक्ताओं को बिना रुकावट, भरोसेमंद और बेहतर बिजली सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
देश का बिजली वितरण क्षेत्र अब प्रदर्शन आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां संचालन क्षमता, वित्तीय अनुशासन और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार देखा जा रहा है।
यह बदलाव हाल ही में जारी डिस्ट्रिब्यूशन यूटिलिटीज रैंकिंग (डीयूआर) और कंज्यूमर सर्विस रेटिंग ऑफ डिस्कॉम्स (सीएसआरडी) रिपोर्ट में भी दिखा है, जिसे केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और आरईसी लिमिटेड ने मिलकर जारी किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता सेवा के मामले में पूरे सेक्टर में सुधार हुआ है। इस बार 6 कंपनियों को ए+ रेटिंग मिली, जबकि कोई भी कंपनी सबसे निचले स्तर पर नहीं रही।
अदाणी इलेक्ट्रिसिटी का प्रदर्शन वित्तीय मजबूती, संचालन क्षमता, संसाधनों के बेहतर उपयोग, सप्लाई प्लानिंग और डिजिटल तकनीक जैसे स्मार्ट मीटर और डेटा विश्लेषण के कारण मजबूत रहा है।
मुंबई में 30 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को सेवा देने वाली यह कंपनी अपने काम में भरोसे, पारदर्शिता और तेजी को प्राथमिकता देती है।
रैंकिंग में निजी और सरकारी दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं, जिनमें टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड, दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड और बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग जैसी कंपनियां भी टॉप परफॉर्मर्स में शामिल हैं।
इससे यह साफ होता है कि अब बिजली वितरण क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन, तकनीक और काम के नतीजों के आधार पर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जगह और दिन तय... ममता बनर्जी ने तैयार कर ली अपनी रणनीति; यहां से फूंकेंगी चुनावी बिगुल
West Bengal Eletions 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. खास तौर पर सत्ताधारी दल टीएमसी के लिए ये चुनाव काफी अहम माना जा रहा है. एंटी इंकम्बेंसी के चलते ममता बनर्जी किसी भी तरह की चूक नहीं चाहती हैं. यही वजह है कि वह लगातार रणनीति पर काम कर रही है. इस चुनाव के लिए ममता ने अपना चुनावी बिगूल फूंकने के लिए दिन और जगह तय कर ली है. ममता बनर्जी सोमवार यानी 23 मार्च से राज्यव्यापी चुनाव प्रचार का आगाज करने जा रही हैं. उनके साथ अभिषेक बनर्जी भी उसी दिन से प्रचार अभियान में सक्रिय होंगे. तृणमूल कांग्रेस इस बार चुनाव को बेहद अहम मानते हुए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती.
भवानीपुर से खास फोकस
ममता बनर्जी का विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर इस बार चुनावी मुकाबले का केंद्र बन गया है. यहां से उनके खिलाफ भाजपा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी मैदान में हैं. सुवेंदु ने पहले ही प्रचार शुरू कर बढ़त लेने की कोशिश की है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है.
रणनीति तय करने के लिए अहम बैठक
प्रचार शुरू करने से पहले ममता बनर्जी ने रविवार शाम को भवानीपुर के कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. इस बैठक का उद्देश्य बूथ स्तर तक मजबूत रणनीति तैयार करना और चुनावी अभियान को धार देना है.
बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे, जिनमें सुब्रत बख्शी, देबाशीष कुमार और फिरहाद हकीम शामिल हैं. साथ ही भवानीपुर क्षेत्र के पार्षद और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को भी बुलाया गया है.
कड़ी टक्कर का संकेत
भाजपा की ओर से सुवेंदु अधिकारी को भवानीपुर से उम्मीदवार बनाने के बाद मुकाबला बेहद कांटे का हो गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीट पूरे राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक बन चुकी है. तृणमूल नेतृत्व इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए हर स्तर पर तैयारियां कर रहा है.
बूथ स्तर तक पहुंचाने की तैयारी
तृणमूल कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य ममता बनर्जी के पिछले कार्यों और योजनाओं को हर मतदाता तक पहुंचाना है. इसके लिए पार्टी बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे रही है. बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि अगले एक महीने तक किस तरह प्रचार अभियान को चरणबद्ध तरीके से चलाया जाए.
मतदान की तारीख और रणनीतिक महत्व
भवानीपुर में मतदान दूसरे और अंतिम चरण में 29 अप्रैल को होना है. ऐसे में पार्टी के पास प्रचार के लिए सीमित समय है, जिसे अधिकतम प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है. तृणमूल कांग्रेस के लिए यह सीट सिर्फ एक चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई भी बन चुकी है. वहीं, भाजपा इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर देख रही है. ऐसे में भवानीपुर का यह चुनावी रण पूरे बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है.
यह भी पढ़ें - असम चुनाव में इस धाकड़ पार्टी की एंट्री, 17 उम्मीदवार उतारकर बढ़ाया सियासी पारा...
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















