सस्ती चीनी ड्रोन पर पाकिस्तान की निर्भरता से सैन्य क्षमता सीमित: रिपोर्ट
कोलंबो, 21 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं पर सस्ती चीनी ड्रोन तकनीक पर बढ़ती निर्भरता का असर पड़ रहा है। श्रीलंका के अखबार डेली मिरर की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पश्चिमी देशों के उन्नत रक्षा बाजार से बाहर होने के कारण पाकिस्तान को मजबूरी में चीन का रुख करना पड़ा, न कि केवल रणनीतिक साझेदारी के कारण।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के अत्याधुनिक ड्रोन जैसे एमक्यू-1 प्रीडेटर और एमक्यू-9 रीपर तकनीकी रूप से काफी उन्नत हैं, लेकिन वॉशिंगटन इनकी बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगाता है, खासकर चीन के करीबी देशों को। इसी वजह से पाकिस्तान को सीमित विकल्पों के चलते चीन पर निर्भर होना पड़ा।
रिपोर्ट में बताया गया कि चीन ने भी इस स्थिति का फायदा उठाते हुए अपने ड्रोन जैसे विंग लूंग II को सस्ते विकल्प के रूप में पेश किया। इसकी कीमत करीब 1-2 मिलियन डॉलर बताई जाती है, जबकि एमक्यू-9 रीपर की कीमत लगभग 30 मिलियन डॉलर तक होती है। हालांकि, यह कीमत अंतर प्रदर्शन में भी बड़ा अंतर दर्शाता है, जिसे अक्सर प्रचार में स्पष्ट नहीं किया जाता।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा सीएच-4बी दिखने में एमक्यू-9 रीपर जैसा जरूर लगता है, लेकिन इसकी क्षमताएं सीमित हैं। वहीं, चीन का उन्नत मॉडल सीएच-5 भी इंजन क्षमता के मामले में पीछे है, जिससे इसकी अधिकतम उड़ान ऊंचाई लगभग 9 किमी तक ही सीमित रहती है, जबकि रीपर 12-15 किमी तक उड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का ड्रोन कार्यक्रम अब संस्थागत रूप से इतना गहराई से जुड़ चुका है कि इसे बदलना आसान नहीं होगा, चाहे भविष्य में चीन-पाकिस्तान संबंधों में बदलाव ही क्यों न हो। हालांकि, वास्तविक क्षमता उतनी प्रभावशाली नहीं है, जितनी इसके बारे में प्रचार किया जाता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कम कीमत के पीछे कारण स्पष्ट हैं; रखरखाव की समस्याएं और युद्ध में हुए नुकसान पहले से दर्ज हैं, जो इसकी सीमाओं को उजागर करते हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
आईडीएफ का दावा, 'तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोडक्शन को पहुंचा जबरदस्त नुकसान'
तेल अवीव, 21 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल ने दावा किया है कि उसने रात भर हवाई हमले करने के बाद तेहरान की एक फैक्ट्री में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोडक्शन को “काफी कम” कर दिया है।
इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने कहा कि उसने तेहरान के “दर्जनों” टारगेट पर हमले किए। उसने कहा कि इन जगहों का इस्तेमाल मिसाइलों के डेवलपमेंट के लिए जरूरी पार्ट्स बनाने में किया जाता था।
जिन जगहों पर हमला हुआ उनमें एक कंपोनेंट स्टोरेज फैसिलिटी , एक मिसाइल फ्यूल प्लांट और एक प्रोडक्शन साइट शामिल हैं।
आईडीएफ के टेलीग्राम पोस्ट में कहा गया: “आईडीएफ, सरकार की हथियार प्रोडक्शन फैसिलिटी पर अपने हमले बढ़ाता रहेगा ताकि उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को आगे बढ़ाने की काबिलियत को कम किया जा सके, जो इजरायल के लिए सीधा खतरा है।”
इससे पहले शीर्ष अधिकारियों की बैठक में शनिवार को देश के रक्षामंत्री इजराइल काट्ज ने ईरान पर हमले और तेज करने के संकेत दिए। उन्होंने लगभग वही बात कही जो इस टेलीग्राम पोस्ट से स्पष्ट होती है।
टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, काट्ज ने कहा कि इजरायल ईरानी शासन के खिलाफ हमले को लीड करने, उसके कमांडर्स को खत्म करने और उसकी रणनीतिक क्षमताओं को कम करने में यकीन रखता है। यह तब तक जारी रहेगा जब तक इजरायल और इस क्षेत्र में यूएस हितों के लिए खतरा दूर नहीं हो जाता।
उनके हवाले से कहा गया, “हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक युद्ध के सभी मकसद पूरे नहीं हो जाते।” काट्ज का कहना है कि इस हफ्ते ईरान के खिलाफ हमले और तेज होंगे।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल संघर्ष को खत्म करने के लिए सिर्फ सीजफायर काफी नहीं है, बल्कि इसका पूरी तरह अंत होना चाहिए।
जापान की क्योडो न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा, “यह युद्ध हमारा नहीं है; इसे हम पर थोपा गया है। जब हम अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे थे, तभी हम पर हमला किया गया, जो पूरी तरह गैरकानूनी और बिना उकसावे का था।”
उन्होंने कहा कि ईरान जो भी कर रहा है, वह आत्मरक्षा के तहत कर रहा है और वह जरूरत पड़ने पर और जितने समय तक जरूरी होगा, अपनी रक्षा करता रहेगा।
--आईएएनएस
केआर/
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