Gaurakshan baba Death: फरसा वाले बाबा के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़, टक्कर मारने वाले ट्रक ड्राइव की भी हुई मौत
Gaurakshan baba Death: ब्रज क्षेत्र के मथुरा जिले में ईद के दिन हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके का माहौल तनावपूर्ण बना दिया. थाना कोसीकलां के अंतर्गत कोटवन चौकी क्षेत्र के नवीपुर गांव में विख्यात गौ-सेवक चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की कथित तौर पर एक तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से मौत हो गई. इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया, वहीं परिजन और समर्थक इसे सिर्फ हादसा नहीं बल्कि साजिश बता रहे हैं.
प्रशासन का बयान, कोहरे में हुआ हादसा
मामले पर पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह एक सड़क दुर्घटना थी. एसएसपी श्लोक कुमार के अनुसार, घटना के समय कोहरा था, जिससे दृश्यता कम थी और इसी वजह से यह हादसा हुआ. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों की ओर से लगाए गए आरोपों की हर पहलू से जांच की जा रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
Mathura, Uttar Pradesh: DM C.P. Singh says, "...On the border with Haryana, Baba Chandrashekhar, known as Farsa Wale Baba, was hit by a truck and died... His untimely death has caused grief among the locals, leading to some disruption in law and order..." pic.twitter.com/m2kYktWDbs
— IANS (@ians_india) March 21, 2026
ट्रक चालक की भी मौत, जांच और जटिल हुई
इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब ट्रक चालक खुर्शीद की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. खुर्शीद राजस्थान के अलवर का रहने वाला था. पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था. चालक की मौत के बाद अब इस पूरे प्रकरण की जांच और जटिल हो गई है, क्योंकि घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं.
गुस्साए लोगों ने लगाया जाम, हाईवे पर अफरा-तफरी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला. गुस्साए लोगों ने दिल्ली-आगरा हाईवे को जाम कर दिया, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा और प्रशासन को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराने का प्रयास किया.
Mathura, Uttar Pradesh: Farsa Baba's last rites performed at Ajanokh Gaushala pic.twitter.com/Yp6c3u9BR4
— IANS (@ians_india) March 21, 2026
अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़, माहौल भावुक
‘फरसा वाले बाबा’ के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. पूरे क्षेत्र में शोक की लहर देखी गई. उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों ने भावुक होकर उन्हें अंतिम विदाई दी. यह साफ दिखा कि बाबा का समाज में गहरा प्रभाव था और लोग उन्हें बेहद सम्मान की दृष्टि से देखते थे.
सरकार का आश्वासन, गौशाला को मिलेगी मदद
जिला प्रशासन ने इस घटना के बाद कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की हैं. जिलाधिकारी ने कहा कि बाबा की गौशाला को सरकार की ओर से सहायता प्रदान की जाएगी. साथ ही, जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ है, वहां एक स्मारक या समाधि स्थल बनाने की भी योजना है. प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि पात्र लोगों को आवश्यक लाइसेंस देने पर विचार किया जाएगा.
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चीन की आक्रामकता के बीच भारत का ताइवान पर फोकस, आसियान सहयोग के जरिए क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश
ताइपे, 21 मार्च (आईएएनएस)। मुंबई में एक और ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र खोलने और नई दिल्ली में हुए रायसीना डायलॉग में ताइवान के थिंक टैंकों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत, ताइवान के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है।
‘ताइपे टाइम्स’ की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत दक्षिण-पूर्व और पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत करने में काफी जोर दिया है। इसके चलते इन देशों के साथ भारत के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मोदी ने अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दिया है।रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मिलकर ताइवान की भूमिका को क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए।
कुआलालंपुर, हनोई और अन्य देशों के साथ भारत का बढ़ता रक्षा सहयोग यह साफ संदेश देता है कि भारत, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है। 2023 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का कुआलालंपुर में पहला क्षेत्रीय कार्यालय खोलना भी इस क्षेत्र में भारत की रक्षा मौजूदगी मजबूत करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के ये सक्रिय कदम ताइवान के लिए सकारात्मक हैं। चीन की बढ़ती आक्रामकता का सामना कर रहे ताइवान को भारत की रक्षा कूटनीति से फायदा हो सकता है। इससे दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य में स्थिरता बढ़ाने का एक संतुलित रास्ता निकल सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने वन चाइना पॉलिसी का समर्थन नहीं किया है। सरकार आसियान देशों के साथ सहयोग के नए क्षेत्र बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य रणनीतिक स्वायत्तता की सोच को बढ़ावा देना और क्षेत्र के दूसरे देशों को भी चीन के दबदबे को स्वीकार न करने के लिए समर्थन देना है। रिपोर्ट के अनुसार, ये बदलाव ताइवान के लिए अनुकूल हैं, क्योंकि अब भारत सहित कई क्षेत्रीय शक्तियां अपनी विदेश और सुरक्षा नीतियों में ताइवान के मुद्दे को ज्यादा महत्व दे रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब यह समझ बढ़ रही है कि अगर ताइवान जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति बिगड़ती है, तो इसका असर कई देशों के समुद्री हितों पर पड़ेगा। साथ ही चीन पड़ोसी देशों पर अपना दबाव और बढ़ा सकता है।
भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को ताइवान को त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों में शामिल करने पर विचार करना चाहिए। इसमें बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास भी शामिल हो सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में ताइवान की विशेषज्ञता भारत और आसियान देशों, खासकर चीन की ओर से महत्वपूर्ण ठिकानों पर साइबर हमलों को रोकने में फायदेमंद हो सकती है। नई दिल्ली में हुए एआई इम्पैक्ट समिट में ताइवान का एक प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था। रिपोर्ट का सुझाव है कि भारत को ताइवान के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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