Responsive Scrollable Menu

गजब रंग दिखा रही है Modi की Phone Diplomacy, खाड़ी देशों के बाद अब Iran के राष्ट्रपति से बात की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्त कूटनीतिक ताकत आज एक बार फिर दुनिया के सामने खुलकर सामने आ रही है। जब पश्चिम एशिया जल रहा है, जब ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच तनाव भयानक रूप ले चुका है, जब ऊर्जा ठिकानों पर हमले वैश्विक संकट का संकेत दे रहे हैं, तब दुनिया की नजर एक ऐसे नेता पर टिक रही है जो संवाद, संतुलन और रणनीति का अद्भुत संगम है। सवाल उठ रहा है कि क्या मोदी इस युद्ध में मध्यस्थ बन सकते हैं। जवाब साफ है, क्षमता भी है और अवसर भी।

देखा जाये तो पश्चिम एशिया इस समय शक्ति, अहंकार और संदेह की आग में झुलस रहा है। ईरान द्वारा गैस और तेल ठिकानों पर हमले और इजराइल की जवाबी कार्रवाई ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। कतर, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों तक इसकी आंच पहुंच चुकी है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत की चिंता केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामरिक भी है।

इसे भी पढ़ें: China के मुकाबले India की रक्षा तैयारी कितनी मजबूत है? संसाधन और ताकत के मामले में कौन-सा देश आगे है?

यही वह मोड़ है जहां प्रधानमंत्री मोदी की सक्रियता निर्णायक बनती दिख रही है। उन्होंने एक के बाद एक ओमान, जॉर्डन, मलेशिया और फ्रांस के नेताओं से बात कर साफ संकेत दिया कि भारत केवल दर्शक नहीं बल्कि समाधान का हिस्सा बनना चाहता है। ओमान के सुल्तान से बातचीत में मोदी ने स्पष्ट कहा कि संवाद और कूटनीति ही तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता है। जॉर्डन के राजा से चर्चा में उन्होंने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को सीधे तौर पर निंदनीय बताया। फ्रांस के साथ समन्वय बढ़ाकर उन्होंने वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई। ईरान के राष्ट्रपति से बात कर मोदी ने ईरान में बुनियादी ढांचों पर हमले की निंदा की। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मोदी ने कहा, ''राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत की और उन्हें ईद तथा नौरोज़ की शुभकामनाएँ दीं। हमने आशा व्यक्त की कि यह त्योहारी मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आए। क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवसंरचना पर हुए हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं।'' उन्होंने कहा कि बातचीत में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि समुद्री मार्ग खुले और सुरक्षित बने रहें। प्रधानमंत्री ने ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की सराहना भी की।

देखा जाये तो यह कोई सामान्य कूटनीतिक कवायद नहीं है, यह एक सुनियोजित रणनीतिक चाल है। दरअसल भारत उन गिने चुने देशों में है जिसके संबंध अमेरिका, ईरान, इजराइल और खाड़ी देशों, सभी के साथ मजबूत हैं। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में खाड़ी देशों के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई दी है, इजराइल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत किया है और साथ ही ईरान के साथ संपर्क भी बनाए रखा है। यही संतुलन उन्हें संभावित मध्यस्थ बनाता है।

भारत के लिए यह संकट केवल बाहरी नहीं है। खाड़ी देशों में एक करोड़ से अधिक भारतीय काम करते हैं। वहां की स्थिरता सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संतुलन से जुड़ी है। इसके अलावा भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में ऊर्जा ठिकानों पर हमला भारत के लिए सीधा खतरा है। इसीलिए भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को गहराई से परेशान करने वाला और अस्वीकार्य बताया है।

रणनीतिक दृष्टि से देखें तो मोदी की कूटनीति का सबसे बड़ा पहलू है भारत की स्वायत्त नीति। भारत न तो किसी एक खेमे में पूरी तरह खड़ा है और न ही किसी के खिलाफ खुलकर गया है। यह संतुलन ही उसे भरोसेमंद बनाता है। दुनिया जानती है कि भारत की मंशा विस्तारवाद नहीं बल्कि स्थिरता है। यही कारण है कि ओमान और कतर जैसे देश, जो पहले से बैक चैनल भूमिका निभा रहे हैं, भारत के साथ सहज महसूस करते हैं।

साथ ही मोदी की फोन कूटनीति भी एक बड़े खेल का हिस्सा है। यह केवल बातचीत नहीं बल्कि संकेत है कि भारत अब वैश्विक संकटों में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। खास बात यह है कि भारत ने अपने बयान में संतुलन रखा है। पहले जहां केवल ईरान की आलोचना होती थी, अब भारत ने सभी पक्षों द्वारा नागरिक ढांचे पर हमलों को गलत बताया है। यह बदलाव बताता है कि भारत खुद को निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर रहा है।

सवाल यह नहीं है कि मोदी मध्यस्थ बन सकते हैं या नहीं, सवाल यह है कि क्या भारत को यह भूमिका निभानी चाहिए। देखा जाये तो इसमें जोखिम भी है। यदि प्रयास असफल होता है तो भारत की साख पर असर पड़ सकता है। लेकिन अगर सफल होता है तो भारत वैश्विक शक्ति संतुलन में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सामरिक पहलू है ऊर्जा सुरक्षा। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक तेल आपूर्ति को झटका दे सकता है। भारत जैसे देश के लिए यह आर्थिक संकट में बदल सकता है। इसलिए मोदी का जोर केवल शांति पर नहीं बल्कि ऊर्जा प्रवाह को निर्बाध बनाए रखने पर भी है।

दूसरा बड़ा पहलू है भारतीय नागरिकों की सुरक्षा। खाड़ी देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए मोदी ने हर बातचीत में आभार भी जताया और दबाव भी बनाया। यह दर्शाता है कि उनकी कूटनीति केवल वैश्विक नहीं बल्कि मानवीय भी है। एक और पहलू है भारत की वैश्विक छवि। अगर भारत इस संकट में निर्णायक भूमिका निभाता है तो यह केवल एक कूटनीतिक जीत नहीं होगी, बल्कि यह संदेश होगा कि नई दुनिया में संतुलन बनाने वाला देश भारत है।

बहरहाल, पश्चिम एशिया का यह युद्ध अभी थमा नहीं है, बल्कि और भड़क सकता है। लेकिन इस आग के बीच एक आवाज लगातार उठ रही है संवाद की, संयम की और समाधान की। वह आवाज है प्रधानमंत्री मोदी की। यही वजह है कि अब केवल विश्लेषक ही नहीं बल्कि फिनलैंड के राष्ट्रपति तक सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि इस संकट में मोदी जैसे नेता की मध्यस्थ भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। साफ है कि वैश्विक मंच पर भारत की साख और मोदी की कूटनीतिक ताकत को दुनिया खुलकर स्वीकार कर रही है। दुनिया अब यह मानने लगी है कि अगर कोई इस जटिल समीकरण को सुलझा सकता है, तो वह भारत ही है।

Continue reading on the app

आगरा का पेठा: मुगल रसोई से ग्लोबल मार्केट तक, 400 साल पुराना यह स्वाद आज 700 करोड़ का कारोबार

ताजमहल की नगरी आगरा सिर्फ अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मशहूर “पेठा” के लिए भी जानी जाती है। 400 साल पुराने इस मीठे सफर की कहानी मुगल दरबार से शुरू होकर आज ग्लोबल मार्केट तक पहुंच चुकी है। कभी शाहजहां की रसोई में तैयार हुई यह मिठाई आज 700 करोड़ के कारोबार में बदल चुकी है और हजारों परिवारों की जिंदगी का सहारा बनी हुई है।

​मुगलिया दौर से शुरुआत: शाहजहां की रसोई का आविष्कार 
पेठे की शुरुआत का इतिहास मुगल बादशाह शाहजहाँ के दौर से जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि जब ताज महल का निर्माण हो रहा था, तब मुख्य वास्तुकार ने बादशाह से मजदूरों के लिए ऐसी मिठाई की मांग की जो ताज जैसी ही सफेद हो और उन्हें तुरंत ऊर्जा दे सके।

आज यह सादे स्वाद से निकलकर केसर, चॉकलेट और पान जैसे 50 से अधिक आधुनिक स्वादों में उपलब्ध है।

शाही बावर्चियों ने कड़ी मेहनत के बाद सफेद कद्दू, चीनी और चूने के पानी के मेल से 'पेठा' तैयार किया। देखते ही देखते यह शाही रसोई की शान बन गया और ताज महल के साथ-साथ इसकी ख्याति भी दूर-दूर तक फैल गई।

​पहली दुकान और 'पंछी पेठा' का उदय
आगरा में पेठे को एक व्यावसायिक पहचान दिलाने का श्रेय 'पंछी पेठा' को जाता है। इसकी शुरुआत लगभग 1940 के दशक के आसपास हुई थी। पंछी पेठा आगरा का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित ब्रांड माना जाता है।

'पंछी पेठा' जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों ने इसे व्यावसायिक पहचान दिलाई।

शुरुआत में पेठा सिर्फ सादा और सूखा मिलता था, लेकिन समय के साथ इसकी गुणवत्ता और ब्रांडिंग ने इसे देश-विदेश में मशहूर कर दिया। आज आगरा में हजारों दुकानें हैं, लेकिन 'पंछी पेठा' के नाम से ही असली पेठे की पहचान की जाती है।

​सफेद कद्दू : पेठे का मुख्य फल और इसकी पैदावार 
पेठा बनाने के लिए जिस खास फल का इस्तेमाल होता है, उसे 'सफेद कद्दू' या स्थानीय भाषा में 'भुआ' कहा जाता है। इसकी सबसे अच्छी पैदावार उत्तर प्रदेश के चंदौली, प्रयागराज, जौनपुर और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में होती है।

सफेद कद्दू' से बनने वाला यह उत्पाद आगरा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसका सालाना टर्नओवर 500 से 700 करोड़ रुपये है।

आगरा के पेठा कारोबारी भारी मात्रा में इन जिलों से कच्चे कद्दू मंगवाते हैं। पेठा बनाने के लिए केवल पूरी तरह पके हुए और सख्त छिलके वाले कद्दू ही चुने जाते हैं, क्योंकि उनमें गूदा अधिक और पानी कम होता है।

​मेकिंग प्रोसेस: चूने के पानी से चाशनी तक का कठिन सफर 
पेठा बनाने की प्रक्रिया काफी लंबी और मेहनत भरी होती है। सबसे पहले कद्दू को छीलकर उसके बीज निकाले जाते हैं और छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को सुइयों से गोदकर चूने के पानी में भिगोया जाता है, ताकि वे सख्त हो सकें।

इसके बाद इन्हें साफ पानी से धोकर उबाला जाता है। अंत में, इन उबले हुए टुकड़ों को चीनी की गाढ़ी चाशनी में घंटों तक पकाया जाता है। चाशनी जब टुकड़ों के अंदर तक समा जाती है, तब इसे ठंडा करके विभिन्न स्वादों में ढाला जाता है।

​कितने तरह के होते हैं पेठे? स्वाद की लंबी फेहरिस्त 
वक्त के साथ पेठे ने अपना पारंपरिक चोला उतारकर आधुनिक स्वाद अपना लिया है। आगरा में आज 50 से ज्यादा किस्मों के पेठे तैयार किए जाते हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय अंगूरी पेठा, सूखा पेठा, केसर पेठा और चॉकलेट पेठा हैं।

आगरा में आज 50 से ज्यादा किस्मों के पेठे तैयार किए जाते हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय अंगूरी पेठा, सूखा पेठा, केसर पेठा और चॉकलेट पेठा हैं।

इसके अलावा आजकल पान पेठा, सैंडविच पेठा, चेरी पेठा और शुगर-फ्री पेठा भी काफी मांग में रहते हैं। पर्यटकों के लिए अब पेठे को आकर्षक पैकिंग और गिलासों में भी पेश किया जाता है।

​करोड़ों का कारोबार और वैश्विक एक्सपोर्ट
आगरा में पेठे का कारोबार सालाना 500 से 700 करोड़ रुपये से भी अधिक का है। शहर में लगभग 1500 से ज्यादा छोटी-बड़ी पेठा निर्माण इकाइयां हैं, जहाँ रोजाना करीब 700 से 800 टन पेठा तैयार किया जाता है।

आगरा का पेठा सिर्फ भारत के कोनों-कोनों में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, दुबई और खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट किया जाता है। यह उद्योग आगरा के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

Continue reading on the app

  Sports

कप्तानी में अलग है ईशान किशन का तेवर, लेट होने वाले खिलाड़ी पर लगाते हैं जुर्माना, कोच ने किया खुलासा

Ishan Kishan impose fine of Rs 1000: आईपीएल 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस शुरुआत कुछ मैचों में टीम के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे. ऐसे में विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन को टीम का कप्तान नियुक्त किया गया है. इससे पहले ईशान झारखंड के लिए कप्तानी करते हुए कमाल कर चुके हैं. Sat, 21 Mar 2026 23:36:50 +0530

  Videos
See all

युवक पर चढ़ा, पैर से कुचला और.. #elephantattack #viralvideo #shorts #elephanthumanconflict #odisha #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-21T21:30:01+00:00

Iran-America War 2026: क्या PM Modi ने दिया ईरान का साथ? | Iran fires Missiles at Diego Garcia | Top #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-21T22:00:20+00:00

Iran Israel War: रात 3 बजे ईरान के परमाणु अड्डे पर अमेरिका की बमबारी? | Netanyahu | Khamenei | Trump #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-21T21:30:09+00:00

LPG-PNG Crisis in India: 4 बजते ही बढ़ गए गैस तेल के दाम | Top News | Breaking News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-21T22:30:06+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers