विदेश में यूपीआई का विस्तार: भारत-भूटान के बीच जल्द शुरू होगी क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। भारत और भूटान के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की गई है। जल्द ही दोनों देशों के बीच यूपीआई के जरिए क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर (विदेश में पैसे भेजने की सुविधा) यानी धन-प्रेषण पहल शुरू की जाएगी।
यह सुविधा डाक नेटवर्क के जरिए दी जाएगी, जिसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) के पोस्ट ट्रांसफर सिस्टम को भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से जोड़ा जाएगा।
इस पहल से दोनों देशों के लोगों को सस्ता और आसान तरीके से पैसे भेजने और प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी, जिससे वित्तीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
इस संबंध में भारत और भूटान ने डाक सहयोग के लिए एक समझौता (एमओयू) भी किया है, जो इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग का एक ढांचा तैयार करेगा।
इस समझौते के तहत डाक सेवाओं, तकनीकी विकास, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, फिलेटली (डाक टिकट संग्रह), क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
दोनों देशों ने प्रशिक्षण और कौशल विकास पर भी जोर दिया है। इसके तहत भूटान के डाक अधिकारी भारत में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिनमें रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी और अन्य प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।
इन कार्यक्रमों में संचालन, प्रबंधन और नई तकनीकों से जुड़ी जानकारी दी जाएगी ताकि डाक सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
इसके अलावा, भारत और भूटान ने तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इसमें डिजिटल पोस्टल सिस्टम और डिजिटल एड्रेस कोड जैसी तकनीकों को साझा करना शामिल है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
दोनों देशों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और फिलेटली के क्षेत्र में भी सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई है। भूटान पोस्ट को भारत में आयोजित डाक टिकट प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
भारत ने यह भी कहा है कि वह डाक नेटवर्क के जरिए वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने और लोगों तक आसानी से बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के अपने अनुभव को भूटान के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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यूपी बनेगा डेयरी हब: ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ से किसानों को नई ताकत दे रही योगी सरकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डेयरी सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है. ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ के जरिए सरकार न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, बल्कि किसानों और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठा रही है. इस योजना के तहत अगले तीन वर्षों में प्रदेश में 204 डेयरी इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा.
2023-24: लक्ष्य के करीब पहुंची योजना
वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए निर्धारित 50 डेयरी इकाइयों के लक्ष्य को लगभग पूरा कर लिया गया है. मेरठ और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में बैंक ऋण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर और बरेली मंडलों में लाभार्थियों को अनुदान की पहली और दूसरी किश्त तेजी से दी जा रही है. इससे यह साफ है कि योजना केवल घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर तेजी से लागू हो रही है.
2024-25: नए क्षेत्रों में विस्तार
योजना के दूसरे चरण (2024-25) में 8 मंडल मुख्यालयों पर 40 नई डेयरी इकाइयों की स्थापना का कार्य शुरू हो चुका है. मिर्जापुर, बस्ती, आजमगढ़ और अलीगढ़ जैसे जिलों में बैंक ऋण से जुड़े कई मामलों पर तेजी से काम हो रहा है. सरकार की प्राथमिकता है कि चयन प्रक्रिया से लेकर अनुदान वितरण तक हर कदम पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए.
2025-26: 57 जिलों तक पहुंचेगी योजना
आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है. इसके तहत योजना का विस्तार 57 जिलों तक किया जाएगा, जहां कुल 114 डेयरी इकाइयां स्थापित होंगी. जौनपुर, जालौन और देवरिया जैसे जिलों में ऋण स्वीकृति का काम पहले ही पूरा हो चुका है, जिससे योजना के तेजी से लागू होने की उम्मीद और मजबूत हो गई है.
समयबद्ध क्रियान्वयन पर सख्ती
राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुदान वितरण में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उच्च स्तर पर निगरानी रखी जा रही है ताकि लाभार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता बढ़ रही है, बल्कि किसानों का भरोसा भी मजबूत हो रहा है.
किसानों के लिए सुनहरा अवसर
‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक बड़ा अवसर बनकर उभर रही है. डेयरी इकाइयों के जरिए पशुपालक अब छोटे स्तर से आगे बढ़कर उद्यमी बन सकते हैं. इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी.
यह योजना उत्तर प्रदेश को डेयरी उत्पादन में अग्रणी बनाने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है. यदि इसी गति से क्रियान्वयन जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में यूपी देश का प्रमुख डेयरी हब बनकर उभर सकता है.
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